जवाहरलाल नेहरू कृषि
विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1964 में प्रदेश के कृषि विकास
के लिए हुई। विश्वविद्यालय में संस्था प्रमुख कुलपति हैं।
कार्य संपादन के लिए कुलसचिव, लेखानियंत्रक, दो अधिष्ठाता
संकाय, क्रमश: अधिष्ठाता कृषि संकाय, अधिष्ठाता कृषि
अभियांत्रिकी संकाय, तीन संचालक क्रमश: संचालक शिक्षण, संचालक
विस्तार सेवाऐं, संचालक अनुसंधान सेवाएें तथा 04 अधिष्ठाता कृषि,
01 अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी के पद स्वीकृत है साथ ही 04
क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, 04 आंचलिक अनुसंधान केन्द्र एवं
20 कृषि विज्ञान केन्द्र जो प्रदेश के कृषि जलवायु क्षेत्र में
विश्वविद्यालय के अन्तर्गत कृषि शिक्षा अनुसंधान एवं विस्तार
का कार्य संपादित कर रहे हैं। विश्वविद्यालय कृषि उत्पादन,
उत्पादकता एवं टिकाऊ कृषि उत्पादन तंत्र तथा ग्रामीण जीवन शैली
की गुणवत्ता की समग्र अभिवृध्दि हेतु एक मिशन की भांति कटिबध्द
हैं। कृषि एवं सम्बध्द विज्ञानों की उच्च स्तरीय शिक्षा एवं
अनुसंधान केन्द्र के रूप में सेवाएॅ देना तथा अनुशंसित
प्रौद्योगिकी का कृषकों, विस्तार कार्यकर्ताओं एवं विविध कृषि
विकास कार्यक्रमों से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं तक प्रसारित करना
हैं।
उपलब्धियां
विश्वविद्यालय के लिये वर्ष 2011-12 विशिष्ट उपलब्धियों से
परिपूर्ण रहा। देश भर के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही
केन्द्रीय कृषि मंत्री माननीय शरद पवार, माननीय मुख्यमंत्री
शिवराजसिंह चौहान, कृषि राज्य मंत्री चरणदास महंत, डॉ.
रामकृष्ण कुसमरिया सहित अनेकों गणमान्य राजनीतिज्ञ और भारत की
शीर्षस्थ शासकीय संस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली
के डायरेक्टर जनरल डॉ. एस. अयप्पन एवं भारत के विख्यात कृषि
विश्वविद्यालयों के लगभग 10 माननीय कुलपति आदि प्रमुख रूप से
उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने हेतु प्रदेश सरकार
द्वारा कृषि केबीनेट का गठन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यवाही
के पूर्व लगातार तीन दिन तक चली राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर
के उपस्थित प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों की उपस्थिति में कृषि
विकास के मसौदे पर गहन विचार मंथन किया गया।
विश्व विद्यालय के नेतृत्व में देश भर के कृषि विज्ञान केन्द्रों
का राष्ट्रीय सम्मेलन जबलपुर में संपन्न हुआ । इस महा सम्मेलन
में हजारों कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य
था कि देश भर के वैज्ञानिक, शिक्षक और कृषि तकनीक से कृषि वि.वि.
का जीवन्त सम्पर्क स्थापित हो । अमेरिका जैसे देशों के साथ
एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित कर वि.वि. की छवि पहले ही अंतर्राष्ट्रीय
स्तर पर स्थापित हो चुकी है । इसके साथ ही वि.वि. ने अनेकों
नवीन किस्मों का भी विकास कर कृषि क्षेत्र और किसानों की सेवा
की है । जहां हजारों किसानों को प्रशिक्षित किया गया वहीं
शासकीय कार्यकर्ताओं और कृषि विस्तार अधिकारियों को भी
प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर तैयार किये गये । जिससे किसानों
तक आधुनिक कृषि तकनीक आसानी से पहुंच सके। कृषि क्षेत्र की निजी
कम्पनियों से भी एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये गये, ताकि कृषि
वि.वि. द्वारा विकसित उन्नत तकनीक का सद्ुपयोग हो और किसानों
तक तकनीक व बीज इत्यादि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो सकें ।
विगत वर्ष की विश्वविद्यालय की उपलब्धियों में वैज्ञानिकों को
राष्ट्रीय पुरूस्कार, कृषि विज्ञान केन्द्र जबलपुर को जोन-7 का
सर्वश्रेष्ठ पुरूस्कार आदि शामिल है । अधोसंरचना विकास,
प्रक्षेत्र उन्नयन, गुणवत्तायुक्त कृषि शिक्षा,
