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मुद्रा २०१२ - १३

संचालनालय किसान कल्याण तथा कृषि विकास

कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय

कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय

विभागीय संरचना

  कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में प्रदेश स्तर पर संचालक कृषि अभियांत्रिकी शीर्षस्थ अधिकारी हैं। मुख्यालय स्तर पर 1 संयुक्त संचालक कृषि अभियांत्रिकी, 1 कृषि यंत्री एवं 2 सहायक कृषि यंत्री के पद स्वीकृत हैं । इसके अलावा 6 संभागों - भोपाल , इन्दौर , ग्वालियर , जबलपुर , सागर एवं सतना में कृषि यंत्री/कार्यपालन यंत्री के कार्यालय एवं भोपाल में कृषि यंत्री (अनुसंधान) का भी कार्यालय है । इसी प्रकार 11 जिलों भोपाल, विदिशा, इटारसी, इन्दौर, खण्डवा, ग्वालियर, शिवपुरी, जबलपुर, सिवनी, सागर, एवं सतना में सहायक कृषि यंत्री के कार्यालय हैं ।


पदोन्नतियों, नियुक्तियों, स्थानांतरण एवं विभागीय जांच की स्थिति वर्ष 2011-12

(31 दिसंबर 2011 की स्थिति में)

क्रमांक

वितरण

प्रथम श्रेणी

द्वितीय श्रेणी

तृतीय श्रेणी

चतुर्थ श्रेणी

योग

1

 पदोन्नति

-

-

41

-

41

2

विभागीय जांच

1

-

1

1

3

3

नियुक्ति

0

0

0

18

18

4

स्थानांतरण

0

2

8

8

18

 

न्यायालयीन प्रकरणों की कुल संख्या - 65 विभाग के दायित्व      इस संचालनालय का प्रमुख दायित्व कृषि उत्पादन में वृध्दि हेतु कृषि यंत्रीकरण का विकास है। इस हेतु निम्न गतिविधियॉ  संचालित की जा रही हैं

  • विभिन्न कृषि कार्यो हेतु बैल चलित, हस्त चलित तथा शक्ति चलित उन्नत कृषि यंत्रों का अनुदान पर कृषकों को वितरण।

  •  कम्बाईन हार्वेस्टर, पावर टिलर्स तथा 40 पी.टी.ओ. अश्वशक्ति तक के टे्रक्टर्स का अनुदान पर कृषकों को वितरण।

  • उन्नत कृषि यंत्रों के प्रति जागरूकता लाने हेतु विभिन्न कृषि कार्यो के लिये उपयोगी नवीनतम उन्नत कृषि यंत्रों का कृषकों के खेतों में प्रदर्शन।

  • विभिन्न कृषि कार्यो हेतु विभागीय मशीनों को कृषकों को किराये पर उपलब्ध कराया जाना।

  • नवीन उन्नत कृषि यंत्रों के रख-रखाब एवं समुचित उपयोग हेतु कृषकों को प्रशिक्षण।

  • सामूहिक रूप से यंत्रीकृत कृषि अपनाने से प्राप्त होने वाले लाभों के प्रति कृषकों को जागरूक करना।

  • प्रदेश की कृषि की विशिष्ट समस्याओं जैसे पड़त भूमि, छिटकवां पध्दति, नरवाई जलाना आदि के निदान में कृषि यंत्रों के उपयोग के प्रति कृषकों को जागरूक करना।

  • ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में छोटे कृषि यंत्रों के निर्माण के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करना।

सामान्य जानकारी

    इस संचालनालय के अधीन वर्तमान में 276 व्हील टाईप टै्रक्टर उपलब्ध हैं। टे्रक्टर के साथ चलने वाले यंत्रों में खेत की तैयारी के लिये 220 रिवर्सिबल प्लाऊ, 218 रोटावेटर एवं भूमि समतलीकरण करने हेतु 3 लेजर लैंड लेवलर उपलब्ध हैं। बोनी के लिये 113 जीरो टिलेज सीड-कम-फर्टिलाईजर ड्रिल एवं 165 रेज्ड बेड प्लांटर उपलब्ध हैं। 26 पावर टिलर, धान रोपाई के लिये 10 राइस ट्रान्सप्लान्टर तथा धान की फसल कटाई एवं गहाई कार्य के लिये 1 कम्बाईन हार्वेस्टर उपलब्ध है। फसलों की कटाई एवं बंडल बंधाई कार्य हेतु 30 रीपर कम बाइन्डर भी उपलब्ध है। मैक्रो मैनेजमेन्ट के अन्तर्गत ''कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन'' की योजनान्तर्गत कृषकों को अनुदान पर बैल चलित, शक्ति चलित कृषि यंत्र, पावर टिलर, कम्बाईन हार्वेस्टर एवं छोटे टे्रक्टर का तथा पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नॉलाजी एण्ड मैनेजमेन्ट के कार्यक्रम का क्रियान्वयन जिलों के उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है।

भाग-2
बजट प्रावधान

वर्ष 2011-12 में योजनाओं में बजट प्रावधान एवं व्यय निम्नानुसार रहा:-

(31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में)

क्र.

योजना का नाम

बजट प्रावधान

व्यय (रू. लाख में)

1

मशीन ट्रेक्टर स्टेशन का सुदृढ़ीकरण

75.00

6.00

2

कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के अंतर्गत अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण

5.00

1.94

3

प्रशिक्षण, परीक्षण तथा प्रदर्शन के जरिये कृषि यांत्रिकीकरण का प्रोत्साहन तथा सुदृढ़ीकरण

100.00

98.59

4

मैक्रो मैनेजमेंट योजना ''कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन''

1538.00

839.42

5

हस्तचलित/बैलचलित यंत्रों पर टॉपअप अनुदान

386.00

242.90

6

पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी एण्ड मेनेजमेंट योजना

253.64

150.35

7

 राष्ट्रीय कृषि विकास योजना-

   

7.1

हलधर योजना

468.00

415.66

7.2

सीड ग्रेडर एवं बीज उपचार यंत्र वितरण

309.50

306.37

7.3

हलधर सेवा केन्द्र

350.00

339.34

7.4

फामर्स ट्रेनिंग

22.50

22.50

8

कृषि शक्ति योजना

135.00

79.93

राज्य योजना तथा केन्द्र प्रवर्तित योजना
राज्य योजनायें

राज्य योजनाओं के अन्तर्गत वर्ष 10-11 एवं वर्ष 11-12 की उपलब्धियाँ निम्नानुसार रही :-
 

क्र.

कार्यक्रम

उपलब्धि 2010-11

उपलब्धि 2011-12
(31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में)

1

व्हील टाईप टे्रक्टर्स से हल्की जुताई , बखरनी , बोनी आदि के कृषि कार्य

54700 घंटे

49775 घंटे

2

कृषि शक्ति योजनांतर्गत पावरटिलर वितरण

240

185

3

हस्तचलित एवं बैलचलित यंत्रों का वितरण

50000

47555

 

भाग-3
हितग्राही मूलक योजनाएं


1) केन्द्र पोषित मैक्रो मेनेजमेंट ''कृषि यंत्रीकरण के प्रोत्साहन की योजना'' की उपलब्धियां (31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में )


            अनुदान पर वितरण                                              (इकाई संख्या में)

क्रमांक

कार्यक्रम

लक्ष्य

उपलब्धि 2011-12
(31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में)

1

टे्रक्टर

1890

1090

2

पावर टिलर

240

185

3

शक्तिचलित कृषि उपकरण

2579

2275

4

बैलचलित, हस्तचलित उननत कृषि यंत्र

50000

47555


(2) केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना की उपलब्धियॉ :

                                                                           (इकाई संख्या में)

क्रमांक 

योजना का नाम

लक्ष्य

उपलब्धि 2011-12

1

प्रशिक्षण, परीक्षण तथा प्रदर्शन के जरिये कृषि यांत्रिकीकरण का प्रोत्साहन तथा सुदृढीकरण योजना

नवीन यंत्रों का किसानों के खेतों में प्रदर्शन (संख्या)

5700

5016

2

पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी एण्ड मेनेजमेन्ट योजना

(अ) अनुदान पर वितरित कृषि उपकरण (संख्या)

620

435

(ब) पोस्ट हार्वेस्ट उपकरणों के प्रदर्शन (संख्या)

144

122

(स) कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम

1000 कृषक

990 कृषक

3

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

हलधर योजना (हेक्टेयर)

53000

48220


भाग-चार
सामान्य प्रशासनिक विषय

जॉच समितियॉ/किये गये अध्ययन- वर्ष 2011-12 में किसी भी समिति का गठन नहीं हुआ और न ही कोई अध्ययन किया गया।

भाग-पांच
संचालनालय के अधीन संचालित की जाने वाली योजनाओं का विवरण

  1. केंद्र पोषित योजनाएं

    1. ''मैक्रो मैनेजमेन्ट ''कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन की योजना''
      यह केन्द्र पोषित योजना है, जिसमें केन्द्र तथा राज्य का हिस्सा 90:10 है । इस योजना के अन्तर्गत ''कृषि यंत्रीकरण के प्रोत्साहन'' का कार्यक्रम इस संचालनालय द्वारा संचालित किया जा रहा है जिसमें कम्बाईन हार्वेस्टर, 40 पी.टी.ओ. हार्सपावर तक के टे्रक्टर, 8 बी.एच.पी. से अधिक के पावर टिलर, शक्तिचलित एवं बैलचलित/हस्तचलित उन्नत कृषि यंत्रों के क्रय पर कृषकों को अनुदान देय है।

    2. प्रशिक्षण, परीक्षण तथा प्रदर्शन के जरिए कृषि यंत्रीकरण का प्रोत्साहन तथा सुदृढ़ीकरण :-
      इस योजना के अंतर्गत उन्नत कृषि यंत्रों के कृषकों के खेतों में प्रदर्शन आयोजित किये जाते है। इस हेतु शत्-प्रतिशत राशि भारत सरकार से प्राप्त होती है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कृषकों के खेतों में नवीनतम उन्नत कृषि यंत्रों के प्रदर्शन आयोजित किये जाते है। इन प्रदर्शनों के निम्न परिणाम रहे :-

      1. नवीन विकसित शक्ति चलित उन्नत कृषि मशीनरी के प्रदर्शन से कृषकों में इनके उपयोग हेतु जागरूकता बढ़ी है।

      2. कृषि के एक फसली क्षेत्र को दो फसली क्षेत्र में परिवर्तित करने में रोटावेटर एवं जीरो टिलेज सीड-कम-फर्टिलाईजर ड्रिल कॉफी उपयोगी रहे है।

      3. आधुनिक कृषि मशीने जैसे - रीपर कम बाइंडर, रेज्ड बेड प्लांटर, रोटावेटर आदि के परिणाम से कृषकगण प्रभावित हुये है।

      4. कम्बाईन हार्वेस्टर से कटाई के बाद गेहूं के डंठल खेत में ही कृषकों द्वारा जला दिये जाने से भूसे का नुकसान तो होता ही है, साथ ही साथ खेत की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती है। इस परंपरा को दूर करने व कृषकों को भूसे का लाभ दिलाने हेतु स्ट्रा रीपर के प्रदर्शन किये गये।

      5. कतार में खाद एवं बीज को अलग-अलग बोने हेतु विभाग द्वारा 3 कतारी बैलचलित सीड-कम-फर्टिलाईजर ड्रिल के प्रदर्शन किये गये जिससे छोटे किसान कतार में बोनी की पध्दति को अपना सकें।

    3. पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी एण्ड मैनेजमेंट :-
      यह केन्द्र क्षेत्रीय योजना है। योजना का उद्देश्य कृषकों का पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी उपकरणों के उपयोग के लिये प्रोत्साहित करना है जिससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करके कृषकों को उपज का अधिक मूल्य दिलाया जा सके। इस कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों को विभिन्न प्रकार के पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी उपकरणों के क्रय पर अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। योजनान्तर्गत 2.00 लाख तक के पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी/उपकरण्ाों पर 40 प्रतिशत की दर से अनुदान दिया जाता है। योजनान्तर्गत पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालाजी उपकरणों के प्रदर्शन एवं कृषकों को प्रशिक्षण दिये जाने का भी प्रावधान है।

    4. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अन्तर्गत

      1. हलधर योजना
        छोटे एवं कमजोर कृषकों के खेती की उत्पादकता बढ़ाने तथा बर्षा जल संग्रहण करने की क्षमता में वृध्दि करने की दृष्टि से गहरी जुताई की एक विशेष ''हलधार योजना'' वर्ष 2010-11 में प्रारंभ की गई है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के सभी कृषक तथा सामान्य वर्ग के लघु एवं सीमान्त कृषक योजनान्तर्गत लाभ लेने हेतु पात्र हैं। योजना अन्तर्गत गहरी जुताई की लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 1500/- प्रति हेक्टे. का अनुदान कृषक को दिया जाता है। एक कृषक 4 हेक्टेयर तक के खेत की गहरी जुताई योजनान्तर्गत करवा सकता है। वर्ष 2011-12 हेतु 53000 हेक्टेयर भूमि की गहरी जुताई का लक्ष्य लिया गया था, जिसके विरूध्द इस वर्ष 48220 हेक्टेयर खेत की गहरी जुताई का कार्य किया जा चुका है।

      2. कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना
        ऐसे कृषक जो अपनी कृषि संबंधी जरूरतों हेतु पृथक से टै्रक्टर एवं कृषि यंत्रों का क्रय नही कर सकते है उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु किराया आधार पर टै्रक्टर एवं कृषि यंत्र उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में वर्ष 2010-11 में 850 कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना की गई है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत यह उपयोजना मूलत: दलहन एवं तिलहन उत्पादक गांव की उत्पादकता वृध्दि हेतु वर्ष 2010-11 के लिये लागू थी। प्रत्येक कस्टम हायरिंग केन्द्र में टै्रक्टर के साथ आवश्यक कृषि यंत्र उपलब्ध कराये गये हैं जो पूर्व निर्धारित दरों पर कृषकों को उपलब्ध कराये जाते है।

