कीट के शिशु और वयस्क पत्ती के मध्य भाग
से रस चूसते है और टॉकसन छोड़ते है जिससे शिराओं सफेद हो
जाती है और हरिमाहीन धब्बे दिखाई देते है जो अंग्रेजी के
'वी' अक्षर की तरह दिखाई देती है। अधिक आक्रमण वाली फसल
पीली दिखाई देती है।
आई.पी.एम
प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
नियंत्रण
रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना
चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।
जेसिड के लिए आर्थिक देहली स्तर 2-3
लार्वा प्रति पौधा है।
36 एस.एल मोनोक्रोटोफॉस 600 मि.ली / हे
या 30 ई.सी. डाईमेथोएट 650 मि.ली./हे 600 लीटर पानी के साथ
छिड़काव करें।
कीट पत्तियों को इस कदर खाते है कि पौधा
पत्ती रहित हो जाता है और ये इल्लियां एक खेत से दुसरे खेत
तक पंहुच जाती है।
30 से 40 दिन पत्तियां खाने के बाद ये
मिट्ठी के अन्दर अण्डे देते है।
आई.पी. एम
मानसून के तुरन्त बाद 20-45 दिन के लिए
प्रकाश फन्दे लगााना चाहिए और वयस्क मॉथों को एकत्रित करके
मारना लाभकारी है।
खरीफ फसलों के बाद खेत को जोतकर परजीवीयों
के लिए प्यूपा को ऊपर कर देना चाहिए।
नियंत्रण
वयस्क इल्लियों के आवागमन को शाकाहारी
फन्दे जिसमें जंगली अरन्डी या सकला का उपयोग करके रोका जा
सकता है।
2 प्रतिशत मिथाइा पैराधियॉन का 25 से 30
कि.ग्रा/हे की दर से भुरकाव करें या पैराथियॉन 50 ई.सी. का
700-750 मि.ली. /हे की दर से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर
छिड़काव करें।