अन्तर्राष्ट्रीय अनुसंधान परीयोजनायें (बोरलाग संस्था एवं
जापान की परियोजना) व विस्तार के क्षेत्र की नवीनतम योजनाऐं
जैसे क्राप कैफेटेरिया, टेक्नॉलाजी पार्क्र आदि वर्ष के
महत्वपूर्ण प्रयास रहे है । हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा
वि.वि. को 13 करोड़ का अतिरिक्त अनुदान प्रदान करने की घोषणा की
गई है इससे वि.वि. की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वर्ष 2012 हेतु
अनेक महत्वाकांक्षी योजनायें तैयार की जा रही हैं जिससे देश,
प्रदेश और विश्व समूह के कृषक, व्यवसायी, वैज्ञानिक और उद्यमी
लाभान्वित हो सकेंगे ।
शिक्षा
राष्ट्रीय स्तर पर
NET, GATT, JRF, ARS, एवं
प्रान्तीय स्तर पर
PSC, o Forest Services
में विश्वविद्यालय
के छात्र-छात्राओं के चयन हुए हैं। उच्च अध्ययन हेतु
Competitive exam
के माध्यम से
IARI, BHU
एवं
FRI
में भी बड़ी संख्या चयन में हुआ है ।
विगत एक वर्ष में 89 विद्यार्थर्ियों का चयन 10 विभिन्न
संस्थानों में कैंम्पस साक्षात्कार के माध्यम से हुआ । पंजाब
नेशनल बैंक एवं म.प्र. जलग्रहण मिशन के साक्षात्कार आयोजित किये
गये है।
विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार
NCC का 700 केडेट्स का
दस दिवसीय कैम्प आयोजित किया गया।
गौरवशाली 46 वर्ष पूर्ण होने पर (2 अक्टूबर 2011)
विश्वविद्यालय स्थापना सप्ताह का आयोजन किया गया जिसमें
विश्वविद्यालय परिसर में 2000 पौधों का रोपण, साहित्यिक
कार्यक्रम, एवं कृषक संगोष्ठी आयोजित की गई ।
ICAR, Development grant
से प्राप्त वित्तिय सहायता से खेल
परिसर, अन्तरराष्ट्रीय गेस्ट हाउस, म्यूजियम, केन्द्रीय परीक्षा
भवन एवं छात्रावासों का गुणवत्ता युक्त निर्माण प्रगति पर है ।
शिक्षा सत्र 2011-12 से कृषि महाविद्यालय टीकमगढ़ में 6 विषयों
में स्नातकोत्तर एवं रीवा में स्नातकोत्तर व पी.एच.डी.
प्रारम्भ की गई । स्नातक एवं स्नाकोत्तर एवं गढ़ाकोटा में
डिप्लोमा पाठयक्रम में
entry seats भी बढ़ाई गई ।
विश्वविद्यालय के सभी विभागों में
National Knowledge
Network के माध्यम
से
Internet,
cERA
एवं
online journals की सुविधा उपलब्ध कराई गई ।
स्नातकोत्तर एवं पी.एच.डी. हेतु छात्रवृत्ति योजना का
प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया ।
पुस्तकालय विकास हेतु निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं इस वर्ष
भी रू. 20 लाख मूल्य की पुस्तकें क्रय की गई ।
मानव संसाधन विकास के अन्तर्गत 70 शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों
को उच्च शिक्षा प्रशिक्षण हेतु भेजा गया ।
विगत वर्ष विदेशी छात्र-छात्राओं का रूझान विश्वविद्यालय में
अध्ययन हेतु बढ़ा है। नाइजेरिया, मलावी, इज़िप्ट, नेपाल, भूटान
के विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है । इसी तारतम्य में
A LCRON
State University ,oa ALABAMA, A&M University, USA
के साथ
MOU
भी हस्ताक्षर किये गये ।
अनुसंधान
विगत वर्ष राज्य किस्म विमोचन समिति
द्वारा गेहूँ, चना, अलसी, राई एवं कोदों की कुल 7 किस्में
एवं केन्द्रीय स्तर पर गेहूँ एवं अलसी की 9 किस्में
विमोचित की गई ।
वर्ष 2010-11 में रू. 15.18 करोड के 26
Adhoc
Projects स्वीकृत हुए ।
Consultancy
Processing Cell के अन्तर्गत वर्ष 2010 में रू. 74
लाख विभिन्न संस्थाओं द्वारा
Product
testing हेतु प्राप्त हुए ।
विगत वर्ष राष्ट्रीय स्तर के
Seminar
Conference का आयोजन किया गया जिसमें प्रमुख रही
Vegetable
Biodiversity, 26th MP Young Scientist Congress, Seed
business management एवं
Irrigation
Agriculture
जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं राष्ट्रीय
स्तर के विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया ।
वर्ष 2009.10 में 21 हजार क्विंटल
प्रजनक बीज उत्पादन किया जा कि राष्ट्रीय स्तर पर 18% रहा
।
RKVY,