  2. राज्य योजनाएं -

    1. कृषि शक्ति योजना (टाप अप अनुदान) :-
      प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की गतिविधियों को समग्र रूप से विस्तारित करने के उद्देश्य से कृषि यंत्रीकरण प्रोत्साहन कार्यक्रम ''कृषि शक्ति योजना'' प्ररांभ की गई है। जिसके यंत्रीकृत कृषि के लाभ से कृषकों को अवगत कराने के उद्देश्य से यंत्रदूत ग्रामों का विकास किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि यंत्रों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्कशॉप हेतु मशीनों की लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम एक लाख रूपये तक का अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में पावर टिलर के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेक्रो-मेनेजमेन्ट योजना में उपलब्ध अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन की ओर से 25 प्रतिशत अधिकतम रू. 30000 तक का अनुदान भी योजनान्तर्गत दिया जाता है।
      बुवाई, निंदाई-गुड़ाई, सिंचाई, कीट-आदि नियंत्रण, कटाई, गहाई आदि के लिये प्रयुक्त होने वाली नवीन तकनीकों के कृषि यंत्रों/उपकरणों का प्रदर्शन खेतों में किया जाता है। इसके माध्यम से कृषक खेती की लागत क्रय करके उत्पादन में वृध्दि प्राप्त कर रहे हैं तथा कृषकों का रूझान यंत्रीकृत कृषि की ओर बढ़ा है।

    2. टाप अप अनुदान -कृषि यंत्रीकरण योजना अन्तर्गत लघु एवं सीमान्त, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सभी वर्गो के किसानों को हस्तचलित/बैलचलित उन्नत कृषि यंत्रों पर विशेष 50 प्रतिशत टॉप-अप अनुदान की व्यवस्था राज्य शासन द्वारा दी गई है। हस्तचलित यंत्रों के क्रय पर कीमत का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 4000 एवं बैलचलित कृषि यंत्रों के क्रय पर कीमत का 50 प्रतिशत अधिकतम रू. 5000 का अनुदान कृषक प्राप्त कर सकते है।

भाग-छ:
विभागाध्यक्ष द्वारा निकाले जा रहे प्रकाशन :


उन्नत कृषि यंत्रों को कृषकों में प्रचलित कराने हेतु कृषकों को दी जाने वाली सुविधा संबंधी जानकारी पम्पलेट इत्यादि के माध्यम से प्रकाशित की जाती है।



 

मध्यप्रदेष राज्य कृषि विपणन बोर्ड, भोपाल

प्रदेश में अधिसूचित कृषि उपजों का बेहतर नियमन एवं नियंत्रण स्थापित करने तथा कृषकों को बिचौलियें के शोषण से बचाने, समयावधि में उनकी कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने एवं उनको विपणन की बेहतर सुविधायें उपलब्ध कराने में मंडी समितियों का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्तमान में प्रदेश में 246 मंडियां एवं 273 उप मंडियां कार्यरत है। प्रदेश की फल-सब्जी हेतु 121 कृषि उपज मंडी समितियों को अधिसूचित किया गया है।

भूमि एवं संरचना का आवंटन नियम, 2009
 

प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों में भूखण्ड, दुकान, गोदाम, शापकम गोदाम, केन्टीन आदि के आवंटन के लिये म0प्र0कृषि उपज मंडी (भूमि एवं संरचना का आवंटन) नियम, 2009 बनाये गये है, जो वर्तमान में प्रभावशील है।

मंडियों में जन भागीदारी
 

वर्तमान में प्रदेश की 246 कृषि उपज मंडी समितियों में से 244 मंडी समितियों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जिसमें अध्यक्ष, कृषक एवं व्यापारी प्रतिनिधियों के साथ तुलाईयों तथा हम्मालो के एक प्रतिनिधि का भी निर्वाचन कराया जायेगा। निर्वाचन 2012 की प्रारंभिक तैयारियों के अंतर्गत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण संबंधी कार्य प्रचलित है, जिसके अंतर्गत बनवासी पट्टेधरियों के नाम भी मतदाता सूची मे सम्मिलित किए जा रहे हैं।

मंडियों में आवक

प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों में विगत वर्ष 2007-08 में माह अप्रेल से मार्च की अवधि में आवक में 174.88 लाख टन की आवक हुई थी। वर्ष 2008-09 में इसी अवधि में आवक 169.49 लाख टन की आवक होकर विगत वर्ष की तुलना में 3.08 प्रतिशत की कमी हुई एवं वर्ष 2009-10 में इसी अवधि में 171.57 लाख टन की आवक होकर गत वर्ष की तुलना में 1.23 प्रतिशत की वृद्वि हुई। वर्ष 2010-11 की अवधि में 217.52 लाख टन की आवक होकर गत वर्ष की तुलना में 26.78 प्रतिशत की वृद्वि हुई है।
वर्ष 2011-12 में माह अप्रेल से दिसम्बर तक की अवधि में 177.43 लाख टन की आवक हुई जो गत वर्ष इसी अवधि की तुलना में 4.08 प्रतिशत की वृद्वि हुई है।

मंडियों की आय

प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों में वित्तीय वर्ष 2007-08 में माह अप्रेल से मार्च की अवधि में मंडी फीस से 466.36 करोड रूपये आय हुई थी। वर्ष 2008-09 में इसी अवधि में आय में 478.23 करोड रूपये की आय होकर विगत वर्ष की तुलना में 2.55 प्रतिशत की वृद्वि हुई एवं वर्ष 2009-10 में इसी अवधि में 571.08 करोड़ रूपये की आय होकर गत वर्ष की तुलना में 19.42 प्रतिशत की वृद्वि हुई। वर्ष 2010-11 की अवधि में 742.78 करोड़ की आय होकर गत वर्ष की तुलना में 30.07 प्रतिशत की वृद्वि हुई है।
वर्ष 2011-12 में माह दिसम्बर तक की अवधि में 552.03 करोड की आय हुई है, जो गत वर्ष इसी अवधि की तुलना में 0.49 प्रतिशत की कमी हुई है।

मंडी प्रांगण में रियायती दर पर भोजन व्यवस्था -

शासन की योजना अंतर्गत ''मंडी प्रांगण में कृषि जिन्स विक्रय हेतु आने वाले कृषकों को 10/- रूपये में भोजन उपलब्ध कराने बाबत् प्रदेश की 241 मंडी समितियों में से 238 मंडियों में योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ हो गया है।

मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना

प्रदेश के कृषकों की सहायता के लिये मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना लागू की जाकर कार्यालयीन पत्र दिनांक 27.09.2008 से क्रियान्वयन करने हेतु समस्त जिला कलेक्टर को निर्देश जारी किये गये है। योजना की कण्डिका 2 में उल्लेखित परिस्थितियां घटित होने पर आर्थिक सहायता राशि :-

01. मृत्यु होने पर

- 50,000/-

02. दुर्घटना में स्थाई अपंगता

- 25,000/-

03. दुर्घटना में अंग भंग होने से आंशिक अपंगता

- 7,500/-

04. अंत्येष्टी अनुदान

- 2,000/-

उपरोक्त उल्लेखित प्रावधान अनुसार हितग्राही को भुगतान किया जाता है।

इस योजना अंतर्गत माह दिसम्बर 2011 तक कुल 2.19 करोड प्राप्त हुए हैं। जिसमें योजना अंतर्गत विभिन्न जिला कलेक्टर्स से प्राप्त प्रस्ताव अनुसार वर्ष 2009-10 में रू0 36.00 लाख की सहायता राशि 93 हितग्राहियों को एवं वर्ष 2010-11 में रूपये 99.58 लाख की सहायता राशि 248 हितग्राहियों को तथा वर्ष 2011-12 (अप्रेल से दिसम्बर तक) में रूपये 76.42 लाख की सहायता राशि 192 हितग्राहियों को वितरित की गई है।

मुख्यमंत्री मंडी हम्माल एवं तुलावटी सहायता योजना 2008

प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों में अनुज्ञप्तिधारी हम्माल एवं तुलावटियों के उत्थान के लिये कार्यालयीन आदेश दिनांक 27.09.2008 द्वारा योजना लागू की गई है।

मंडी हम्माल तुलावटी योजना अंतर्गत प्रावधान :-

 

(1) प्रसुती अवकाश सुविधा

- 15 दिवस की अकुशल मजदूरी (पुरूष महिला)

   अधिकतम दो प्रसुती

- 42 दिवस की अकुशल मजदूरी (महिला हम्माल)

(2) विवाह हेतु 10,000/-

- दो पुत्रियों की सीमा तक

(3)प्रथम श्रेणी अंक प्राप्त करने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति हेतु प्रतिवर्ष दिये जाने वाली सहायता

 

कक्षा 
 

छात्रा प्रतिवर्ष

छात्र प्रतिवर्ष

5 से 7

1000

800

8 से 9

1200

950

10 से 12

1700

1200

स्नातक

4000

3000

स्नातकोतर

6000

5000

   

(4) 20,000/- तक चिकित्सा सहायता - (हम्माल एवं तुलावटी हेतु)

(5) स्थायी अपंगता दो अंगो के क्षतिग्रस्त होने पर - 25,000/-

   आंशिक अपंगता - 7,500/-

(6) मृत्यु होने पर - 50,000/-

(7) अंत्येष्टी पर - 2000/-

 

उपरोक्त उल्लेखित प्रावधान अनुसार हितग्राही को भुगतान किया जाता है। योजना अंतर्गत विगत वर्ष 2009-10 में कुल 132 प्रकरणों में हितग्राहियों को राशि रू0 3.35 लाख की सहायता प्रदान की गई है। वर्ष 2010-11 में प्रकरणों की संख्या 1180 एवं राशि रू0 29,03,788/- एवं माह अप्रेल 2011 से दिसम्बर 2011 तक प्रकरणों की संख्या 1759 एवं राशि रू0 61,19,525/- का वितरण किया गया।

कृषि विपणन पुरस्कार योजना

इस योजना अन्तर्गत मंडी समितियों में ड्रा लॉटरी द्वारा प्रत्येक वर्ष में 2 बार बलराम जयंती एवं नर्मदा जयंती पर निकाले जाते है। जिसमें बम्पर ड्रा के पुरस्कार में क-संवर्ग की मंडी में 35 अश्वशक्ति का टेक्ट्रर एवं ख, ग, घ प्रवर्ग की मंडी समिति 50,000/- रूपये मूल्य के कृषि यंत्र दिये जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त 'क' वर्ग की मंडी समिति में प्रथम पुरस्कार में 21,000/-, द्वितीय पुरस्कार में 15,000/-, तृतीय पुरस्कार में 11,000/- एवं चतुर्थ पुरस्कार में 5,000/-
'ख' वर्ग की मंडी समिति में प्रथम पुरस्कार 15,000/-, द्वितीय पुरस्कार 8,000/-, तृतीय पुरस्कार 5500/- एवं चतुर्थ पुरस्कार 3000/-
'ग' वर्ग की मंडी समिति में प्रथम पुरस्कार 10,000/-, द्वितीय पुरस्कार 6,000/-, तृतीय पुरस्कार 3000/- एवं चतुर्थ पुरस्कार 2000/-
'घ' वर्ग की मंडी समिति में प्रथम पुरस्कार 5,000/-, द्वितीय पुरस्कार 3,000/-, तृतीय पुरस्कार 2000/- एवं चतुर्थ पुरस्कार 1000/-

इलेक्ट्रानिक एक्सचेंज के माध्यम से स्पॉट टे्रेडिंग -

म0प्र0 कृषि उपज मंडी (एक से अधिक मंडी क्षेत्रों के लिये विशेष अनुज्ञप्ति) नियम 2009 के तहत मेसर्स नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड मुम्बई को लायसेंस जारी कर कृषि उपज मंडी समिति इंदौर, विदिशा, गंजबासोदा, गुना में स्पॉट टे्रेडिंग की सुविधायें उपलब्ध कराई गई है।

मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं का क्रियान्वयन -

शासन की नीति के अंतर्गत कृषकों को मिट्टी परीक्षण की सुविधा का लाभ मिले, इसके लिये मंडी बोर्ड द्वारा जिला स्तर पर प्रदेश की 26 मंडियों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालायें स्थापित की गई है। वर्तमान में 26 प्रयोगशालाओं में से 24 में प्रयोगशाला प्रभारी व 24 में लेब टेक्निशियन की नियुक्ति की जा चुकी है, इन 26 प्रयोगशालाओं में से 24 क्रियाशील है एवं 02 अक्रियाशील है। दो अक्रियाशील प्रयोगशाला को क्रियाशील किये जाने हेतु अनुसंधान निधि से राशि उपलब्ध कराई जाने हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

मंडी बोर्ड संचालक मण्डल की 117 वीं बैठक दि. 07.1.2011 के प्रस्ताव क्रमांक 14 में पारित निर्णय के अनुपालन में प्रदेश की जिला मुख्यालय की 26 मंडियों तथा जिला मुख्यालय के अलावा 28 ''अ'' श्रेणी के मंडियों में, इस प्रकार कुल 54 मंडी समितियों में नवीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालायें स्थापित करने का अनुमोदन दिया गया है, जिसके परिपालन में मंडी बोर्ड मुख्यालय भोपाल के आदेश क्रमांक 121-22 दिनांक 01.4.11 द्वारा 54 मंडियों में नवीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन 54 नवीन प्रयोगशालाओं में आवश्यक भवन एवं आवश्यक व्यवस्था जैसे प्लेटफार्म, सिंक, पानी, बैठक व्यवस्था इत्यादि की जा रही है।

किसान सडक निधि -

वर्ष 2000-01 से माह दिसम्बर 2011 तक इस निधि अंतर्गत रूपये 1914.06 करोड अर्जित किये गये है।
मंडी बोर्ड द्वारा म0प्र0ग्रामीण सडक विकास प्राधिकरण को राज्य की सडकों के विकास के लिये किसान सडक निधि से माह दिसम्बर 2011 तक रूपये 1281.33 करोड हस्तांतरित किये गये।
मंडी बोर्ड द्वारा सडक निधि से दिनांक 08.10.2010 में हुए संशोधन के फलस्वरूप राशि रू0 236.00 करोड की स्वीकृति के विरूद्व वर्ष 2011-12 में राशि रूपये 69.07 करोड आंचलिक कार्यालयों को विमुक्त किये गये है।

कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास निधि -

वर्ष 2000-01 से माह दिसम्बर 2011 तक इस निधि अंतर्गत रूपये 248.10 करोड अर्जित किये गये है।
जिसके विरूद्व विभिन्न परियोजनाओं के लिये शासन द्वारा गठित समिति की अनुशंसा उपरांत विभिन्न संस्थाओं को राशि रू0 99.25 करोड अनुदान स्वरूप प्रदाय किये गये है।

गौ संरक्षण एवं संवर्धन निधि -

दिनांक 12 जुलाई 2004 को राजपत्र के माध्यम से यह योजना लागू की गई है।
माह दिसम्बर 2011 तक इस निधि में कुल रूपये 87.88 करोड़ प्राप्त हुये है। जिसमें से म0प्र0गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड को कुल रूपये 58.96 करोड प्रदेश के समस्त जिलों की गौशालाओं को अनुदान प्रदान करने हेतु विमुक्त किये गये है।

