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रोग |
रस्ट
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हिन्दी नाम |
किट्ट
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कारक जीवाणु |
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लक्षण एवं क्षति
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नये पौधों में
संक्रमण से पौधे के एक तरफ मुड़ जाता है।
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हाइपोकोटाइल पर
काजू के समान भूरे रंग के धब्बे बनते है जिससे बुआई बरबाद हो
जाती है।
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पूराने पौधे मुड़
जाते है, तने के आधार की ज्यादा बढ़त हो जाती है।
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पौधे की पत्तियों
की सतह पर चूर्ण काजू के समान भूरे छोटे धब्बे 1-2 मि.मी. लम्बे
बनते है जो बाद में काले पड़ जाते है।
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पत्तियों,फूल और
फल में रोग के भूरे कण लक्षण के रूप में दिखाई पड़ते है।
ये धब्बे बाद में काले रंग के हो जाते है।
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नियंत्रण
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0.05 प्रतिशत
कैलीक्सीन या 0.25 प्रतिशत का 15 दिन के अन्तराल में
छिड़काव करें।
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थाईरम या कैप्टन
3 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज या गीली सल्फर 2 ग्राम/ लीटर
की दर से बीजोप्चार करें।
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आई.पी. एम
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रोग मुक्त बीजों
का उपयोग करें।
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बीज उपचार अवश्य
करें।
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प्रतिरोधक किस्में
जैसे मनजीरा या सागरमुथीआलू को उगाए।
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फसल के पूर्व
अवशेषों को नष्ट करें।
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अन्तरसस्य
क्रियाओं द्वारा नियंत्रण करें।
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अनुमोदित समय पर
बोनी करें।
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निचले इलाकों में
और बाढत्र वाले इलाके में न उगाए।
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रोग ग्रस्त पौधों
को उखाड़कर फेंक दे।
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सिंचाई समय पर करें।
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रोग |
अल्टानेरिया
ब्लाइट |

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हिन्दी नाम |
अल्टानेरिया
पर्ण धब्बा |
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कारक जीवाणु
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अल्टानेरिया
कारथामी |
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लक्षण एवं क्षति
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सिंचित क्षेत्रों
में इस रोग की समस्या अधिक है। बादल और फुहार वाले क्षेत्रों
में संक्रमण अधिक है।
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इसमें गहरे रंग
की गोल गोल धब्बेनुमा धारियां दिखती है।
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बीमारी नीचे के
पत्ते से शुरू होकर ऊपर बढ़ती है और तीव्र अवस्था में होने से
आसपास के छोटे पत्तों पर फैल जाती है व तने पर भी धब्बे बनते
है।
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पत्ते पीले पड़कर
टूटने लगते है और पैदावार बहुत कम होती है।
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रोग ज्यादा बढ़ने
से बीज छोटे रह जाते है और इनका रंग बदल जाता है।
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नियंत्रण
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कार्बाडजिम 1.5
ग्राम प्रति किंग्रा. बीज की दर से बीज उपचार करें।
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रोग के लक्षण
दिखते ही 0.25 प्रतिशत मेनेकोजेब का छिड़काव करें। यदि रोग की
तीव्रता अधिक हो तो 15 दिन बार पुन: छिड़काव करें।
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आई.पी. एम
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प्रतिरोधक किस्में
जैसे से/फ्लावर जी.एम.यू. 793 को उगाए।
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साफ स्वच्छ खेती
करें।
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फसल के पूर्व
अवशेष नष्ट करें।
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अन्तरसस्य
क्रियाओं द्वारा नियंत्रण करें।
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अनुमोदित समय पर
बोनी करें।
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निचले इलाकों
में और बाढत्र वाले इलाके में न उगाए।
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रोग ग्रस्त पौधों
को उखाड़कर फेंक दे।
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सिंचाई समय पर
करें।
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रोग |
सरकोस्पोरा लीफ स्पॉट |