National food security mission, Horticulture mission,
Bio fuel mission, Bamboo mission, Medicinal Plants
mission
की परियोजनाओं में विश्वविद्यालय की
सहभागिता बढ़ी है ।
विगत वर्ष वैज्ञानिकों ने विभिन्न
परियोजनाओं के अन्तर्गत, आमेरिका, सीरिया, नेपाल, एवं
मेक्सिको में विभिन्न प्रशिक्षण में भाग लिया ।
व्यवसाय योजना एवं विकास इकाई
(BPD) के अन्तर्गत धान की प्रजातियों की लाइसेंसिग, उद्यमियों का
पंजीयन, बीज एवं औषधीय पौध-उत्पाद का प्रशिक्षण, कृषि
आधारित लघु एवं मध्यम उद्योग के प्रोत्साहन हेतु परियोजनाएँ
प्रस्तावित की गई ।
MPWSRP
परियोजना के अन्तर्गत 1000
मैदानी कार्यकर्ताओं को टिकाऊ जल उपयोग पर प्रशिक्षण, हवेली
सिस्टम में भूजल रिचार्ज का आंकलन, एवं 25 लाख हैक्टर भूमि
का
Crop
classification किया गया ।
प्रदेश शासन के सहयोग से जून 16-18,
2011 में
State level Workshop on Strategies for enhancing crop
production and Productivity
आयोजित की गई । इस
कार्यशाला में 5 विभिन्न तकनिक सत्रों में गहन विचार
विमर्श के पश्चात
ACTION POINT
चिन्हित किये गये ।
विस्तार
कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से
विगत वर्ष 1418 प्रशिक्षणों के अन्तर्गत 35748 कृषकों को
प्रशिक्षित किया गया ।
विशेष अभियान के अन्तर्गत दलहन एवं
तिलहन परियोजना में 1400 कृषक परिवारों को शामिल कर 574
हैक्टर में प्रदर्शन आयोजित किये गये ।
धान की उन्नत पध्दति ''श्री विधि'' का
शहडोल, कटनी, सिधी, रीवा, जबलपुर, उमरिया, बालाघाट, डिंडोरी
एवं मण्डला में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया जिसे किसानों
ने अपना कर इन क्षेत्रों में धान उत्पादन में 25-30%
बढ़ोत्री की ।
सोयाबीन की मेड़-नाली पध्दति के व्यापक
प्रचार प्रसार से सोयाबीन उत्पादन में आशातीत वृध्दि हुई ।
कृषि विज्ञान केन्द्रों में विकसित
Technology
Park, Crop cafeteria एवं
Diffusion
model को
राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया ।
बीज-ग्राम कार्यक्रम के अन्तर्गत कृषकों
के प्रक्षेत्र पर उन्नत बीज उत्पादन प्रदेश के 20 कृषि
विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से संचालित किया गया ।
NAIP की
Integrated
Farming System परियोजना के अन्तर्गत 208 कृषकों के
प्रक्षेत्र पर लाख की खेती, 4 स्टाप डेम जिसमें 172 हैक्टर
में सिंचाई एवं मूर्गी पालन को प्रोत्साहित किया गया ।
कृषि विज्ञान केन्द्रों में कृषकों को
उन्नत किस्मों के फल वृक्ष उपलब्ध कराने के उद्देश्य से
मातृ वृक्षों (आम, अमरूद, सीताफल, अनार, बेर, जामुन, अंगूर
आदि) के रोपण को प्रोत्साहित किया गया ।
प्रशासन
शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों के
CAS के
अन्तर्गत 62 प्रमोशन किये गये । सीधी भरती से 16 सहायक
प्राध्यापक एवं 21 प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारियों का चयन
किया गया । कृषि विज्ञान केन्द्रों के 64 वैज्ञानिकों का
performance
के आधार पर
probation period की अवधि पूर्ण होने पर नियमित किया
गया ।
समयमान वेतन के अन्तर्गत 64, पदोन्नति
योजना के अन्तर्गत 13, एवं अनुकम्पा नियुक्ति के अन्तर्गत
6 कर्मचारियों को लाभान्वित किया गया । तृतीय एवं चतुर्थ
संवर्ग के अन्तर्गत 86 कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि
पूर्ण होने पर नियमित किया गया ।
विश्वविद्यालय का लोक सूचना विभाग भी
त्वरित गति से प्रकरण हल करने में अग्रणी रहा।
मानव संसाधन विकास
विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित अनुसंधान परियोजनाओं एवं कृषि
विज्ञान केन्द्रों के अंतर्गत निम्नांकित पदों को सीधी भरती
द्वारा भरा गया :-
अधिष्ठाता, कृषि अभियांत्रिकी
महाविद्यालय, जबलपुर - 01
वैज्ञानिक, अनुसंधान परियोजनाओं के
अंतर्गत - 17
विषय वस्तु विषेषज्ञ, कृषि विज्ञान
केन्द्रों के अंतर्गत - 21