बोर्ड शुल्क

बोर्ड की आय का मुख्य स्त्रोत बोर्ड शुल्क अर्थात विपणन विकास निधि है। म0प्र0शासन द्वारा अधिसूचित राजपत्र क्रमांक 160 दिनांक 15.3.2000 एवं कृषि विभाग की अधिसूचना अनुसार कृषि उपज मंडी पर दिनांक 01.04.2000 में मंडी फीस की दर रू0 2 प्रति सौ पर नियत की गई है।

*प्रावधान अनुसार मंडियों को प्राप्त आय (मंडी शुल्क + अनुज्ञप्ति शुल्क) में से शासन के नियम अनुसार एवं निर्धारित स्लैब अनुसार मंडियों से कृषि विपणन विकास निधि (बोर्ड शुल्क) की राशि प्राप्त होती है।

बोर्ड को बोर्ड शुल्क के रूप में वर्ष 2008-09 में रू0 57.00 करोड़ एवं वर्ष 2009-10 में 31 मार्च 2010 तक रू0 60.60 करोड़ प्राप्त हुए है। शुल्क की स्थिति 01 अप्रेल से 31 मार्च वित्त वर्ष अनुसार दर्शायी गई है। वर्ष 2011-12 के माह 01.4.11 से दिसम्बर 2011 तक रूपये 63.41 करोड़ प्राप्त हुए।

भारत सरकार की मार्केट सूचना स्कीम (एगमार्कनेट) -

संक्षिप्त विवरण -विपणन एवं निरीक्षण निर्देशालय, भारत सरकार द्वारा मार्केट इनफारमेंशन नेटवर्क परियोजना शुरू की गयी है। यह योजना विपणन एवं निरीक्षण निर्देशालय द्वारा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की चयनित मंडी समितियों को निशुल्क कम्प्यूटर्स आदि उपकरण प्रदाय किये गये हैं जिनका उपयोग विपणन एवं निरीक्षण निर्देशालय को प्रदेश की मंडी समितियों की दैनिक आवक तथा भाव की जानकारी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र द्वारा विकसित साफ्टवेयर का उपयोग कर इंटरनेट/ई-मेल के द्वारा सम्प्रेषण के लिये किया जायेगा। इन कम्प्यूटर्स के इनस्टालेशन तथा ऑपरेशन के लिये आवश्यक सुविधायें जैसे धूल रहित कक्ष, निर्धारित विद्युत कनेक्शन, कम्प्यूटर ऑप्रेटर तथा टेलीफोन सुविधा संबंधित मंडी समिति द्वारा प्रदाय की जा रही है।

क्रियान्वयन

भारत सरकार की एगमार्कनेट परियोजना का क्रियान्वयन वर्ष जनवरी 2001 से प्रदेश की मंडी समितियों में किया जाना प्रारम्भ किया गया है। वर्तमान में प्रदेश की कुल 246 मंडियों में से 231 मंडियों के कुल 267 नोडस योजना अंतर्गत लाभान्वित हो चुके है :-


क्र.
 

परियोजना का क्रियान्वयन

लाभान्वित मंडियों की संख्या

1.

प्रथम चरण

7

2.

द्वितीय चरण

39

3.

तृतीय चरण

31

4.

चतुर्थ चरण

55

5.

पांचवा चरण

85

6.

छटवां चरण

1

7.

सातवां चरण

-

8.

आठवां चरण

13

9.

फल सब्जी वाली मंडियां

36

 

कुल नोड्स

267

 

विशेष :-

भारत सरकार की मार्केट रिसर्च एण्ड इनफारमेशन नेटवर्क स्कीम ''एगमार्कनेट'' के क्रियान्वयन के लिये Proposals for Replacement of Hardware/Software के तहत प्रदेश की प्रथम एवं द्वितीय चरण की वर्ष मार्च 2000 से 2001-02 वाली 46 मंडियों में भारत सरकार द्वारा नये कम्प्यूटर, प्रिंटर, मोडेम इत्यादि सामग्री की आपूर्ति एवं इस्टॉलेशन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

भारत सरकार की मार्केट रिसर्च एण्ड इनफारमेंशन नेटवर्क स्कीम ''एगमार्कनेट'' के क्रियान्यन के लिया New Proposales for Computer Connectivity के तहत प्रदेश की चयनित फल-सब्जी प्रांगणवाली 85 मंडियों में भारत सरकार द्वारा नये कम्प्यूटर, प्रिंटर, मोडेम इत्यादि सामग्री की आपूर्ति एवं इस्टॉलेशन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

योजनातंर्गत परफारमेंस -

भारत सरकार की एगमार्कनेट परियोजना के सफल एवं सुचारू क्रियान्वयन में परफारमेंस की दृष्टि से म. प्र. माह दिसम्बर 2011 की स्थिति में अन्य 25 राज्यों की तुलना में तृतीय स्थान पर है।

इलेक्ट्रानिक तौल-कांटे :-

प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों मे 80 नग बड़े (05 से 40 टन क्षमता) इलेक्ट्रानिक तौल-कांटे तथा 6194 नग छोटे (03 से 10 क्विंटल क्षमता) इलेक्ट्रानिक तौल-कांटे स्थापित किए जा चुके है। समस्त मंडियों में किसानों से प्राप्त उपज को इलेक्ट्रानिक तौल-कांटे से तुलाई करना अनिवार्य किया गया है।

निर्माण शाखा -

  • प्रदेश में प्रथम चरण में रायपेनिंग चेम्बर, कोल्ड चैन की स्थापना के लिये बुरहानपुर एवं अंजड मंडी क्षेत्र में कार्यवाही प्रचलन में साथ ही जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर, इंदौर एवं उज्जैन तथा बुन्देलखण्ड पैकेज के अंतर्गत सभी जिलों में कार्य कराया जाना प्रस्तावित किया गया है।

  • गेहूँ भण्डारण की व्यवस्था के लिये प्रदेश की 40 मंडी प्रांगणों में 1.00 लाख मे0टन क्षमता की गोदामों का निर्माण कार्य कराये जाने की स्वीकृति कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास निधि से प्राप्त की जाकर भण्डारण व्यवस्था हेतु निर्माण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

  • बुन्देलखण्ड पैकेज के अंतर्गत 6 जिले सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ एवं दतिया में रू0 477.00 करोड के विभिन्न विकास कार्य मंडी प्रांगणों में जिसमें कवर्डशेड, रोड, विद्युत व्यवस्था, जल व्यवस्था इत्यादि के साथ ही वेयरहाउसिंग एवं विपणन संघ की योजनाओं में 5.69 लाख मे0टन क्षमता के निर्माण कार्य कराये जाने हेतु निविदा की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

  • किसान सडक निधि से प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों की सडकों के निर्माण कार्य एवं मंडी प्रांगण में कृषकों की सुविधा हेतु राशि रू0 335.00 करोड के विभिन्न कार्यो के अंतर्गत तथा आवश्यक मूलभुत सुविधाओं के आधार पर विभिन्न विकास कार्य कराये जा रहे है, जिससे कृषकों को आवागमन में सुविधा एवं मंडी प्रांगणों में आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हो सकेगी।

  • मंडी प्रांगण में कृषकों को अपनी उपज की तौल हेतु इलेक्ट्रानिक तौल कांटे से तौल करायी जा रही है। साथ ही मंडी प्रांगण में बडे तौल कांटे बी.ओ.टी आधार पर स्थापित कर कृषकों को सही तौल उपलब्ध कराने हेतु सुविधा प्रदान की गई है।

  • प्रदेश में कम्पोजिट लॉजिस्टिक हब की योजना के अंतर्गत पवारखेडा जिला होशंगाबाद में स्थापित किया जा रहा है, जिसके लिए लगभग 115 एकड भूमि का अधिपत्य मंडी बोर्ड ने प्राप्त कर 88 एकड भूमि पर जन निजी भागीदारी योजना के तहत रू0 150.00 करोड राशि से निवेशन द्वारा लॉजिस्टिक हब तीन वर्ष के अंदर विकसित कर प्रांरभ किये जावेगे, जिससे कार्गो व कंटेनर मूव्हमेंट के लिये इनलैण्ड कन्टेर डिपो (आई.सी.डी) रेल्वे टर्मिनल एवं कोल्ड चैन के लिये भण्डारण तथा प्रसंस्करण केन्द्र के अंतर्गत कोल्ड स्टोरेज विभिन्न प्रकार के वेयरहाउस, कृषि उद्योग मूल्य संवर्धन सेवाएं, ट्रक टर्मिनल आदि का निर्माण एवं संचालन किया जावेगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन से होशंगाबाद से लगभग 100 कि0मी0 की परिधि के क्षेत्र के कृषि उद्योग लाभान्वित होगें। यह देश की ''फार्म टू फोर्क इंटिग्रेशन'' की चन्द परियोजनाओं में से तथा प्रदेश में पहली परियोजना है, जिससे लगभग 2500 से 3000 प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। निवेदश्न द्वारा दि0 24.10.11 को अनुबंध निष्पादित किया गया है। उल्लेखित परियोजना के निर्माण कार्य की आवश्यक अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्त किया जाकर मार्च 2012 से प्रारंभ किया जायेगा।

  • फल-सब्जी होलसेल मार्केट के अंतर्गत करोंद मंडी प्रांगण भोपाल में सर्व सुविधायुक्त मार्केट का निर्माण कार्य राशि रू0 37.00 करोड के कराया गया है, जिससे भोपाल में फल-सब्जी के लिये एक स्थायी व्यवस्था उपलब्ध करायी गयी है।

  • प्रदेश की 30 मंडी प्रांगणों में फल सब्जी मंडी प्रांगण के विपणन व्यवस्था को सुदृढ करने के लिए विकसित करने की योजना के अंतर्गत कृषि अनुसंधान विकास निधि से रू0 68.22 अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास निधि से रू0 68.22 करोड की स्वीकृति दी जाकर विकास कार्य प्रारंभ कराये गये है।

पवारखेडा जिला होशंगाबाद में कम्पोजिट लॉजिस्टिक हब की स्थापना -

पवारखेडा जिला होशंगाबाद में कम्पोजिट लॉजिस्टिक हब मण्डी बोर्ड तथा वेयरहाउसिंग लॉजिस्टिक कार्पोरेशन के संयुक्त उपक्रम के तहत 115 एकड क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है, जिसमें अनुमानित व्यय रूपये 170.00 करोड़ की राशि की अद्योसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित की जावेगी। यह परियोजना पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप की अवधारणा पर आधारित है। उक्त परियोजना में इनलैण्ड कंटेनर डिपो, रेलवे टर्मिनल, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग व कॉमन फैसलिटीज विकसित की जावेगी। साथ ही मण्डी द्वारा क्रय केन्द्र स्थापित विभिन्न प्रसंस्करण यूनिट को प्रोत्साहित करने हेतु आवश्यक सुविधाएं विकसित की जावेगी। यह प्रदेश का प्रथम कम्पोजिट लॉजिस्टिक हब की श्रेणी में स्थापित किया जा रहा है, जिसमें समस्त आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहेगी।

शाहपुरा जिला जबलपुर में फूड पार्क की स्थापना

जबलपुर संभाग के अन्तर्गत ग्राम खैरी शाहपुरा में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 59 हेक्टेयर में अद्योसंरचना विकास निधि के अन्तर्गत फूड पार्क प्लाजा की स्थापना का प्राथमिक चरण का कार्य प्रारम्भ किया गया है, जिस पर वर्तमान में रूपये 140.00 करोड़ का व्यय प्रस्तावित है। उक्त परियोजना के क्रियान्वयन होने से क्षेत्र के कृषक वर्ग को विशेष रूप से लाभ एवं आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होगी। योजना का क्रियान्वयन P.P.P. project के तहत किया जा रहा है।

राजधानी भोपाल में होलसेल मार्केट की स्थापना के संबंध में -

प्रदेश की राजधानी भोपाल के नवीन मण्डी प्रांगण करोंद में आधुनिक होल सेल मार्केट स्थापित किये जाने की परियोजना स्वीकृत की गयी है। इस योजना हेतु म0प्र0 शासन द्वारा किसान सड़क निधि मद से रूपये 40.00 करोड़ की स्वीकृति तथा राष्ट्रीय हॉर्टिकल्चर मिशन के अन्तर्गत 25 प्रतिशत अनुदान राशि रूपये 9.16 करोड़ स्वीकृत किये गये है। उक्त होलसेल मार्केट में आधुनिक पध्दति के आधार पर इलेक्ट्रानिक आक्शन, होलसेलर शॉपस्, कैश एवं कैरि स्टोर्स, हाईपर मार्केट, डिस्ट्रीब्यूशन सेन्टर, राईपेनिंग चेम्बर एवं कोल्ड स्टोरेज का प्रावधान करते हुए अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसीत की जा रही है, योजना का कार्य प्रगति पर है। इससे मण्डी क्षेत्र के कृषकों एवं व्यापारियों को लाभ हो

फूलों पर मंडी फीस से छूट -

कृषि उपज मंडी समिति, इन्दौर के विनिर्दिष्ट प्रांगण में फूलों के सुचारू विपणन हेतु आधिुनिक फूल मंडी स्थापित की गई है। मध्यप्रदेश असाधारण राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना दिनांक 17.7.2008 से राज्य सरकार द्वारा धारा 69 के अधीन कृषि उपज मंडी समिति, इन्दौर के मंडी क्षेत्र में अधिसूचित कृषि उपज ''फूल'' पर अधिनियम के अधीन अधिरोपित मंडी फीस के भुगतान से पूर्णत: छूट दी गई है। मंडी फीस की उक्त छूट अद्यतन प्रभावशील है।

फल सब्जी विपणन हेतु अतिरिक्त सुविधाएं

राज्य शासन के द्वारा म प्र क़ृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 की धारा 6 की धारा 6 में दिनांक 27 जनवरी 2012 को संशोधन कर यह प्रावधान किये गये हैं कि अधिसूचित कृषि उपज यथा फल एवं सब्जी का विपणन उत्पादक द्वारा मंडी प्रागंण के बाहर भी किया जा सकता है। उत्पादकों को पूर्व की भांति मंडी प्रागंण में अपनी उपज लाकर विक्रय करने की सुविधा यथावत रहेगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि उत्पादकों के द्वारा जब मंडी प्रागंण के बाहर अधिसूचित कृषि उपज फल एवं सब्जी का विपणन किया जायेगा तब संदर्भित पर म प्र क़ृषि उपज मंडी अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगें।
उपरोक्त व्यवस्था से राज्य शासन के द्वारा कृषकाें को उनकी उपज के, जो कि जल्दी खराब होने वाली श्रेणी में आती है, के विपणन हेतु अतिरक्त विकल्प उपलब्ध कराये गये हैं, इसका लाभ फल एवं सब्जी पर आधारित प्रसंस्करणकर्ताओं को भी होगा जो कि उत्पादकों से सीधे कृषि उपज को क्रय का इसका प्रसस्ंकरण एवं इस पर आधारित उद्योगों का संचालन कर सकेगें। राज्य शासन की यह पहल अपने आप मे संपूर्ण देश में पहली है।