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हिन्दी नाम |
सरकोस्पोरा पर्ण
धब्बा |
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कारक जीवाणु
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सरकोस्पोरा
कारथामी |
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लक्षण एवं क्षति
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बोनी के कुछ
सप्ताह बाद या फूल आने की अवस्था में इस रोग का आक्रमण होता
है।
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गोल से अनियमित
भूरे धब्बे 3 से 10 मि.मी. व्यास के पत्तियों पर बनते है।
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धब्बे पीले रंग
के हेलोस से घिरे रहते है।
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लक्षण पहले निचली
पत्तियों पर दिखाई देते है। और ऊपर की पत्तियों पर फैलते है।
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नमी के वातावरण
में धब्बे पर स्लेटी सफेद फंफूद सी उभर जाती है।
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तने एवं गांठों
पर भी असर होता है।
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प्रभावित कलियां
भूरे रंग में बदल जाती है और मर जाती है।
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फंफूद बीज और पौधे
के अवशेषों में रहती है और हवा के द्वारा फैलती है।
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गर्म नमी युक्त
वातावरण बीमारी के फैलने में सहायक है।
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नियंत्रण
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थाईरम 3 ग्राम
प्रति कि.ग्रा. बीज से बीज उपचार करें।
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2.5 ग्राम
मेनकोजेब, 1 ग्राम प्रति लीटर कार्बानडिजिम का छिड़काव करें।
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आई.पी. एम
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प्रतिरोधक किस्में
को उगाए।
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साफ स्वच्छ खेती
करें।
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फसल के पूर्व
अवशेष नष्ट करें।
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अन्तरसस्य
क्रियाओं द्वारा नियंत्रण करें।
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अनुमोदित समय पर
बोनी करें।
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निचले इलाकों में
और बाढ़ वाले इलाके में न उगाए।
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रोग ग्रस्त पौधों
को उखाड़कर फेंक दे।
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सिंचाई समय पर करें।
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रोग |
विल्ट |
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हिन्दी नाम |
उकटा
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कारक जीवाणु
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फ्यूजेरियम
ओक्सीस्पोरम एफ.स्पी. कार्ठामी |
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लक्षण एवं क्षति
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इस रोग में पौधे
के नीचे के पत्ते पीले पड़ने लगते है।
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धीरे धीरे बीमारी
ऊपर के पत्ते पर फैलती है और मुख्य तने ग्रसित होकर व आसपास की
शाखायें मुरझाकर सूखने लगती है।
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बाद में पूरा पौधा
सूख जाता है।
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यह रोग अत्याधिक
बारिश, खेत में ज्यादा नमी, जल निकास अच्छा न होना व एक खेत
में बार बार कुसुम बोने से फैलती है।
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नियंत्रण
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कार्बानडीजिम(
एस.टी) और सुडोमोनास से बीज उपचार करने से सबसे कम रोग का
आक्रमण होता है (10 प्रतिशत से भी कम)। इसके बाद
कार्बानडजिम ( एस.टी.) एवं ट्राईकोडर्मा हर्जानम 2.5
कि.ग्रा./हे मिट्टी में मिलाने से रोग का आक्रमण में कमी
लाता है।
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कैप्टन या
कार्बानडजिम 0.1 से 0.2 प्रतिशत 2 ग्राम/ लीटर की दर से
बीज उपचार करें।
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ट्राईकोडर्मा
विरिडे और कार्बाडजिम ( 0.01 प्रतिशत ए.आई.) से बीज उपचार
करें और 15 कि.ग्रा./हे की दर से पोटॉश को मिट्टी में
मिलाने से रोग का आक्रमण कम होता
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आई.पी. एम
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प्रतिरोधक किस्में
जैसे से/फ्लावर जी.एम.यू. 793, जी.एम.यू. 809 को उगाए।
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साफ स्वच्छ खेती
करें।
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फसल के पूर्व
अवशेष नष्ट करें।
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अन्तरसस्य
क्रियाओं द्वारा नियंत्रण करें।
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अनुमोदित समय पर
बोनी करें।
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निचले इलाकों में
और बाढत्र वाले इलाके में न उगाए।
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रोग ग्रस्त पौधों
को उखाड़कर फेंक दे।
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सिंचाई समय पर करें।
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रोग |
पाऊडरी मिल्डयू
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हिन्दी नाम |
भभूतिया रोग |
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कारक जीवाणु
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इरीसाइफी
सीकोराइसम |
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लक्षण एवं क्षति
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इस रोग में पत्ते
के ऊपरी एवं निचले भाग पर सफेद पाउडर ( भभूत) डालने जैसे धब्बे
दिखते है।
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ये धब्बे बढकर
बाद में पूरे पत्ते पर फैल जाते है और पत्ते गिरने लगते है।
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अत्याधि नमी व कम
तापमान में यह बीमारी अधिक फैलती है।
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नियंत्रण
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3 ग्राम गीला
सल्फर का छिड़काव करें।
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आई.पी. एम
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प्रतिरोधक किस्में
को उगाए।
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साफ स्वच्छ खेती
करें।
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फसल के पूर्व
अवशेष नष्ट करें।
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अन्तरसस्य
क्रियाओं द्वारा नियंत्रण करें।
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अनुमोदित समय पर
बोनी करें।
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निचले इलाकों
में और बाढत्र वाले इलाके में न उगाए।
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रोग ग्रस्त पौधों
को उखाड़कर फेंक दे।
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सिंचाई समय पर
करें।
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रोग |
मोजेक
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हिन्दी नाम |
कुकुबर मोजेक
वायरस |

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कारक जीवाणु
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कुकुबर मोजेक
वायरस
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लक्षण एवं क्षति
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पौधे की नई
पत्तियों पर अनियमित एकान्तर हरे एवं पीले धब्बे हो जाते है।
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पत्तियों पर फफोले
पड़ जाते है और आकार बदल जाते है और प्रभावित पौधे बौने रह जाते
है।
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नियंत्रण
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मोनोक्रोटोफॉस
1.5 मि.ली. या डाईमेथोएट 2 मि.ली. का छिड़काव करने से एफिड
पर नियंत्रण किया जा सकता है।
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आई.पी. एम
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प्रतिरोधक किस्में
को उगाए।
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साफ स्वच्छ खेती
करें।
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फसल के पूर्व
अवशेष नष्ट करें।
-
अन्तरसस्य
क्रियाओं द्वारा नियंत्रण करें।
-
अनुमोदित समय पर
बोनी करें।
-
निचले इलाकों
में और बाढत्र वाले इलाके में न उगाए।
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रोग ग्रस्त पौधों
को उखाड़कर फेंक दे।
-
सिंचाई समय पर
करें।
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