कार्यक्रम सहायक, कृषि विज्ञान केन्द्रों
के अंतर्गत - 16
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा
संचालित अनुसंधान परियोजनाओं, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं कृषि
महाविद्यालय टीकमगढ़, एवं गंजबासौदा के अंतर्गत रिक्त पदों को
भरे जाने हेतु आयोजित साक्षात्कारों का विवरण निम्नानुसार है :
-
प्रमुख वैज्ञानिक -01 वरिष्ठ वैज्ञानिक
-05 वैज्ञानिक -02 सह प्राध्यापक-02 एवं सहायक प्राध्यापक
- 02 (शस्य विज्ञान) विषय हेतु
सहायक प्राध्यापक - 02 (अंग्रेजी)
क्रीडा अधिकारी - 02
सहायक ग्रंथपाल - 01
सहायक प्राध्यापक गणित एवं सांख्यिकी
-02
सह प्राध्यापक-01 सहायक प्राध्यापक -
03 (पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन)
सहायक प्राध्यापक - 01 (सर्जरी)
सहायक प्राध्यापक - 03 (एग्रीकल्चरल
बायोटेक्नालॉजी)
सह प्राध्यापक-01 सहायक प्राध्यापक -
02 (प्लांट फिजियोलाजी )
उक्त रिक्त पदों हेतु साक्षात्कार का आयोजन किया जा चुका
है एवं साक्षात्कार हेतु नियत तिथि पर बुलावा पत्र भेजा गया
है जिसका विवरण निम्नानुसार है।
सहायक प्राध्यापक -01 (ह्यूमेन्टीज/बिजनेस
मैनेजमेंट/एन्वायरमेंटल साइंस)
3- (1) सीधी भर्ती से भरे गये पदों का
विवरण निम्नानुसार है : -
1
कृषि व्यय
अध्ययन योजना (सी.सी.एस.) के अंतर्गत प्रक्षेत्र विस्तार
अधिकारियों
21
(2) पदोन्नति योजना के अंतर्गत वर्ष 2011
-2012 में निम्नलिखित संवर्ग लाभाविंत हुए
1
सहायक यंत्री से कार्यपालन यंत्री
01
2
उपयंत्री से सहायक यत्री
01
3
सहायक श्रेणी -एक से अनुभाग अधिकारी
02
4
चतुर्थ श्रेणी से सहायक श्रेणी-॥। के पद पर
16
(3) समयमान
वेतन योजना के अन्तर्गत वर्ष 2010-11 में निम्नलिखित संवर्ग
लाभांवित हुए ।
1
कृषि विस्तार अधिकारी
01
2
प्रयोगशाला तकनिशियन
03
3
सब-ओवरसियर
01
4
कम्पाउन्डर
01
5
सहायक श्रेणी -तीन
01
(4)
परिवीक्षा अवधि समाप्त की गई :-
1
सहायक श्रेणी-॥।
07
2
वाहन चालक
03
3
वाहन चालक सह मैकेनिक
32
4
प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी
06
5
इलेक्ट्रीशियन
02
6
प्रक्षेत्र प्रबंधक
02
न्यायालयीन प्रकरण
माननीय उच्च न्यायालय में
वर्ष 2011 के दौरान दायर किये गये कुल प्रकरणों की संख्या
69
माननीय उच्च न्यायालय
द्वारा वर्ष 2011 के दौरान निर्णीत किये गये कुल प्रकरणों
की संख्या
15
माननीय उच्च न्यायालय में
वर्ष 2011 के लम्बित प्रकरणों की संख्या
54
लोक सूचना
का अधिकार
लोक सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत विभाग में लोक
सूचना अधिकारी के पास 110 आपत्तियां दर्ज हुई उक्त में 106
निराकृत की गई, अपीलीय अधिकारी लोक सूचना के पास 19 आपत्तियां
दर्ज हुई। समस्त आपत्तियों का समय सीमा में निराकरण किया गया।
मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग
मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग भोपाल में 5 प्रकरण प्रस्तुत किये
गये जो निराकृत हुये। माननीय मुख्यमंत्री शिकायत निवारण
प्रकोष्ठ में वर्ष 11-12 में कोई भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ।
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के सूचना एवं
जनसंपर्क विभाग ने इस वर्ष 131 विज्ञप्तियां समाचार पत्रों एवं
इलेक्ट्रानिक मीडिया हेतु प्रकाशन एवं प्रसारण हेतु प्रेषित की
गई, इसी प्रकार विगत वर्षो की अपेक्षा इस बार 143 विभिन्न
प्रकार के विज्ञापन समाचार पत्रों को प्रेषित किये गये जो कि
निर्माण, शिक्षा और साक्षात्कार आदि से संबंधित थे।
वित्तीय संसाधन
विश्वविद्यालय का वर्ष 2011-12 का प्रारंभिक शेष 14,65,097.00
से प्रारंभ हुआ था। राज्य शासन द्वारा चालू वर्ष में समय पर
अनुदान उपलब्ध कराने के कारण विश्वविद्यालय की आर्थ्ािक स्थिति
सामान्यत: संतोषप्रद है। शासन द्वारा वर्ष 2011-12 के माह फरवरी
2012 तक निम्नानुसार अनुदान उपलब्ध कराया गया :-
स.क्र.