एकल लायसेंस प्रणाली प्रभावशील की गई - म. प्र. कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 की धारा 32-क के अधीन एक से अधिक मंडी क्षेत्रों के लिये विशेष अनुज्ञप्ति दिये जाने का प्रावधान किया है। धारा-32-क के अधीन म.प्र. कृषि उपज मंडी (एक से अधिक मंडी क्षेत्रों के लिये विशेष अनुज्ञप्ति) नियम 2003 (संशोधित 2009) के अधीन निम्नानुसार फर्मो को एक से अधिक मंडी क्षेत्रों में क्रय-विक्रय के लिये विशेष अनुज्ञप्ति प्रदान की गई है।
1. आई.टी.सी. लिमिटेड (आई.बी.डी), 2. भास्कर एक्स आईल्स लिमिटेड, 3. शारदा सोलवेन्ट लिमिटेड 4. रेंजर फार्मस लिमिटेड, 5. रिलायन्स रिटेल लिमिटेड, 6. मे0 जयप्रकाश एग्री एलीसियेटिव क. लि.रीवा, 7. रिलायन्स एग्री प्रोडक्ट्स डिस्टिब्यूशन लिमिटेड, 8. उक्त नियम के अंतर्गत ''नेशनल स्पाट एक्सचेंज लिमिटेट'' को केवल एक्सचेंज के लिये विशेष अनुज्ञप्ति प्रदान की गई है।
म.प्र. कृषि उपज मंडी (एक से अधिक मंडी क्षेत्रों के लिये विशेष अनुज्ञप्ति) नियम 2003 को संशोधित कर राज्य सरकार द्वारा 2 मार्च 2009 से नवीन विशेष अनुज्ञप्ति नियम 2009 प्रभावशील कर दिये गये है।

बोर्ड कार्मिक :-

पदोन्नति संबंधी - वर्ष 2011-12 में कार्मिक शाखा द्वारा किये गये उल्लेखनीय कार्यो का विवरण

1. नियमितीकरण

   
 

(1) सहायक उप निरीक्षक

281

 

(2) मंडी समिति सेवा के लिपिक

32

 

(3) मंडी समिति सेवा के वाहन चालक 

04

 

(4) इलेक्टिशियन

02

 

(5) भृत्य/चौकीदार/स्वीपर

92

 

बोर्ड सेवा

 
 

(1) उपयंत्री

09

 

(2) सहायक प्रोग्रामर

01

 

(3) सहायक ग्रेड-3

02

 

(4) स्टेनो टायपिस्ट

01

 

(5) भृत्य/चौकीदार

12

   

----

   

437

2. पदोन्नति

   
 

1. सचिव ब से सचिव अ पदोन्नति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है

 
 

2. सचिव स से सचिव ब

03

 

3. लेखापाल द्वितीय से लेखापाल प्रथम

28

 

4. सहायक उपनिरीक्षक से मंडी निरीक्षक

187

 

बोर्ड सेवा

 
 

1. उपसंचालक से संयुक्त संचालक

01

 

2. सहायक संचालक/सचिव प्रथम/
लेखाधिकारी/शीघ्रलेखक-1 से उपसंचालक

11

 

3. सहायक यंत्री से कार्यपालन यंत्री

06

 

4. सहायक लेखाधिकारी से लेखाधिकारी

02

 

5 लेखापाल से सहायक लेखाधिकारी

02

 

6 वरिष्ठ अंकेक्षक से सहायक लेखाधिकारी

04

 

7. भृत्य/चौकीदार से सहायक ग्रेड-3

02

   

----

   

246

3. अनुकम्पा नियुक्ति

   
 

मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड एवं मंडी समितियों मे वर्ष 2011-12 में 23 जनवरी 2012 तक 39 अनुकम्पा नियुक्तियां प्रदान की जा चुकी है।

 

4. परिवीक्षा समाप्ति

   
 

राज्य कृषि विपणन बोर्ड में कार्यरत सहायक उपनिरीक्षकों में से वर्तमान तक 239 सेवकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त की जा चुकी है।

 

5. सीधी भरती

   
 

राज्य मंडी बोर्ड सेवा के विभिन्न संवर्गों में व्यवसायिक परीक्षण मण्डल के माध्यम से निम्नानुसार सीधी भरती की गई है।

 
 

1. सहायक संचालक

06

 

2. सहायक यंत्री (सिविल)

09

 

3. सहायक यंत्री (इले.)

01

 

4. सचिव वर्ग-अ

01

 

5. उपयंत्री सिविल

27

 

6. उपयंत्री इलेक्टिकल

03

 

7. कनिष्ठ अंकेक्षक

25

 

8. लेखापाल

59

 

9. डाटा इन्ट्रीआपरेटर

07

 

10. कनिष्ठ नगर निवेषक

01

 

11. सहायक उपनिरीक्षक

486

   

----

   

625

 

म प्र राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम

  1. निगम की स्थापना


  2. मप्रराज्य बीज एवं फार्म विकास निगम की स्थापना मप्रबीज अधिनियम 1980 (18) के अन्तर्गत 17 नवम्बर 1980 को की गई थी और निगम द्वारा जनवरी 1981 से कार्य प्रारम्भ किया गया।
     

  3. निगम के मुख्य कामकाज

    मध्यप्रदेश के कृषकों को पर्याप्त उन्नत एवं उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना। इस कामकाज की पूर्ति के लिये निम्न कार्य किये जाते हैं :-
     

    1. प्रजनक बीज से अधिक से अधिक आधार बीज का उत्पादन करना।

    2. आधार बीज से अधिक से अधिक प्रमाणित बीज का उत्पादन करना।

    3. प्रदेश के कृषकों को उनकी आव6यकतानुसार अधिक से अधिक मात्रा में उन्नत एवं उच्च गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराना।

    4. बीज के उपार्जन और विक्रय मूल्यों में नियंत्रण कर कृषकों को उचित मूल्य पर बीज प्रदाय करना। 
       

  4. बीज निगम का संचालक मण्डल

    बीज निगम के संचालक मण्डल का संचालन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंध निदे6ाक और 8 निदे6ाक मिलाकर कुल ग्यारह सदस्यों द्वारा संचालित किया जाता है जो राज्य शासन द्वारा नामांकित किये जाते हैं। वर्तमान में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंधक निदेशक के साथ साथ पाँच निदेशकों के द्वारा संचालक मण्डल का कार्य संचालित किया जा रहा है।
     

  5. निगम का संगठनात्मक स्वरूप
     

    1. बीज निगम के अन्तर्गत 07 क्षेत्रीय कार्यालय-भोपाल, इन्दौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, सतना एवं ग्वालियर में स्थित है। बीज निगम का कार्यक्षेत्र मप्र में आच्छादित है। निगम के पास कुल 42 कृषि प्रक्षेत्र, 51 बीज प्रक्रिया केन्द्र हैं।

    2. बीज निगम के स्वीकृत सेटअप के अनुसार कुल 521 पद स्वीकृत है जिनका श्रेणीवार विवरण निम्नानुसार है :-

      क्रमांक

      श्रेणी

      कुल स्वीकृत पद

      भरे पद

      1

      प्रथम श्रेणी

      22

      03

      2

      द्वितीय श्रेणी

      57

      25

      3

      तृतीय श्रेणी

      407

      256

      4

      चतुर्थ श्रेणी

      35

      45

       

      योग :-

      521

      329

    नोट :- क्रमांक-4 में वर्णित चतुर्थ श्रेणी के स्वीकृत-35 पदों के विरूद्ध मा उच्च न्यायालय प्रकरण में आदे6ा अनुसार 14 कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया है। यह 14 पद डाइंग केडर के हैं।
     

  6. वित्तीय स्थिति
     

    1. निगम की प्राधिकृत अंशपूँजी 1500 लाख है। मध्यप्रदेश शासनभारत सरकार से राशि रूपये 1500 लाख प्रदत्त पूँजी प्राप्त हुई है। यह राशि निगम में नगद एवं सम्पत्ति के एवज में मिलाकर प्राप्त हुई है। व्यवसाय सम्पादन हेतु राशि रूपये 976 लाख मध्य प्रदेश शासन से अल्पकालीन ऋण के एवज में तथा व्यवसायिक बैंकों से बीज क्रय हेतु राशि रूपये 1695 लाख साख सीमा स्वीकृत है।

    2. विगत पाँच वर्षों के प्रोविजनल लेखों के वित्तीय एवं लाभहानि के ऑंकड़े निम्नानुसार है :-
       

    क्र.

    विवरण

    2007-08

    2008-09

    2009-10

    2010-11

    2011-12

    1

    अधिकृत पूँज

    150000

    150000

    150000

    150000

    150000

    2

    प्रदत्त अंशपूँजी

    82700

    82700

    82700

    112700

    150000

    3

    टर्न ओव्हर

    653860

    845090

    944191

    892761

    950000

    4

    शुद्ध लाभहानि

    13247

    27412

    82109

    (-)41328

    20000

    5

    संचित लाभहानि

    (-)26074

    ()1338

    80400

    39072

    59072

    वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अभी दो माह का समय शेष है। वित्तीय वर्ष 2011-12 में दर्शाया गया लाभ रूपये 200 लाख में बढ़ौतरी होने की सम्भावना है। अन्तिम स्थिति वित्तीय वर्ष समाप्त होने के पश्चात् ज्ञात हो सकेगी।
     

  7. बीज प्रक्रिया केन्द्र

    म0प्र0बीज निगम के अधिनस्थ बीज संसाधन के लिये कुल 51 प्रक्रिया केन्द्र हैं, जिनकी बीज संसाधन क्षमता 800 लाख क्विटल कच्चे बीज की है। वर्तमान में 456 लाख क्ंविटल बीज का संसाधन किया जा रहा है जो कि संसाधन क्षमता का 57 प्रति6ात है।
     

  8. निगम कृषि प्रक्षेत्र

    बीज निगम के अधिनस्थ कुल 42 कृषि प्रक्षेत्र जिनका उपलब्ध रकबा 3472 हेक्टेयर है। उपलब्ध रकबे में से कास्त योग्य रकबा रबी एवं खरीफ दोनों सीजन में 2874 हैक्टेयर है:-
     

    क्र

    वर्ष

    बोया गया रकबा
    (हेक्टर में)

    उत्पादित बीज
    (क्विटल में)

    उत्पादन
    प्रति हेक्टर

    खरीफ

    रबी

    योग

    खरीफ

    रबी

    योग

    खरीफ

    रबी

    1

    2006-07

    1348

    1539

    2887

    13929

    24397

    38326

    1033

    1591

    2

    2007-08

    1529

    1293

    2822

    12435

    15668

    28103

    813

    1212

    3

    2008-09

    1524

    1440

    2964

    10652

    14788

    25440

    742

    1022

    4

    2009-10

    1695

    1215

    2910

    8432

    18264

    26696

    497

    1503

    5

    2010-11

    1300

    1467

    2707

    11900

    15963

    27863

    915

    1088

     

  9. व्यावसायिक गतिविधियाँ :-

    टर्न ओवर निम्नानुसार है :-

    क्रमांक

    वर्ष

    टर्न ओवर

    टर्न ओवर की राशि में
    प्रतिवर्ष वृद्धि का प्रतिशत

    बीज की मात्रा

    राशि

    1

    2005-06

    243642

    529741

    -

    2

    2006-07

    223525

    637697

    2037%

    3

    2007-08

    276595

    653860

    253%

    4

    2008-09

    276166

    808396

    2363%

    5

    2009-10

    302840

    944191

    1681%

    6

    2010-11

    313477

    892761

    (-)990%

     

    1. आधारप्रमाणित की उपलब्धता, वितरण एवं अव6ोष बीज :-
       

      क्रमांक

      वर्ष

      उपलब्धता

      वितरण

      अवशोष

      1

      2011-12

      309297

      302106

      7191
      सम्भावित

      2

      2010-11

      336344

      313477

      22867

      3

      2009-10

      303346

      302840

      506

      4

      2008-09

      278634

      276166

      2471

      5

      2007-08

      289736

      276595

      13141

      6

      2006-07

      228600

      223525

      5075

      7

      2005-06

      262724

      243642

      19082

      8

      2004-05

      389924

      318627

      28703

      वित्तीय वर्ष 2009-10 के खरीफ सीजन में कुल बीज मात्रा 171 लाख क्ंविटल बीज की उपलब्धता रही है जिसमें सोयाबीन बीज मात्रा 158 लाख क्ंविटल शामिल है। सोयाबीन बीज की मात्रा अभी तक सर्वाधिक रही है।
       

  10. अन्य गतिविधियाँ
     

    1. मार्च 2008 की स्थिति में बीज निगम के वार्षिक लेखों का अंकेक्षण 2001-02 तक अंकेक्षित हुआ था। वित्तीय वर्ष 2008-09 में चार वर्ष के लेखे एवं वित्तीय वर्ष 2009-10 में दो वर्ष के लेखे इस प्रकार से कुल छ: वर्षों के लेखों का अंकेक्षण कार्य पूरा किया गया। वर्ष 2008-09 एवं 09-10 के लिए वैधानिक अंकेक्षक की नियुक्ति की जा चुकी है और इन दोनों वर्षों के लेखों का अंकेक्षण माह मार्च 2012 तक पूर्ण होने पर बीज निगम लेखों की दृष्टि से अद्यतन की स्थिति में आ सकेगा।

    2. कृषकों के हितों को ध्यान में रखते हुये वर्ष 2011-12 में ग्वालियर एवं दतिया में प्रक्रिया केन्द्र की स्थापना की गई है तथा दोनों केन्द्रों पर 8000 क्ंवि प्रति वर्ष क्षमता के नवीन बीज संसाधन संयंत्र स्थापित कराये गये हैं। इसके अतिरिक्त केन्द्र शासन से प्राप्त सहायता राशि रूपये 2,7375 लाख में से बीज निगम के 10 प्रक्रिया केन्द्रों का उन्नयन किया गया है तथा इन केन्द्रों पर 16000 क्ंवि प्रतिवर्ष क्षमता की अद्यतन मशीनें स्थापित कराई जा चुकी है। केन्द्र शासन से प्राप्त सहायता राशि में से 1000 एमटी क्षमता के 13 गोदाम प्रदेश के विभिन्न निगम प्रक्रिया केन्द्रों के लिये निर्माण कराने की कार्यवाही की जा रही है।

