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खेत में हानिकारक कीटों के
प्रकोप तथा जैव नियंत्रण के साधनों की संख्या के सही
आकलन हेतु फसल की बुवाई एवं रोपाई से लेकर कंसे बनने
तक प्रत्येक 4-5 दिनों के अंतराल पर नियमित रूप से फसल
निरिक्षण करें ।
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निरीक्षण के दौरान
25 पेढ़ियों का परीक्षण करना चाहिए।
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हानिकारक कीटों तथा जैव
नियंत्रण के साधनों की संख्या के आंकलन के लिए जल
पात्र एवं कीड़े के पकड़ने वाले जालियां का उपयोग करें।
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तना छेदक कीट की
संख्या के निरीक्षण के लिए फेरोमेन प्रपंच का उपयोग करें।
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ग्रीष्म कालीन गहरी
जुताई, मेढों की सफाई तथा पिछली फसल के अवशषों को नष्ट
करें।
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स्वस्थ प्रतिरोधक
/ सहनशील किस्मों के बीजों का उपयोग करें।
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समय पर बुआई एवं
रोपण करें।
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स्वस्थ नर्सरी को
बनाये।
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धान की रोपा का
उपचार करें।
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रोपाई ज्यादा दूरी
पर करें।
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20 कतारों के बाद
अन्तरसस्य क्रियाओं के लिए एक कतार छोड़े।
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उर्वरक और सूक्ष्म
पोषक तत्वों का संतुलित मात्रा में उपयोग करें।
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जल प्रंबधन की उचित
व्यवस्था करें ( पानी के जमाव से बचें)।
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जमीन के पास से कटाई
करें।
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हानिकारक कीटों के
अण्ड समूह इल्लियों को एकत्रित कर बाँसों पर रखें ।
जैविक नियंत्रण साधनों के समीप रख कर नष्ट करें ।
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पौधे के कीट
प्रकोपित भागों को नष्ट करें ।
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रोपों की पत्तियों
के अग्र सिरे को काट कर अलग कर देवें ।
रसायनिक निंयत्रण
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समन्वित कीट नियंत्रण में
कीटनाशी रसायनों का आवश्यकतानुसार, तर्क संगत एवं
सुरक्षित उपयोग मुख्य तत्व है। रासायनिक कीटनाशकों का
प्रयोग आवश्यकतानुसार, आर्थिक देहली स्तर एवं जैविक
नियंत्रण के साधनों को देखते हुए सुरक्षित एवं अंतिम
उपाय के रूप में ही करें ।
नींदा नियंत्रण :-
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वर्षा के पानी का संरक्षण,
स्टेल सीड बेड तैयार करें,बखर चलाए एवं खेत तैयारी के
बाद समतल करने से नींदा नियंत्रण होता है।
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समय पर बोनी करें
जिससे नींदा को नियंत्रित किया जा सके।
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यांत्रिक विधियों
द्वारा नींदा नियंत्रण पहली बार 2-3 सप्ताह बाद एवं
दूसरी बार बोनी के 4-6 सप्ताह बाद करें।
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सीधी बुआई में
नींदानाशक का छिड़काव करने के 4 से 6 सप्ताह बाद एक बार
हाथ से नींदाओं को नष्ट करना लाभदायक है।
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मेढ़ों एवं सिंचाई की
नालियों को नींदा मुक्त रखें।
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रोपण के समय धान के
पौधों को नींदाओं से मुक्त रखें।
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उपयुक्त पौध संख्या
रखें एवं संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग करें।
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नींदाओं को बढ़ने से
रोकने के लिए खेत में पानी की हल्की परत रहने दें।
सूत्रकृमि प्रंबधन के उपाय :-
सूुत्रकृमि प्रंबधन, धान की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए
आवश्यक है।सूत्रकृमि प्रंबधन के लिए प्रमुख उपाय :
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6 घंटे धान के बीजों को
भिगोने के बाद गर्म पानी जिसका 52 डि.से. तापमान हो
में 10 मिनट तक उपचारित करें।
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नर्सरी में बुआई करने
के पहले सीड बेड को 3 जी. कार्बोयूरान 33 कि.ग्रा./हे
की दर से उपचारित करें।
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बोनी के पहले बीजों
को 0.2 प्रतिशत मेनकोजेब या मोनोक्रोटोफॉस में 6 घंटे
तक भिगाये।
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प्रतिरोधक किस्में
जैसे रत्ना,त्रिवेणी,टी.के.एम.-6, टी.के.एम.-7,
टी.के.एम.-9,
सूर्या,कावेरी,इन्दिरा,अन्नपूर्णा,हमसा,अन्नदा, आई.आर.-64
को उगाए।
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आलू,मूंगफली,शकरकन्द,अरन्डी,सूरजमुखी,बरबटी,तिल
एवं प्याज को धान के फसल चक्र में उगाए।
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कार्बोयूरान को
मिट्टी में मिलाए।
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अगेती किस्म जैसे पद्मापानी
उगाए।
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