लेखा शीर्ष
2011-12 के लिये प्रस्तावित
राशि
फरवरी 2012 तक स्वीकृत राशि
1.
कृषि आयोजनेत्तार
29,00,00,000
19,00,00,000
2.
कृषि आयोजना
10,00,00,000
8,00,00,000
3.
आदिवासी उपयोजना
5,00,00,000
4,00,00,000
4.
विशेष घटक योजना
5,00,000
5,00,000
योग
44,05,00,000
31,05,00,000
वित्ताीय वर्ष 2011-12 में विश्वविद्यालय
ने अपने संसाधनों से आय के स्त्रोतों में वृध्दि की है।
अनुसंधान सेवाएं
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के अंतर्गत
मध्यप्रदेश के निम्ललिखित जलवायु क्षेत्रों में स्थित 12
अनुसंधान केन्द्रों के माध्यम से प्रत्येक कृषि जलवायु क्षेत्र
में अधिकतम उत्पादन एवं कृषि क्षेत्र से आय में वृध्दि हेतु
कृषि तकनीकियों के अन्वेषण के लिये संचालित अनुसंधान परियोजनाओं
में प्रतिवर्ष विभिन्न विषयों पर अनुसंधान कार्य किये जाते
हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर वर्ष 2011-12 में 40 अखिल भारतीय
कृषि अनुसंधान परियोजनाओं के अलावा भारत सरकार/मध्यप्रदेश शासन
की विभिनन संस्थाओं/अंर्तराष्ट्रीय सहयोग से चल रही/स्वीकृत 59
तदर्थ परियोजनाओं के अंतर्गत विभिन्न अनुसंधान कार्य किये जा
रहे हैं।
कृंषि जलवायु अंचल
छत्तीसगढ़ का मैदान (बालाघाट जिला)
छत्तीसगढ़ की उत्तरी पहाड़ियाँ (मंडला, डिन्डौरी, शहडोल,
अनूपपुर एवं उमरिया जिले)
कैमोर का पठार एवं सतपुड़ा की पहाड़ियाँ (जबलपुर, कटनी,
पन्ना, रीवा, सीधी, सिंगरौली एवं सतना जिले)
विन्ध्य का पठार (सागर, दमोह, रायसेन तथा विदिशा जिले)
मध्य नर्मदा घाटी (नरसिंहपुर, होशंगाबाद एवं हरदा जिले)
बुन्देलखण्ड अंचल (टीकमगढ़ एवं छतरपुर जिले)
सतपुड़ा का पठार (बैतूल एंवं छिन्दवाड़ा जिले)
कृषि अनुसंधान केन्द्र
ऑचलिक अनुसंधान केन्द्र
क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र
कृषि अनुसंधान केन्द्र
जबलपुर
रीवा
नवगॉव (छतरपुर)
पवॉरखेड़ा
सागर
गढ़ाकोटा (सागर)
छिन्दवाड़ा
वरासिवनी
तेंदनी (बालाघाट)
टीकमगढ़
डिन्डौरी
सौंसर (बालाघाट)
वर्ष
2011-12 के दौरान विमोचित फसलों की नई किस्में 1- कोदों (डी.पी.एस. 91) 2. चरी राइस बीन जे. आर बी.
(जे. ओ 5-2) वर्ष 2011-12 के
दौरान स्वीकृत तदर्थ अनुसंधान परियोजनायें
डेवलपमेंट ऑफ ट्रान्सजेनिक ओट (ऐविना
सेटाइवा) ओवर एक्सप्रेसिंग फंगल फाइटेज जीन. मध्यप्रदेश
विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी परिषद् भोपाल द्वारा राशि 7.98
लाख रूपये हेतु स्वीकृत ।
मॉलीकुलर ब्रीडिंग सिलेक्सन स्टे्रटेजिज टू कम्बाइन
एन्ड वेलिडेट क्यू. टी. एल. फॉर इन्प्रूविंग डब्लू. यू. ई.