    3. क़ृषकों को बीज अनुदान की व्यवस्था
      भारत सरकार की आईसोपाम योजना के अन्तर्गत बीज उत्पादन पर रू 1000- प्रति क्ंविटल एवं बीज वितरण पर रू 2000- प्रति क्ंविटल अथवा लागत का 50 प्रति6ात दोनों में से जो कम हो, अनुदान देने का प्रावधान है। तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मि6ान एवं आरक़ेवाय क़े अन्तर्गत अनाज फसलों पर रूपये 500- प्रति क्ंविटल अनुदान देने का प्रावधान है। यह रा6ाि भारत सरकार से राज्य शासन को प्राप्त होती है और राज्य शासन का कृषि संचालनालय जिला स्तर पर बीज निगम को भुगतान करता है।

मध्य प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था

विभागीय संरचना

संस्था के कार्य के सुचारू रूप से संचालन हेतु ''मेमोरेंडम ऑफ एसोसियेशन'' निर्धारित है, जिसके अंतर्गत संस्था का संचालक मण्डल गठित है। संचालक मण्डल मे अध्यक्ष प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त हैं। संस्था का प्रधान कार्यालय भोपाल में स्थित है। संस्था के प्रबंध संचालक मुख्य कार्यपालन अधिकारी होते हैं। प्रधान कार्यालय से ही संस्था का पूरे प्रदेश का प्रशासनिक तकनीकी एवं वित्तीय नियंत्रण होता है, तथा कार्य की सुविधा की दृष्टि से संस्था के 10 संभागीय कार्यालय क्रमश: इन्दौर, सागर, ग्वालियर, भोपाल, खण्डवा, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, मंदसौर एवं होशंगाबाद मे स्थित है।

इसके अतिरिक्त संस्था की दो बीज परीक्षण प्रयोगशालायें इन्दौर, जबलपुर मे कार्यरत हैं। इन प्रयोगशालाओं की वार्षिक क्षमता 20,000 नमूने परीक्षण करने की है। अनुवांशिक शुद्वता परीक्षण के लिये संस्था का एक प्रक्षेत्र देलमी जिला धार मे स्थित है। उज्जैन एवं भोपाल में स्वीकृत नवीन बीज परीक्षण प्रयोगशालायें स्थापित की जाकर इन्हें क्रियाशील करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

उद्देश्य

संस्था का उद्देश्य उन्नत फसलों की ऐसी किस्मों के बीज का प्रमाणीकरण करना है जो भारत सरकार द्वारा अधिसूचित की गई हैं। इन किस्मों का प्रमाणीकरण केन्द्रीय बीज प्रमाणीकरण मण्डल द्वारा निर्धारित बीज प्रमाणीकरण के सामान्य नियमों तथा विभिन्न फसलों के विशिष्ट मानकों के अंतर्गत किया जाता है ताकि कृषकों को उच्च कोटि का निर्धारित मानक के अनुरूप बीज उपलब्ध हो।

विभाग से संबंधित सामान्य जानकारी

भारत सरकार द्वारा अधिसूचित बीज अधिनियम 1966 की धारा-8 के अन्तर्गत मध्यप्रदेश में बीज प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना 1 फरवरी-1980 को हुई। संस्था का, मध्यप्रदेश सोसायटीज रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1973 के अन्तर्गत पंजीयन कराया गया (पंजीयन क्रमॉक 8701 दिनॉक 21.1.80)। प्रदेश का कोई भी किसान जो उन्नत बीज उत्पादन में रूचि रखता हो मध्यप्रदेश की किसी भी बीज उत्पादक संस्था के माध्यम से अथवा सीधे अपना बीज उत्पादन कार्यक्रम पंजीकृत करा सकता है।

प्रदेश में निम्न संस्थाएं एवं अन्य बीजोत्पादक, बीज प्रमाणीकरण संस्था से अपना बीज प्रमाणित कराते हैं-

  1. राष्ट्रीय बीज निगम।

  2. मध्यप्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम।

  3. मध्यप्रदेश तिलहन उत्पादक सह.संध मर्यादित।

  4. मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम।

  5. किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश।

  6. मध्यप्रदेश उधानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग।

  7. कृषि विश्वविद्यालय।

  8. बीज उत्पादक सहकारी समितियाँ।

  9. भारतीय राज्य फार्म निगम लिमिटेड।

  10.  निजी संस्थाएं।

महत्वपूर्ण सांख्यिकी :-

           2.1- 3 वर्षो में पंजीकृत क्षेत्रफल एवं प्रमाणित बीज की मात्रा निम्नानुसार है:-
 

क्र.

वर्ष

पंजीकृत क्षेत्र
लाख (हैक्ट. में)

प्रमाणित बीज की मात्रा
(लाख क्ंवि. मे)

खरीफ

रबी

योग

खरीफ

रबी

योग

1.

2007-08

1.54

0.68

2.22

16.30

11.14

27.44

2

2008-09

2.34

0.73

3.07

24.17

11.41

35.58

3.

2009-10

2.63

0.91

3.55

26.83

14.88

41.72

4

2010-11

2..47

1.04

3.51

20.32

16.20

36.52

खरीफ 11 में 2.19 लाख हेक्टे. क्षेत्र का पंजीयन हुआ है, जिससे खरीफ 12 हेतु लगभग 22.00 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज प्राप्त होना अनुमानित है।
रबी 11-12 में 1.09 लाख हेक्टेयर का पंजीयन किया गया है। फसल निरीक्षण कार्य प्रगति पर है।

2.2- बीज परीक्षण प्रगति :-

तीन वर्षो में परीक्षण किये गये नमूने :- इकाई:- संख्या में

क्र.

प्रयोगशाला

2009-10

2010-11

2011-12
(31 दिसम्बर तक)

1

जबलपुर

31597

30445

19020

2

इन्दौर

24551

35203

16200

 

योग

56148

65648

35220

भाग -दो
बजट प्रावधान

संस्था को वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट प्रावधान अनुसार राशि रूपये 1912.60 लाख की प्राप्ति तथा राशि रूपये 1467.48 लाख रूपये के संभावित व्यय का बजट संस्था के संचालक मण्डल द्वारा अनुमोदित किया गया है।
संस्था द्वारा वर्ष 1980-81 में बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंन्तर्गत कुल 3000 हैक्टेयर रकबे से बीज प्रमाणीकरण का कार्य शुरू किया गया था, जो वर्ष 2010-11 में बढ़कर 3.51 लाख हेक्टेयर हो गया है। इस रकबे से कुल 36.52 लाख क्ंविटल प्रमाणित बीज उत्पादित हुआ।

भाग-तीन
राज्य योजना

-निरंक-


भाग-4
सामान्य प्रशासनिक विषय


विभागीय पदोन्नतियॉ, जाँच, नियुक्तियॉ तथा स्थानान्तरण की जानकारी

  अ- पदोन्नतियॉ :-
          वर्ष 2011-12 में निरंक।

ब- विभागीय जॉच :-
 

स.क्र.

वर्ष

प्रारंभ में लंबित विभागीय जॉच

नये वर्ष में
शामिल प्रकरण

कुल प्रकरण

जॉच कर निर्णय किया गया

निर्णय हेतु
शेष प्रकरण

1

2011-12

08

07

15

निरंक

15

स- न्यायालयीन प्रकरण :-
 

स.क्र.

वर्ष

प्रारंभ में लंबित न्यायालयीन प्रकरण

नये वर्ष में शामिल  न्यायालयीन प्रकरण

 कुल न्यायालयीन प्रकरण

निर्णयीत न्यायालयीन प्रकरण

निर्णय हेतु शेष न्यायालयीन प्रकरण

1

2011-12

25

12

37

04

33

द- नियुक्तियॉ :-

       वर्ष 2011-12 में 11 अलिपिक वर्गीय नियुक्तियां की गई है।

घ- वर्ष 2011-12 में स्थानान्तरण की जानकारी :-
 

पद

श्रेणी

भरे पद

स्थानान्तरण

स्थानान्तरण निरस्त

स्वयं के व्यय

प्रशासकीय

प्रशासकीय

स्वयं के व्यय

सहा. बीज प्रमा. अधिकारी

तृतीय

184

05

06

-

01

बीज विश्लेषक

तृतीय

16

01

-

-

-

प्रयोगशाला सहायक

तृतीय

17

02

-

-

-

भाग-5
( विभाग द्वारा निकाले जा रहे प्रकाशन, यदि कोई हो, का उल्लेख किया जावे )
...........निरंक..........

भाग-6
सारांश


संस्था का गठन भारत शासन द्वारा अधिसूचित बीज नियम 1966 की धारा 8 के अन्तर्गत किया गया है एवं संस्था का मुख्य कार्य निर्धारित गुणवत्ता के बीज का प्रमाणीकरण करना है।

जवाहरलाल नेहरू कृषि विष्वविद्यालय, जबलपुर

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1964 में प्रदेश के कृषि विकास के लिए हुई। विश्वविद्यालय में संस्था प्रमुख कुलपति हैं। कार्य संपादन के लिए कुलसचिव, लेखानियंत्रक, दो अधिष्ठाता संकाय, क्रमश: अधिष्ठाता कृषि संकाय, अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी संकाय, तीन संचालक क्रमश: संचालक शिक्षण, संचालक विस्तार सेवाऐं, संचालक अनुसंधान सेवाएें तथा 04 अधिष्ठाता कृषि, 01 अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी के पद स्वीकृत है साथ ही 04 क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, 04 आंचलिक अनुसंधान केन्द्र एवं 20 कृषि विज्ञान केन्द्र जो प्रदेश के कृषि जलवायु क्षेत्र में विश्वविद्यालय के अन्तर्गत कृषि शिक्षा अनुसंधान एवं विस्तार का कार्य संपादित कर रहे हैं। विश्वविद्यालय कृषि उत्पादन, उत्पादकता एवं टिकाऊ कृषि उत्पादन तंत्र तथा ग्रामीण जीवन शैली की गुणवत्ता की समग्र अभिवृध्दि हेतु एक मिशन की भांति कटिबध्द हैं। कृषि एवं सम्बध्द विज्ञानों की उच्च स्तरीय शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र के रूप में सेवाएॅ देना तथा अनुशंसित प्रौद्योगिकी का कृषकों, विस्तार कार्यकर्ताओं एवं विविध कृषि विकास कार्यक्रमों से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं तक प्रसारित करना हैं।

उपलब्धियां

विश्वविद्यालय के लिये वर्ष 2011-12 विशिष्ट उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा। देश भर के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही केन्द्रीय कृषि मंत्री माननीय शरद पवार, माननीय मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, कृषि राज्य मंत्री चरणदास महंत, डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया सहित अनेकों गणमान्य राजनीतिज्ञ और भारत की शीर्षस्थ शासकीय संस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के डायरेक्टर जनरल डॉ. एस. अयप्पन एवं भारत के विख्यात कृषि विश्वविद्यालयों के लगभग 10 माननीय कुलपति आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा कृषि केबीनेट का गठन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यवाही के पूर्व लगातार तीन दिन तक चली राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर के उपस्थित प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों की उपस्थिति में कृषि विकास के मसौदे पर गहन विचार मंथन किया गया।

विश्व विद्यालय के नेतृत्व में देश भर के कृषि विज्ञान केन्द्रों का राष्ट्रीय सम्मेलन जबलपुर में संपन्न हुआ । इस महा सम्मेलन में हजारों कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य था कि देश भर के वैज्ञानिक, शिक्षक और कृषि तकनीक से कृषि वि.वि. का जीवन्त सम्पर्क स्थापित हो । अमेरिका जैसे देशों के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित कर वि.वि. की छवि पहले ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुकी है । इसके साथ ही वि.वि. ने अनेकों नवीन किस्मों का भी विकास कर कृषि क्षेत्र और किसानों की सेवा की है । जहां हजारों किसानों को प्रशिक्षित किया गया वहीं शासकीय कार्यकर्ताओं और कृषि विस्तार अधिकारियों को भी प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर तैयार किये गये । जिससे किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक आसानी से पहुंच सके। कृषि क्षेत्र की निजी कम्पनियों से भी एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये गये, ताकि कृषि वि.वि. द्वारा विकसित उन्नत तकनीक का सद्ुपयोग हो और किसानों तक तकनीक व बीज इत्यादि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो सकें ।

विगत वर्ष की विश्वविद्यालय की उपलब्धियों में वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय पुरूस्कार, कृषि विज्ञान केन्द्र जबलपुर को जोन-7 का सर्वश्रेष्ठ पुरूस्कार आदि शामिल है । अधोसंरचना विकास, प्रक्षेत्र उन्नयन, गुणवत्तायुक्त कृषि शिक्षा, अन्तर्राष्ट्रीय अनुसंधान परीयोजनायें (बोरलाग संस्था एवं जापान की परियोजना) व विस्तार के क्षेत्र की नवीनतम योजनाऐं जैसे क्राप कैफेटेरिया, टेक्नॉलाजी पार्क्र आदि वर्ष के महत्वपूर्ण प्रयास रहे है । हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा वि.वि. को 13 करोड़ का अतिरिक्त अनुदान प्रदान करने की घोषणा की गई है इससे वि.वि. की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वर्ष 2012 हेतु अनेक महत्वाकांक्षी योजनायें तैयार की जा रही हैं जिससे देश, प्रदेश और विश्व समूह के कृषक, व्यवसायी, वैज्ञानिक और उद्यमी लाभान्वित हो सकेंगे ।

शिक्षा

  1. राष्ट्रीय स्तर पर NET, GATT, JRF, ARS, एवं प्रान्तीय स्तर पर PSC, o Forest Services में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के चयन हुए हैं। उच्च अध्ययन हेतु Competitive exam के माध्यम से IARI, BHU एवं FRI में भी बड़ी संख्या चयन में हुआ है ।

  2. विगत एक वर्ष में 89 विद्यार्थर्ियों का चयन 10 विभिन्न संस्थानों में कैंम्पस साक्षात्कार के माध्यम से हुआ । पंजाब नेशनल बैंक एवं म.प्र. जलग्रहण मिशन के साक्षात्कार आयोजित किये गये है।

  3. विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार NCC का 700 केडेट्स का दस दिवसीय कैम्प आयोजित किया गया।

  4. गौरवशाली 46 वर्ष पूर्ण होने पर (2 अक्टूबर 2011) विश्वविद्यालय स्थापना सप्ताह का आयोजन किया गया जिसमें विश्वविद्यालय परिसर में 2000 पौधों का रोपण, साहित्यिक कार्यक्रम, एवं कृषक संगोष्ठी आयोजित की गई ।

  5. ICAR, Development grant से प्राप्त वित्तिय सहायता से खेल परिसर, अन्तरराष्ट्रीय गेस्ट हाउस, म्यूजियम, केन्द्रीय परीक्षा भवन एवं छात्रावासों का गुणवत्ता युक्त निर्माण प्रगति पर है ।

  6. शिक्षा सत्र 2011-12 से कृषि महाविद्यालय टीकमगढ़ में 6 विषयों में स्नातकोत्तर एवं रीवा में स्नातकोत्तर व पी.एच.डी. प्रारम्भ की गई । स्नातक एवं स्नाकोत्तर एवं गढ़ाकोटा में डिप्लोमा पाठयक्रम में entry seats भी बढ़ाई गई ।

  7. विश्वविद्यालय के सभी विभागों में National Knowledge Network के माध्यम से Internet, CERA एवं online journals की सुविधा उपलब्ध कराई गई ।

  8. स्नातकोत्तर एवं पी.एच.डी. हेतु छात्रवृत्ति योजना का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया ।

  9. पुस्तकालय विकास हेतु निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं इस वर्ष भी रू. 20 लाख मूल्य की पुस्तकें क्रय की गई ।

  10. मानव संसाधन विकास के अन्तर्गत 70 शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों को उच्च शिक्षा प्रशिक्षण हेतु भेजा गया ।

  11. विगत वर्ष विदेशी छात्र-छात्राओं का रूझान विश्वविद्यालय में अध्ययन हेतु बढ़ा है। नाइजेरिया, मलावी, इज़िप्ट, नेपाल, भूटान के विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है । इसी तारतम्य में A LCRON State University ,oa ALABAMA, A&M University, USA के साथ MOU भी हस्ताक्षर किये गये ।

अनुसंधान

  1. विगत वर्ष राज्य किस्म विमोचन समिति द्वारा गेहूँ, चना, अलसी, राई एवं कोदों की कुल 7 किस्में एवं केन्द्रीय स्तर पर गेहूँ एवं अलसी की 9 किस्में विमोचित की गई ।

  2. वर्ष 2010-11 में रू. 15.18 करोड के 26 Adhoc Projects स्वीकृत हुए ।

  3. Consultancy Processing Cell के अन्तर्गत वर्ष 2010 में रू. 74 लाख विभिन्न संस्थाओं द्वारा Product testing हेतु प्राप्त हुए ।

  4. विगत वर्ष राष्ट्रीय स्तर के Seminar Conference का आयोजन किया गया जिसमें प्रमुख रही Vegetable Biodiversity, 26th MP Young Scientist Congress, Seed business management एवं Irrigation Agriculture जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया ।

  5. वर्ष 2009.10 में 21 हजार क्विंटल प्रजनक बीज उत्पादन किया जा कि राष्ट्रीय स्तर पर 18% रहा ।

  6. RKVY, National food security mission, Horticulture mission, Bio fuel mission, Bamboo mission, Medicinal Plants mission की परियोजनाओं में विश्वविद्यालय की सहभागिता बढ़ी है ।

  7. विगत वर्ष वैज्ञानिकों ने विभिन्न परियोजनाओं के अन्तर्गत, आमेरिका, सीरिया, नेपाल, एवं मेक्सिको में विभिन्न प्रशिक्षण में भाग लिया ।

  8. व्यवसाय योजना एवं विकास इकाई (BPD) के अन्तर्गत धान की प्रजातियों की लाइसेंसिग, उद्यमियों का पंजीयन, बीज एवं औषधीय पौध-उत्पाद का प्रशिक्षण, कृषि आधारित लघु एवं मध्यम उद्योग के प्रोत्साहन हेतु परियोजनाएँ प्रस्तावित की गई ।

  9. MPWSRP परियोजना के अन्तर्गत 1000 मैदानी कार्यकर्ताओं को टिकाऊ जल उपयोग पर प्रशिक्षण, हवेली सिस्टम में भूजल रिचार्ज का आंकलन, एवं 25 लाख हैक्टर भूमि का Crop classification किया गया ।

  10. प्रदेश शासन के सहयोग से जून 16-18, 2011 में State level Workshop on Strategies for enhancing crop production and Productivity आयोजित की गई । इस कार्यशाला में 5 विभिन्न तकनिक सत्रों में गहन विचार विमर्श के पश्चात ACTION POINT चिन्हित किये गये ।

विस्तार

  1. कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से विगत वर्ष 1418 प्रशिक्षणों के अन्तर्गत 35748 कृषकों को प्रशिक्षित किया गया ।

  2. विशेष अभियान के अन्तर्गत दलहन एवं तिलहन परियोजना में 1400 कृषक परिवारों को शामिल कर 574 हैक्टर में प्रदर्शन आयोजित किये गये ।

  3. धान की उन्नत पध्दति ''श्री विधि'' का शहडोल, कटनी, सिधी, रीवा, जबलपुर, उमरिया, बालाघाट, डिंडोरी एवं मण्डला में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया जिसे किसानों ने अपना कर इन क्षेत्रों में धान उत्पादन में 25-30% बढ़ोत्री की ।

  4. सोयाबीन की मेड़-नाली पध्दति के व्यापक प्रचार प्रसार से सोयाबीन उत्पादन में आशातीत वृध्दि हुई ।

  5. कृषि विज्ञान केन्द्रों में विकसित Technology Park, Crop cafeteria एवं Diffusion model को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया ।

  6. बीज-ग्राम कार्यक्रम के अन्तर्गत कृषकों के प्रक्षेत्र पर उन्नत बीज उत्पादन प्रदेश के 20 कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से संचालित किया गया ।

  7. NAIP की Integrated Farming System परियोजना के अन्तर्गत 208 कृषकों के प्रक्षेत्र पर लाख की खेती, 4 स्टाप डेम जिसमें 172 हैक्टर में सिंचाई एवं मूर्गी पालन को प्रोत्साहित किया गया ।

  8. कृषि विज्ञान केन्द्रों में कृषकों को उन्नत किस्मों के फल वृक्ष उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मातृ वृक्षों (आम, अमरूद, सीताफल, अनार, बेर, जामुन, अंगूर आदि) के रोपण को प्रोत्साहित किया गया ।

प्रशासन

  1. शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों के CAS के अन्तर्गत 62 प्रमोशन किये गये । सीधी भरती से 16 सहायक प्राध्यापक एवं 21 प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारियों का चयन किया गया । कृषि विज्ञान केन्द्रों के 64 वैज्ञानिकों का performance के आधार पर probation period की अवधि पूर्ण होने पर नियमित किया गया ।

  2. समयमान वेतन के अन्तर्गत 64, पदोन्नति योजना के अन्तर्गत 13, एवं अनुकम्पा नियुक्ति के अन्तर्गत 6 कर्मचारियों को लाभान्वित किया गया । तृतीय एवं चतुर्थ संवर्ग के अन्तर्गत 86 कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने पर नियमित किया गया ।

  3. विश्वविद्यालय का लोक सूचना विभाग भी त्वरित गति से प्रकरण हल करने में अग्रणी रहा।

मानव संसाधन विकास

विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित अनुसंधान परियोजनाओं एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों के अंतर्गत निम्नांकित पदों को सीधी भरती द्वारा भरा गया :-

  1. अधिष्ठाता, कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय, जबलपुर     - 01

  2. वैज्ञानिक, अनुसंधान परियोजनाओं के अंतर्गत         - 17

  3. विषय वस्तु विषेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्रों के अंतर्गत    - 21

  4. कार्यक्रम सहायक, कृषि विज्ञान केन्द्रों के अंतर्गत      - 16

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा संचालित अनुसंधान परियोजनाओं, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं कृषि महाविद्यालय टीकमगढ़, एवं गंजबासौदा के अंतर्गत रिक्त पदों को भरे जाने हेतु आयोजित साक्षात्कारों का विवरण निम्नानुसार है : -

  1. प्रमुख वैज्ञानिक -01 वरिष्ठ वैज्ञानिक -05 वैज्ञानिक -02 सह प्राध्यापक-02 एवं सहायक प्राध्यापक - 02 (शस्य विज्ञान) विषय हेतु

  2. सहायक प्राध्यापक - 02 (अंग्रेजी)

  3. क्रीडा अधिकारी - 02

  4. सहायक ग्रंथपाल - 01

  5. सहायक प्राध्यापक गणित एवं सांख्यिकी -02

  6. सह प्राध्यापक-01 सहायक प्राध्यापक - 03 (पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन)

  7. सहायक प्राध्यापक - 01 (सर्जरी)

  8. सहायक प्राध्यापक - 03 (एग्रीकल्चरल बायोटेक्नालॉजी)

  9. सह प्राध्यापक-01 सहायक प्राध्यापक - 02 (प्लांट फिजियोलाजी )
    उक्त रिक्त पदों हेतु साक्षात्कार का आयोजन किया जा चुका है एवं साक्षात्कार हेतु नियत तिथि पर बुलावा पत्र भेजा गया है जिसका विवरण निम्नानुसार है।

  1. वरिष्ठ वैज्ञानिक-01, वैज्ञानिक-06, सह प्राध्यापक-01 (प्लांट पैथोलाजी)

  2. सहायक प्राध्यापक -01 (ह्यूमेन्टीज/बिजनेस मैनेजमेंट/एन्वायरमेंटल साइंस)

3- (1) सीधी भर्ती से भरे गये पदों का विवरण निम्नानुसार है : -

1

कृषि व्यय अध्ययन योजना (सी.सी.एस.) के अंतर्गत प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारियों

21

   (2) पदोन्नति योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 -2012 में निम्नलिखित संवर्ग लाभाविंत हुए

1

 सहायक यंत्री से कार्यपालन यंत्री

01

2

 उपयंत्री से सहायक यत्री

01

3

 सहायक श्रेणी -एक से अनुभाग अधिकारी

02

4

 चतुर्थ श्रेणी से सहायक श्रेणी-॥। के पद पर

16

   (3) समयमान वेतन योजना के अन्तर्गत वर्ष 2010-11 में निम्नलिखित संवर्ग लाभांवित हुए ।

1

 कृषि विस्तार अधिकारी

01

2

 प्रयोगशाला तकनिशियन

03

3

 सब-ओवरसियर

01

4

 कम्पाउन्डर

01

5

 सहायक श्रेणी -तीन

01

   (4) परिवीक्षा अवधि समाप्त की गई :-

1

 सहायक श्रेणी-॥।

07

2

 वाहन चालक

03

3

 वाहन चालक सह मैकेनिक

32

4

 प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी

06

5

 इलेक्ट्रीशियन

02

6

 प्रक्षेत्र प्रबंधक

02

    न्यायालयीन प्रकरण

माननीय उच्च न्यायालय में वर्ष 2011 के दौरान दायर किये गये कुल प्रकरणों की संख्या

69

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2011 के दौरान निर्णीत किये गये कुल प्रकरणों की संख्या

15

माननीय उच्च न्यायालय में वर्ष 2011 के लम्बित प्रकरणों की संख्या

54

लोक सूचना का अधिकार

लोक सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत विभाग में लोक सूचना अधिकारी के पास 110 आपत्तियां दर्ज हुई उक्त में 106 निराकृत की गई, अपीलीय अधिकारी लोक सूचना के पास 19 आपत्तियां दर्ज हुई। समस्त आपत्तियों का समय सीमा में निराकरण किया गया।

मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग

मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग भोपाल में 5 प्रकरण प्रस्तुत किये गये जो निराकृत हुये। माननीय मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में वर्ष 11-12 में कोई भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ।

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने इस वर्ष 131 विज्ञप्तियां समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया हेतु प्रकाशन एवं प्रसारण हेतु प्रेषित की गई, इसी प्रकार विगत वर्षो की अपेक्षा इस बार 143 विभिन्न प्रकार के विज्ञापन समाचार पत्रों को प्रेषित किये गये जो कि निर्माण, शिक्षा और साक्षात्कार आदि से संबंधित थे।

वित्तीय संसाधन

विश्वविद्यालय का वर्ष 2011-12 का प्रारंभिक शेष 14,65,097.00 से प्रारंभ हुआ था। राज्य शासन द्वारा चालू वर्ष में समय पर अनुदान उपलब्ध कराने के कारण विश्वविद्यालय की आर्थ्ािक स्थिति सामान्यत: संतोषप्रद है। शासन द्वारा वर्ष 2011-12 के माह फरवरी 2012 तक निम्नानुसार अनुदान उपलब्ध कराया गया :-

 

स.क्र.

लेखा शीर्ष

2011-12 के लिये प्रस्तावित राशि

फरवरी 2012 तक स्वीकृत राशि

1.

कृषि आयोजनेत्तार

29,00,00,000

19,00,00,000

2.

कृषि आयोजना

10,00,00,000

8,00,00,000

3.

आदिवासी उपयोजना

5,00,00,000

4,00,00,000

4.