एन्ड हीट टॉलरेन्ट इन व्हीट. सिमिट मैक्सिको के वित्तीय
सहयोग से डेयर नई दिल्ली द्वारा 67505 डालर हेतु स्वीकृत
परियोजना।
स्टडी ऑन एग्री-बिजनेस. अंर्तराष्ट्रीय खाद्य नीति
अनुसंधान संस्थान भारत सरकार के वित्तीय सहयोग द्वारा राशि
2.41 लाख रूपये हेतु स्वीकृत परियोजना।
यूज ऑफ माइक्रोब्स फॉर प्लांट प्रोटेक्शन एन्ड
न्यूटीऐंट्स मैनेजमेंट इन इनक्रीजिंग क्रॉप प्रोडक्टीविटी।
मण्डी बोर्ड मध्यप्रदेश द्वारा राशि 697.68 लाख रूपये हेतु
स्वीकृत परियोजना।
कोलोबोरेटिव हाइब्रिड मेज एवोलूयेशन ट्रायल. सिमिट
संस्थान मैक्सिको के वित्तीय सहयोग संचालित परियोजना राशि
2.50 लाख।
नेशनल इनीसिऐटिव्स ऑन क्लाइमेट रेसिलीऐंट एग्रीकल्चर (नीक्रा)
रियल टाइम्स पेस्ट सर्वेलेंसेंस इन पीजन-पी। भारतीय कृषि
अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि
5.00 लाख।
सिलेक्सन एन्ड यूटीलाइजेशन ऑफ वाटर लॉगिंग टॉलरेंन्ट
कल्टीवर्स इन पीजन पी. भारत सरकार एवं इक्रीसेट हैदराबाद,
सहायतित परियोजना राशि 68.53 लाख।
स्ट्रेस टॉलरेन्स राइस फॉर अफ्रीका (स्ट्रासा)।
इंटरनेशनल राइस रिसर्च इन्सटीटयूट फिलीपीन्स एवं भारत
सरकार सहयोग परियोजना।
रिवेलोराइजिंग स्माल मिलेट्स इन रेनफेड रीजन्स ऑफ साउथ
एशिया। धान फाउन्डेशन मदुरै (तामिलनाडू) निजी संस्थान के
वित्तीय सहयोग द्वारा राशि 6.40 लाख।
क्लाइमेट चेंज एन्ड लाख क्रॉप परफार्ममेंन्स एट
जबलपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा
स्वीकृत परियोजना राशि 5.50 लाख।
ट्राइबल सीड प्राजेक्ट (टी.एस.पी.) भारत सरकार, नई
दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि 4.00 लाख अवधि।
इस्टाब्लिसमेंट ऑफ मदर प्लांट नर्सरीज फार हाई
पेडीग्री प्लांटिंग मैटेरियल ऑफ फ्रूट क्राप्स।भारत सरकार,
नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि 42.62 लाख।
मैक्सीमाइजेशन ऑफ सोयाबीन प्रोडक्सन इन मध्यप्रदेश
जापान इंटरनेशनल को-आपरेशन एजेन्सी, जापान के सहयोग से
संचालित परियोजना राशि 15.00 लाख।
ड्राइंग एन्ड डिहाईड्रेशन कैरेटरस्टिक्स एन्ड
पोटेन्शियल फॉर वेल्यू एडीसन इन अंडर यूटीलाइज्ड ऐज वेल ऐज
कार्मशियली इर्म्पोटेन्ट फू्रट्स एन्ड वेजीटेबल्स ऑफ एम.पी.
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी परिषद् भोपाल द्वारा
स्वीकृत परियोजना राशि रूपये 4.36 लाख ।
परामर्शदात्री सेवाऐं प्रकोष्ठ
संचालनालय अनुसंधान सेवाऐं के अंतर्गत कन्सल्टेंसी प्रोसेसिंग
सेल (परामर्शदात्री सेवाऐं प्रकोष्ठ) द्वारा विभिन्न निजी
कम्पनियों संस्थानों के उत्पादन का परीक्षण किया गया जिसमें
खाद, बीज, उर्वरक, कीटनाशक पौधवर्धक, खरपतवार नाशक एवं अन्य
कृषि उत्पाद) का परीक्षण किया गया जिससे विश्वविद्यालय को वर्ष
2011-12 में 86.24 लाख रूपयों की आय अर्जित हुई।
प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी
सब्जियों में जैव विविधिता पर
राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दिनाँक 4-5 अप्रैल 2011
फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में
वृध्दि हेतु रणनीति पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन
दिनॉक 16-18 जून 2011
गन्ना उत्पादक कृषकों, गन्ना वैज्ञानिकों,
शासकीय अधिकारियों एवं शक्कर उद्योग के प्रतिनिधियों के
इंटरफेस बैठक का आयोजन दिनॉक 30.9.2011
मध्य क्षेत्र में गेंहॅू की उत्पादकता
बढ़ाने हेतु रणनीति तथा गेरूआ प्रबंधन पर समीक्षा बैठक का
आयोजन दिनाँक 24.10.2011
बिजनेस
प्लानिंग एन्ड डेवलपमेंट परियोजना (बी. पी. डी. स्कीम) की
उपलब्धियाँ
विश्वविद्यालय द्वारा अन्य संस्थानों के साथ सहमति ज्ञापन (एम.ओ.यू.)
संकर धान प्रजाति जे. आर. एच. 5 एवं जे. आर. एच. 8
के व्यवसायीकरण के लिये निम्न लिखित कंपनियों के साथ सहमति
ज्ञापन (मेमोरेन्डम ऑफ अंडरस्टेडिंग) पर हस्ताक्षर किये गये।
विभा एग्रोटेक लिमिटेड दिनाँक 21
नवम्बर 2011
दन्तीवाड़ा सीड प्राइवेट लिमिटेड दिनाँक
22 नवम्बर 2011 को
अजीत सीड्स लिमिटेड दिनॉक 9 जनवरी 2012
त्रिमूर्ती प्लान्ट साइंस दिनॉक 8 फरवरी
2012
नवोन्मेशी कृषि तकनीकी के विकास एवं
विस्तार के लिये मेसर्स महिन्द्र एन्ड महिन्द्रा के साथ
अभिनव खेती प्रौद्यौगिकी (आई. एफ. टी) विकास और प्रसार हेतु
सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये।
मध्यप्रदेश में एम. पी. डी. पी. आई.
पी. अंतर्गत पाँच कृषक प्रोडयूसर कम्पनियों की विस्तृत
परियोजना संवाद (डी. पी. आर.) बनाने के लिये करारनामा।
विस्तार सेवायें
मानव संसाधन विकास
कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों को संचालनालय विस्तार
सेवायें में 08 कार्यक्रम आयोजित कर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान
किया गया ।
संचालनालय विस्तार सेवायें द्वारा कृषि उत्पादन की नई
तकनीकियों पर तीन दिवसीय एवं पॉच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किये
गये जिसमें म.प्र. शासन के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग
के कृषि विकास अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया ।
एग्रोपीडिया पर प्रशिक्षण
दिनांक 2.11.2011 को भारतीय
प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर द्वारा एग्रोपीडिया पर एक
दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालनालय विस्तार सेवायें,
ज.ने. कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित किया गया ।
कृषि विज्ञान केन्द्र
मध्य प्रदेश के 50 जिलों में से 25 जिले
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में
आते हैं, जिनमें 23 जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र
कार्यरत हैं, विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न जिलों
छिंदवाड़ा, सीधी, शहडोल, सिवनी, टीकमगढ़, बालाघाट, बैतूल,
पन्ना, डिंडोरी, रीवा, जबलपुर, होशंगाबाद, सागर, हरदा,
दमोह, कटनी, छतरपुर, मंडला, उमरिया एवं नरसिंहपुर में कृषि
विज्ञान केन्द्र संचालित है । 2 जिलों रायसेन एवं सतना में
गैर शासकीय संस्था के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र
संचालित हैं। ये केन्द्र जिलों की तकनीकी आवश्यकता को आंकते
हैं, तकनीकी का पुनर्निर्धारण व मानकीकरण करते हैं ।
कृषि
विज्ञान केन्द्रों की आंचलिक कार्यषाला
कृषि विज्ञान केन्द्रों की आंचलिक
कार्यशाला जो 5-8 मई 2011 को राजमाता विजयाराजे सिंधिया
कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित था,
विश्वविद्यालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि विज्ञान कन्द्रों
ने भागीदारी की तथा अपनी उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया
।
कृषि
विज्ञान केन्द्रों का राष्ट्रीय सम्मेलन
कृषि विज्ञान केन्द्रों का छटवा
राष्ट्रीय सम्मेलन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली
के सहयोग से दिनांक 03 से 05 दिसम्बर 2011 को जवाहरलाल
नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित किया गया,
जिसका उद्धाटन माननीय कृषि मंत्री भारत सरकार श्री शरद
पवार ने किया जिसमें देषभर के 600 कृषि विज्ञान केन्द्रों
के 1200 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया इसके अतिरिक्त
कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, संचालक विस्तार शिक्षा एवं
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं उप महानिदेशकों
ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये ।
कृषि