विशेष घटक योजना

5,00,000

5,00,000

 

योग

44,05,00,000

31,05,00,000

वित्ताीय वर्ष 2011-12 में विश्वविद्यालय ने अपने संसाधनों से आय के स्त्रोतों में वृध्दि की है।

अनुसंधान सेवाएं

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के अंतर्गत मध्यप्रदेश के निम्ललिखित जलवायु क्षेत्रों में स्थित 12 अनुसंधान केन्द्रों के माध्यम से प्रत्येक कृषि जलवायु क्षेत्र में अधिकतम उत्पादन एवं कृषि क्षेत्र से आय में वृध्दि हेतु कृषि तकनीकियों के अन्वेषण के लिये संचालित अनुसंधान परियोजनाओं में प्रतिवर्ष विभिन्न विषयों पर अनुसंधान कार्य किये जाते हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर वर्ष 2011-12 में 40 अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परियोजनाओं के अलावा भारत सरकार/मध्यप्रदेश शासन की विभिनन संस्थाओं/अंर्तराष्ट्रीय सहयोग से चल रही/स्वीकृत 59 तदर्थ परियोजनाओं के अंतर्गत विभिन्न अनुसंधान कार्य किये जा रहे हैं।

कृंषि जलवायु अंचल

  1. छत्तीसगढ़ का मैदान (बालाघाट जिला)

  2. छत्तीसगढ़ की उत्तरी पहाड़ियाँ (मंडला, डिन्डौरी, शहडोल, अनूपपुर एवं उमरिया जिले)

  3. कैमोर का पठार एवं सतपुड़ा की पहाड़ियाँ (जबलपुर, कटनी, पन्ना, रीवा, सीधी, सिंगरौली एवं सतना जिले)

  4. विन्ध्य का पठार (सागर, दमोह, रायसेन तथा विदिशा जिले)

  5. मध्य नर्मदा घाटी (नरसिंहपुर, होशंगाबाद एवं हरदा जिले)

  6. बुन्देलखण्ड अंचल (टीकमगढ़ एवं छतरपुर जिले)

  7. सतपुड़ा का पठार (बैतूल एंवं छिन्दवाड़ा जिले)

कृषि अनुसंधान केन्द्र ऑचलिक अनुसंधान केन्द्र

क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र

कृषि अनुसंधान केन्द्र

जबलपुर

रीवा

नवगॉव (छतरपुर)

पवॉरखेड़ा

सागर

गढ़ाकोटा (सागर)

छिन्दवाड़ा

वरासिवनी

तेंदनी (बालाघाट)

टीकमगढ़

डिन्डौरी

सौंसर (बालाघाट)

वर्ष 2011-12 के दौरान विमोचित फसलों की नई किस्में
    1- कोदों (डी.पी.एस. 91) 2. चरी राइस बीन जे. आर बी. (जे. ओ 5-2)
     
वर्ष 2011-12 के दौरान स्वीकृत तदर्थ अनुसंधान परियोजनायें

  1. डेवलपमेंट ऑफ ट्रान्सजेनिक ओट (ऐविना सेटाइवा) ओवर एक्सप्रेसिंग फंगल फाइटेज जीन. मध्यप्रदेश विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी परिषद् भोपाल द्वारा राशि 7.98 लाख रूपये हेतु स्वीकृत ।

  2. मॉलीकुलर ब्रीडिंग सिलेक्सन स्टे्रटेजिज टू कम्बाइन एन्ड वेलिडेट क्यू. टी. एल. फॉर इन्प्रूविंग डब्लू. यू. ई. एन्ड हीट टॉलरेन्ट इन व्हीट. सिमिट मैक्सिको के वित्तीय सहयोग से डेयर नई दिल्ली द्वारा 67505 डालर हेतु स्वीकृत परियोजना।

  3. स्टडी ऑन एग्री-बिजनेस. अंर्तराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान भारत सरकार के वित्तीय सहयोग द्वारा राशि 2.41 लाख रूपये हेतु स्वीकृत परियोजना।

  4. यूज ऑफ माइक्रोब्स फॉर प्लांट प्रोटेक्शन एन्ड न्यूटीऐंट्स मैनेजमेंट इन इनक्रीजिंग क्रॉप प्रोडक्टीविटी। मण्डी बोर्ड मध्यप्रदेश द्वारा राशि 697.68 लाख रूपये हेतु स्वीकृत परियोजना।

  5. कोलोबोरेटिव हाइब्रिड मेज एवोलूयेशन ट्रायल. सिमिट संस्थान मैक्सिको के वित्तीय सहयोग संचालित परियोजना राशि 2.50 लाख।

  6. नेशनल इनीसिऐटिव्स ऑन क्लाइमेट रेसिलीऐंट एग्रीकल्चर (नीक्रा) रियल टाइम्स पेस्ट सर्वेलेंसेंस इन पीजन-पी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि 5.00 लाख।

  7. सिलेक्सन एन्ड यूटीलाइजेशन ऑफ वाटर लॉगिंग टॉलरेंन्ट कल्टीवर्स इन पीजन पी. भारत सरकार एवं इक्रीसेट हैदराबाद, सहायतित परियोजना राशि 68.53 लाख।

  8. स्ट्रेस टॉलरेन्स राइस फॉर अफ्रीका (स्ट्रासा)। इंटरनेशनल राइस रिसर्च इन्सटीटयूट फिलीपीन्स एवं भारत सरकार सहयोग परियोजना।

  9. रिवेलोराइजिंग स्माल मिलेट्स इन रेनफेड रीजन्स ऑफ साउथ एशिया। धान फाउन्डेशन मदुरै (तामिलनाडू) निजी संस्थान के वित्तीय सहयोग द्वारा राशि 6.40 लाख।

  10. क्लाइमेट चेंज एन्ड लाख क्रॉप परफार्ममेंन्स एट जबलपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि 5.50 लाख।

  11. ट्राइबल सीड प्राजेक्ट (टी.एस.पी.) भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि 4.00 लाख अवधि।

  12. इस्टाब्लिसमेंट ऑफ मदर प्लांट नर्सरीज फार हाई पेडीग्री प्लांटिंग मैटेरियल ऑफ फ्रूट क्राप्स।भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि 42.62 लाख।

  13. मैक्सीमाइजेशन ऑफ सोयाबीन प्रोडक्सन इन मध्यप्रदेश जापान इंटरनेशनल को-आपरेशन एजेन्सी, जापान के सहयोग से संचालित परियोजना राशि 15.00 लाख।

  14. ड्राइंग एन्ड डिहाईड्रेशन कैरेटरस्टिक्स एन्ड पोटेन्शियल फॉर वेल्यू एडीसन इन अंडर यूटीलाइज्ड ऐज वेल ऐज कार्मशियली इर्म्पोटेन्ट फू्रट्स एन्ड वेजीटेबल्स ऑफ एम.पी. मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी परिषद् भोपाल द्वारा स्वीकृत परियोजना राशि रूपये 4.36 लाख ।

परामर्शदात्री सेवाऐं प्रकोष्ठ

संचालनालय अनुसंधान सेवाऐं के अंतर्गत कन्सल्टेंसी प्रोसेसिंग सेल (परामर्शदात्री सेवाऐं प्रकोष्ठ) द्वारा विभिन्न निजी कम्पनियों संस्थानों के उत्पादन का परीक्षण किया गया जिसमें खाद, बीज, उर्वरक, कीटनाशक पौधवर्धक, खरपतवार नाशक एवं अन्य कृषि उत्पाद) का परीक्षण किया गया जिससे विश्वविद्यालय को वर्ष 2011-12 में 86.24 लाख रूपयों की आय अर्जित हुई।

प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी

  1. सब्जियों में जैव विविधिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दिनाँक 4-5 अप्रैल 2011

  2. फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृध्दि हेतु रणनीति पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन दिनॉक 16-18 जून 2011

  3. गन्ना उत्पादक कृषकों, गन्ना वैज्ञानिकों, शासकीय अधिकारियों एवं शक्कर उद्योग के प्रतिनिधियों के इंटरफेस बैठक का आयोजन दिनॉक 30.9.2011

  4. मध्य क्षेत्र में गेंहॅू की उत्पादकता बढ़ाने हेतु रणनीति तथा गेरूआ प्रबंधन पर समीक्षा बैठक का आयोजन दिनाँक 24.10.2011

बिजनेस प्लानिंग एन्ड डेवलपमेंट परियोजना (बी. पी. डी. स्कीम) की उपलब्धियाँ
विश्वविद्यालय द्वारा अन्य संस्थानों के साथ सहमति ज्ञापन (एम.ओ.यू.)

      संकर धान प्रजाति जे. आर. एच. 5 एवं जे. आर. एच. 8 के व्यवसायीकरण के लिये निम्न लिखित कंपनियों के साथ सहमति ज्ञापन (मेमोरेन्डम ऑफ अंडरस्टेडिंग) पर हस्ताक्षर किये गये।

  1. विभा एग्रोटेक लिमिटेड दिनाँक 21 नवम्बर 2011

  2. दन्तीवाड़ा सीड प्राइवेट लिमिटेड दिनाँक 22 नवम्बर 2011 को

  3. अजीत सीड्स लिमिटेड दिनॉक 9 जनवरी 2012

  4. त्रिमूर्ती प्लान्ट साइंस दिनॉक 8 फरवरी 2012

  5. नवोन्मेशी कृषि तकनीकी के विकास एवं विस्तार के लिये मेसर्स महिन्द्र एन्ड महिन्द्रा के साथ अभिनव खेती प्रौद्यौगिकी (आई. एफ. टी) विकास और प्रसार हेतु सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये।

  6. मध्यप्रदेश में एम. पी. डी. पी. आई. पी. अंतर्गत पाँच कृषक प्रोडयूसर कम्पनियों की विस्तृत परियोजना संवाद (डी. पी. आर.) बनाने के लिये करारनामा।

विस्तार सेवायें
मानव संसाधन विकास

  1. कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों को संचालनालय विस्तार सेवायें में 08 कार्यक्रम आयोजित कर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया ।

  2. संचालनालय विस्तार सेवायें द्वारा कृषि उत्पादन की नई तकनीकियों पर तीन दिवसीय एवं पॉच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किये गये जिसमें म.प्र. शासन के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के कृषि विकास अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया ।

एग्रोपीडिया पर प्रशिक्षण

  • दिनांक 2.11.2011 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर द्वारा एग्रोपीडिया पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालनालय विस्तार सेवायें, ज.ने. कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित किया गया ।
    कृषि विज्ञान केन्द्र

  • मध्य प्रदेश के 50 जिलों में से 25 जिले जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में आते हैं, जिनमें 23 जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र कार्यरत हैं, विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न जिलों छिंदवाड़ा, सीधी, शहडोल, सिवनी, टीकमगढ़, बालाघाट, बैतूल, पन्ना, डिंडोरी, रीवा, जबलपुर, होशंगाबाद, सागर, हरदा, दमोह, कटनी, छतरपुर, मंडला, उमरिया एवं नरसिंहपुर में कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित है । 2 जिलों रायसेन एवं सतना में गैर शासकीय संस्था के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित हैं। ये केन्द्र जिलों की तकनीकी आवश्यकता को आंकते हैं, तकनीकी का पुनर्निर्धारण व मानकीकरण करते हैं ।

कृषि विज्ञान केन्द्रों की आंचलिक कार्यषाला

  • कृषि विज्ञान केन्द्रों की आंचलिक कार्यशाला जो 5-8 मई 2011 को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित था, विश्वविद्यालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि विज्ञान कन्द्रों ने भागीदारी की तथा अपनी उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया ।

कृषि विज्ञान केन्द्रों का राष्ट्रीय सम्मेलन

  • कृषि विज्ञान केन्द्रों का छटवा राष्ट्रीय सम्मेलन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहयोग से दिनांक 03 से 05 दिसम्बर 2011 को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित किया गया, जिसका उद्धाटन माननीय कृषि मंत्री भारत सरकार श्री शरद पवार ने किया जिसमें देषभर के 600 कृषि विज्ञान केन्द्रों के 1200 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया इसके अतिरिक्त कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, संचालक विस्तार शिक्षा एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं उप महानिदेशकों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये ।

कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केन्द्र

कृषकों को उन्नत तकनीकों, उन्नत उपकरण इत्यादि की जानकारी एकल-वातायन से प्राप्त हो सके इस हेतु कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केन्द्रों की स्थापना हुई है । इसके लिये अलग से एक भवन में कृषि विशेषज्ञों की विभिन्न सेवायें लगातार उपलब्ध कराई गई है ।

मुद्रण व इलेक्ट्रानिक माध्यमों का प्रयोग

''कृषि विश्व'' विश्वविद्यालय संचार केन्द्र में नियमित रूप से प्रकाशन किया जाता है । वर्ष 2011 में ''कृषि विष्व'' एवं अन्य पत्रिकाएं प्रकाषित हुई । प्रत्येक अनुसंधान केन्द्र तथा कृषि विज्ञान केन्द्र अपने-अपने क्षेत्र के लिये उपयोगी कृषि तकनीक को ''तकनीकी बुलेटिन'' के रूप में प्रकाषित करता है । आकाषवाणी से वर्ष 2011 के अनुषंसित कार्यक्रम अनुसार 52 आकाषवाणी वार्ता की रिकाडिंग संचार केन्द्र में की गई, जिनका प्रसारण आकाषवाणी, जबलपुर से प्रति सोमवार शाम 7:20 से 8:00 बजे तक ''कृषि विश्वविद्यालय से खेतों तक'' कार्यक्रम में किया जाता है ।
 
किसान कॉल सेन्टर

किसान काल सेन्टर के माध्यम से कृषकों द्वारा कृषि से संबंधित पूछे गये सभी सवालों का उचित जबाव एवं सुझाव विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के द्वारा देकर सन्तुष्ट किया गया।

प्रक्षेत्र गतिविधिया

ब्रीडर (प्रजनक) बीज उत्पादन खरीफ 2011 का संक्षिप्त विवरण

क्रमांक

फसल

कुल प्रजाति

उत्पादन (क्ंवि)

1.

सोयाबीन

4

2098.38

2.

अरहर

4

73.00

3.

धान

16

4459.50

4.

रामतिल

3

16.20

5.

कोदो

3

8.12

6.

कुटकी

5

10.04

7.

मक्का

1

51.00

8.

तिल

3

15.88

9.

मूंग

5

77.50

10.