प्रौद्योगिकी सूचना केन्द्र
कृषकों को उन्नत तकनीकों, उन्नत उपकरण इत्यादि की जानकारी
एकल-वातायन से प्राप्त हो सके इस हेतु कृषि प्रौद्योगिकी सूचना
केन्द्रों की स्थापना हुई है । इसके लिये अलग से एक भवन में
कृषि विशेषज्ञों की विभिन्न सेवायें लगातार उपलब्ध कराई गई है
।
मुद्रण व इलेक्ट्रानिक माध्यमों का प्रयोग
''कृषि विश्व'' विश्वविद्यालय संचार केन्द्र में नियमित रूप से
प्रकाशन किया जाता
है । वर्ष 2011 में ''कृषि विष्व'' एवं अन्य पत्रिकाएं
प्रकाषित हुई । प्रत्येक अनुसंधान केन्द्र तथा कृषि विज्ञान
केन्द्र अपने-अपने क्षेत्र के लिये उपयोगी कृषि तकनीक को ''तकनीकी
बुलेटिन'' के रूप में प्रकाषित करता है । आकाषवाणी से वर्ष
2011 के अनुषंसित कार्यक्रम अनुसार 52 आकाषवाणी वार्ता की
रिकाडिंग संचार केन्द्र में की गई, जिनका प्रसारण आकाषवाणी,
जबलपुर से प्रति सोमवार शाम 7:20 से 8:00 बजे तक ''कृषि
विश्वविद्यालय से खेतों तक'' कार्यक्रम में किया जाता है ।
किसान कॉल सेन्टर
किसान काल सेन्टर के माध्यम से कृषकों द्वारा कृषि से संबंधित
पूछे गये सभी सवालों का उचित जबाव एवं सुझाव विश्वविद्यालय के
वैज्ञानिकों के द्वारा देकर सन्तुष्ट किया गया।
प्रक्षेत्र गतिविधिया
ब्रीडर (प्रजनक) बीज उत्पादन खरीफ 2011 का
संक्षिप्त विवरण
क्रमांक
फसल
कुल प्रजाति
उत्पादन (क्ंवि)
1.
सोयाबीन
4
2098.38
2.
अरहर
4
73.00
3.
धान
16
4459.50
4.
रामतिल
3
16.20
5.
कोदो
3
8.12
6.
कुटकी
5
10.04
7.
मक्का
1
51.00
8.
तिल
3
15.88
9.
मूंग
5
77.50
10.
उड़द
2
4.90
कुल योग
46
6814.52
रबी 2011-12
क्रमांक
फसल
कुल प्रजाति
अनुमानित उत्पादन (क्ंवि)
1
गेहॅू
21
14155.00
2
जौ
2
115.00
3
चना
12
4984.00
4
सरसों
2
90.00
5
रामतिल
2
18.00
6
अलसी
4
39.00
7
मसूर
1
190.00
8
बरसीम
2
46.00
9
जई
2
144.00
10
मटर
4
236.00
11
मक्का
6
68.00
कुल योग
58
20085.00
शिक्षण
गतिविधियां
स्नातकोत्तर एवं विद्या वाचस्पति
(पी0एच0डी)
विगत वर्ष की भॅति इस वर्ष भी स्नातकोत्तर (एम0एस0सी0) एवं
पी0एच0डी0 के 14 विभिन्न विषयों के छात्रों को प्रवेश दिया
गया । कृषि संकाय में 270 एवं कृषि अभियांत्रिकी संकाय में
46 छात्र छात्राओं को प्रवेश दिया गय
राष्ट्रीय एवं
अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से अनुबंध इस विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार के
कार्यो को गति देने के लिये निम्न संस्थाओं से अनुबंध किया
गया :-
एलकानर्र युनिवर्सिटी, अमेरिका ।
नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर साइट््रस नागपुर ।
जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड जलगांव ।
एलवामा युनिवर्सिटी एएण्ड एम युनिवर्सिटी संयुक्त राष्ट्र
अमेरिका ।
संकाय
उद्यानिकी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान, गढाकोटा
जिला-सागर में दो वर्षीय उद्यानिकी पत्रोपाधि पाठयक्रम में
11-12 में प्रवेश हेतु सीटाें की संख्या 50 से बढ़ाकर 80 कर
दी गई
कृषि अभियांत्रिकी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की पॉच अखिल भारतीय समन्वित
परियोजना महाविद्यालय में संचालित है जिनमें संतोषजनक
उपलब्धियॉ मिली है।
मौसम आधारित योजना भौतिकी विभाग में संचालित है जिसके
माध्यम से मौसम की अग्रिम जानकारी संचार माध्यमों से
प्रसारित होती है। जिसके द्वारा कृषक लाभान्वित हो रहे है।
ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE)
इस कार्यक्रम के अंतर्गत छ: माह की अवधि के लिये बी.एस.सी.
कृषि एवं बी.एस.सी. (वानिकी) के चतुर्थ वर्ष के 238
छात्र-छात्राओं को विभिन्न आंचलिक अनुसंधान केन्द्रों एवं
कृषि विज्ञान केन्द्रों के मार्गदर्षन में स्थानीय कृषकों
के प्रक्षेत्र पर कृषि के व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करने
हेतु पदस्थ किया गया ।