उड़द

2

4.90

 

कुल योग

46

6814.52

रबी 2011-12

क्रमांक

फसल

कुल प्रजाति

अनुमानित उत्पादन (क्ंवि)

1

गेहॅू

21

14155.00

2

जौ

2

115.00

3

चना

12

4984.00

4

सरसों

2

90.00

5

रामतिल

2

18.00

6

अलसी

4

39.00

7

मसूर

1

190.00

8

बरसीम

2

46.00

9

जई

2

144.00

10

मटर

4

236.00

 11

मक्का

6

68.00

 

कुल योग

58

20085.00

शिक्षण गतिविधिया

  1. स्नातकोत्तर एवं विद्या वाचस्पति (पी0एच0डी)

    विगत वर्ष की भॅति इस वर्ष भी स्नातकोत्तर (एम0एस0सी0) एवं पी0एच0डी0 के 14 विभिन्न विषयों के छात्रों को प्रवेश दिया गया । कृषि संकाय में 270 एवं कृषि अभियांत्रिकी संकाय में 46 छात्र छात्राओं को प्रवेश दिया गय

  2. राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से अनुबंध

    इस विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार के कार्यो को गति देने के लिये निम्न संस्थाओं से अनुबंध किया गया :-
        एलकानर्र युनिवर्सिटी, अमेरिका ।
        नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर साइट््रस नागपुर ।
        जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड जलगांव ।
        एलवामा युनिवर्सिटी एएण्ड एम युनिवर्सिटी संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ।

संकाय

  1. उद्यानिकी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान, गढाकोटा जिला-सागर में दो वर्षीय उद्यानिकी पत्रोपाधि पाठयक्रम में 11-12 में प्रवेश हेतु सीटाें की संख्या 50 से बढ़ाकर 80 कर दी गई

कृषि अभियांत्रिकी

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की पॉच अखिल भारतीय समन्वित परियोजना महाविद्यालय में संचालित है जिनमें संतोषजनक उपलब्धियॉ मिली है।

  • मौसम आधारित योजना भौतिकी विभाग में संचालित है जिसके माध्यम से मौसम की अग्रिम जानकारी संचार माध्यमों से प्रसारित होती है। जिसके द्वारा कृषक लाभान्वित हो रहे है।

ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE)

इस कार्यक्रम के अंतर्गत छ: माह की अवधि के लिये बी.एस.सी. कृषि एवं बी.एस.सी. (वानिकी) के चतुर्थ वर्ष के 238 छात्र-छात्राओं को विभिन्न आंचलिक अनुसंधान केन्द्रों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों के मार्गदर्षन में स्थानीय कृषकों के प्रक्षेत्र पर कृषि के व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करने हेतु पदस्थ किया गया ।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर की स्थापना दिनांक 19 अगस्त, 2008 को हुई है। विश्वविद्यालय में संस्था प्रमुख कुलपति के पद के अतिरिक्त कार्य संपादन के लिये कुलसचिव, लेखानियंत्रक, अधिष्ठाता कृषि संकाय, संचालक अनुसंधान विस्तार, शिक्षण एवं अन्य पद को तालिका-1 में अंकित है, म.प्र. शासन द्वारा स्वीकृत किये गये है । स्वीकृत पदों में कुलपति के अलावा लेखानियंत्रक का पद भरा हुआ है । शेष पदों को भरे जाने की प्रक्रिया प्रचलन में है। प्रदेश के महाविद्यालय एवं क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, आंचलिक अनुसंधान केन्द्र एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, जो इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत् कृषि जलवायु क्षेत्र में संचालित है, कृषि शिक्षा अनुसंधान एवं विस्तार का कार्य संपादित कर रहे है
विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत 04 कृषि महाविद्यालय, 01 उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर, 05 आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र, 04 क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, 01 कृषि अनुसंधान केन्द्र, बागवई, ग्वालियर, 01 फल अनुसंधान केन्द्र, ईंटखेड़ी, भोपाल, 01 उद्यानिकी अनुसंधान केन्द्र, जॉवरा (रतलाम), 01 लवणीय प्रभावित मृदा कृषि अनुसंधान केन्द्र, बड़वाह, खरगोन एवं 19 कृषि विज्ञान केन्द्र जो प्रदेश के 25 जिलों में विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में कार्यरत् है ।

तालिका 1: राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय हेतु नवीन स्वीकृत प्रशासनिक एवं कृषि संकाय के पद

क्र.

 पदनाम

स्वीकृत

भरे

रिक्त

1

कुलपति

1

1

-

2

कुलसचिव

1

-

1

3

लेखानियंत्रक

1

1

-

4

अधिष्ठाता कृषि संकाय

1

1

-

5

संचालक, शिक्षण एवं छात्र कल्याण

1

1

-

6

संचालक अनुसंधान सेवायें

1

1

-

7

संचालक विस्तार सेवायें

1

1

-

8

प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष

12

3

9

9

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं केन्द्र प्रभारी

1

-

1

10

सूचना एवं जन सम्पर्क अधिकारी

1

-

1

11

कार्र्यपालन यंत्री (सिविल)

1

-

1

12

संयुक्त संचालक विस्तार

1

-

1

13

विश्वविद्यालय ग्रंथपाल

1

-

1

14

सह संचालक अनुसंधान (अनु., बीज उत्पादन एवं प्रक्षेत्र विकास)

2

1

1

15

सहप्राध्यापक (तकनीकी अधिकारी)

1

-

1

16

उप संचालक विस्तार (सी.एस. एवं पी.पी.)

2

1

1

17

उप संचालक (छात्र कल्याण/सांस्कृतिक एवं क्रीडा)

2

-

2

18

उप संचालक अनुसंधान (कृषि, पशु वि., कृषि अ)

3

1

2

19

उप कुलसचिव (स्था./शिक्षण)

2

-

-

20

उप लेखानियंत्रक

1

-

-

21

तकनीकि अधिकारी (DRS)

1

-

1

22

तकनीकि अधिकारी (संचालक प्रसार सेवाएें)

1

1

-

23

विषय वस्तु विशेषज्ञ

7

6

1

24

सहायक कुलसचिव (स्था./शिक्षण/सामान्य/विधि)

4

-

4

25

सहायक लेखानियंत्रक

3

-

3

26

सहायक लेखा अधिकारी

1

-

1

27

निज सचिव

7

2

5

28

कनिष्ठ शीघ्र लेखक (हिन्दी/अग्रेंजी)

24

-

24

29

अनुभाग अधिकारी

10

-

10

30

सहायक ग्रंथपाल

2

2

-

31

तकनीकी सहायक ग्रंथपाल

2

-

2

32

तकनीकि सहायक (IPRO)

2

-

2

33

सहायक यंत्री (1 इलेक्ट्रीकल+2 सिविल)

3

-

3

34

उप यंत्री (2 इलेक्ट्रीकल+8 सिविल)

10

2

8

35

सहायक श्रेणी-1

11

-

11

36

सहायक श्रेणी-2

16

4

12

37

सहायक श्रेणी-3

53

7

46

38

स्टोर कीपर (केन्द्र+विक्रय केन्द्र)

2

-

2

39

कम्प्यूटर प्रोग्रामर

1

1

-

40

कम्पयूटर आपरेटर

4

-

4

41

रेडियो अधिकारी

1

-

1

42

सेनेटरी इंस्पेक्टर

1

-

1

43

इलेक्ट्रीशियन

1

-

1

44

फोटोग्राफर

1

-

1

45

मानचित्रकार

1

-

1

46

सुपरवाईजर (मुद्रण प्रोद्योगिकी)

1

-

1

47

प्रूफ रीडर (Journalist Dipl.)

1

-

1

48

आफसेट मशीन आपरेटर

1

-

1

49

वाइन्डर

1

-

1

50

प्लम्बर

1

-

1

51

कारपेन्टर

1

-

1

52

मेसन

2

-

2

53

पम्प अटैन्डेन्ट

2

-

2

54

वाहन चालक

18

-

18

55

भृत्य/चौकीदार

46

-

46

56

ग्रंथपाल परिचारक/भृत्य

2

-

2

57

लायब्रेरी सार्टर

1

-

1

58

ग्राउण्ड मेन

1

-

1

59

हेल्पर

2

-

2

60

क्लीनर

1

-

1

 

योग:-

287

39

248

वर्ष 2011-12 से विश्वविद्यालय द्वारा कृषि संकाय के अंतर्गत 07 एवं उद्यानिकी के अंतर्गत 04 विषयों में स्नातकोत्तर कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। साथ ही नौ विषयों में पी.एच.डी. कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं।

1. शैक्षणिक गतिविधियां
(+) कृषि एवं उद्यानिकी

विश्वविद्यालय के वर्ष 2008 के स्थापना से ही शिक्षण कार्य निरंतर प्रगति पर अग्रेषित है। इस विश्वविद्यालय द्वारा कृषि तथा उद्यानिकी में स्नातक, एवं स्नातकोत्तर एवं पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्रदान करने का प्रावधान है।

वर्तमान में विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि संकाय कार्यरत है। इस संकाय में अलग-अलग विभाग है। प्रत्येक विभाग के प्रमुख विभागाध्यक्ष होते है। कृषि संकाय में 12 विभाग है। कृषि संकाय के अंतर्गत 4 कृषि महाविद्यालय (ग्वालियर, सीहोर, इन्दोर, तथा खंडवा) एवं 1 उद्यानिकी महाविद्यालय (मंदसौर) विद्यमान है।

वर्तमान में विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि संकाय कार्यरत है। इस संकाय में अलग-अलग विभाग है। प्रत्येक विभाग के प्रमुख विभागाध्यक्ष होते है। कृषि संकाय में 12 विभाग है। कृषि संकाय के अंतर्गत 4 कृषि महाविद्यालय (ग्वालियर, सीहोर, इन्दोर, तथा खंडवा) एवं 1 उद्यानिकी महाविद्यालय (मंदसौर) विद्यमान है।

अन्य गतिविधियां
प्लेसमेंट

विश्वविद्यालय में स्थापित प्लेसमेंट सेल के माध्यम से 243 विद्यार्थियों का चयन हुआ।
विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों का व्याख्यान
विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय में समय-समय पर भ्रमण किया तथा महत्वपूर्ण व्याख्यान दिये।

अनुसंधान

अनुसंधान, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर का एक प्रमुख कार्य है इसलिए निदेशालय अनुसंधान सेवाएं की स्थापना इस विश्वविद्यालय में चल रही विभिन्न परियोजनाओं के समन्वयन हेतु, बीज/फसल किस्मों के पहचान हेतु, नई परियोजनाओं द्वारा कृषकों एवं कृषि से जुडे आमजन को लाभान्वित करने हेतु व विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, संगोष्ठी द्वारा नई तकनीकी व सूचनाओं का प्रसार करने हेतु की गई है। इस निदेशालय के अंर्तगत निम्न केन्द्र कार्यरत्त है -

आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र (5)
         मुरैना, खरगोन, झाबुआ, सीहोर, इन्दौर
क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र (4)
         उज्जैन, ग्वालियर, मन्दसौर खण्डवा
कृषि/उद्यानिकी अनुसंधान केन्द्र (6)
         फल अनुसंधान केन्द्र, ईटखेड़ी (भोपाल), उद्यानिकी अनुसंधान केन्द्र, जावरा (रतलाम)
         कृषि अनुसंधान प्रक्षेत्र, बागवई (ग्वालियर), कृषि अनुसंधान केन्द्र, बड़वाह (खरगोन)
         तिल अनुसंधान केन्द्र, भिण्ड़, बीज प्रगुणन प्रक्षेत्र, सिरसौद

 

बाह्य वित्तीय स्रोतों से स्वीकृत तदर्थ (एडहॉक) अनुसंधान परियोजनाएं

विश्वविद्यालय को इस वर्ष बाह्य वित्तीय स्रोतों से 978.53 लाख रुपये की अनुसंधान परियोजनाएं स्वीकृत हुई। जिनमें कृषि अर्थव्यवस्था की निगरानी हेतु संकाय, मध्यप्रदेश में डबल डॉलर चने के प्रतिस्थापन हेतु तकनीकी का वैधीकरण, तिल की स्थानीय प्रजातियों का संग्रहण, मूल्यांकन, संरक्षण एवं उपयोग, अरहर की नई संकर प्रजातियों के बेहतर कृषि आधार हेतु कोशिकीय द्रव्य नरबंध्य पंक्ति का विकास एवं स्थानांतरण, जागरुकता सह निगरानी कार्यक्रम पर अग्रणी परियोजना, चारा विकास कार्यक्रम, प्रक्षेत्र पर अनुसंधान एवं बीज उत्पादन हेतु अद्योसंरचना का विकास एवं नवीनीकरण, मध्य भारत की उच्च क्षरणीय बीहड़ों में जलवायु सहनषील कृषि हेतु प्रभावी एकीकृत घटकों की पहचान एवं कार्बन का अधिग्रहण आदि प्रमुख है ।

परामर्श प्रक्रिया प्रकोष्ठ

बाहय वित्त पोषित अनुसंधान परियोजनाओं के अतिरिक्त विश्वविद्यालय को इस वर्ष परामर्श प्रक्रिया प्रकोष्ठ द्वारा गेंहू, सोयाबीन, कपास, अफीम, चना, सरसों, टमाटर, मिर्च, अंगूर, केला एवं मूंगफली आदि फसलों पर परीक्षण अनुसंधान के लिये 44 कम्पनियों से रू. 170.50 लाख की राशि प्राप्त हुई।

नवीन विकसित तकनीक
i. जनन द्रव्यों का पंजीकरण

विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 10 फसलों की 15 प्रजातियों का पंजीकरण राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली में कराया गया। जहां से प्रत्येक जननद्रव्य को राष्ट्रीय पहचान संख्या प्रदान की गई। जो निम्नानुसार है -

Crop

Varieties

National Identity

Pigonpea

Parents of CMS based hybrid RVICPH 2671

IC587378

RVA 28

IC587379

Chickpea

RVKG 101

IC587380

RVSJKG 102

IC587381

RVG 201

IC587382

RVC 202

IC590133

RVS 203

IC590134

Soybean

RVS 2001-04

IC587383

Wheat

RVW 4106

IC587060

Safflower

RVS 113

IC587061

Lentil

RVL 31

IC587062

Safed musli

RVSM 414

IC587063

Ashwagandha

RVA 100

IC587064

Kalmegh

RVK 1

IC587065

Sarpgandha

RVSP 1

IC587066


ii
किस्मों की अधिसूचना

विभिन्न फसलों की उपरोक्त किस्में, जो मध्यप्रदेश किस्म विमोचन समिति द्वारा दिनांक 10 दिसम्बर 2010 की बैठक में विमोचित की गई थी उन्हें उनके पंजीयन उपरांत संचानालय (कृषि) माध्यम से उपआयुक्त (गुणवत्ता नियंत्रण), कृषि एवं सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय, शास्त्री भवन, नई दिल्ली को अधिसूचना हेतु भेजा गया।

iii  विश्वविद्यालय द्वारा विमोचित एवं अधिसूचित प्रजातियों का पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, भारत सरकार, नई दिल्ली में दस्तावेजीकरण

विश्वविद्यालय द्वारा विकसित गेंहू की एम.पी. 4010 एवं आर. व्ही.डबलू 4106, तौरिया एवं सरसों की जवाहर तोरिया 1, जे.एम. 1, जे.एम. 2, जे.एम. 3 एवं जे.एम. 4, बाजरा की जे.बी.व्ही. 2, जे.बी.व्ही. 3 एवं जे.बी.व्ही. 4, सोयाबीन की जे.एस. 335 एवं आर.व्ही.एस. 2001-4, कपास खण्ड़वा 2, खण्ड़वा 3, जवाहर कपास 4, जवाहर ताप्ती, जे.के. 5, जे.के.एच.वॉय 1, जे.के.एच.वॉय 3, जे.सी.सी. 1 एवं विक्रम एवं ज्वार की जवाहर ज्वार 741, जवाहर ज्वार 938, जवाहर ज्वार 1041, जवाहर ज्वार 1022, सी.एस.एस. 18 किस्मों को अनुसंधान निदेशालय द्वारा दस्तावेजीकरण हेतु पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, भारत सरकार, नई दिल्ली में भेजा गया।

iv बीहड़ अनुसंधान परियोजना का शुभारंभ
बीहड़ अनुसंधान परियोजना के कार्यक्रम हेतु ग्राम ऐसाह, जनपद पंचायत अम्बाह जिला मुरैना में 119.28 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्राप्त कर अनुसंधान कार्य प्रारंभ किया जा चुका है।

v  मध्यप्रदेश के नीमच एवं मंदसौर जिलों में भूगर्भ जल एवं लवणीय मृदाओं का सर्वेक्षण एवं श्रेणीकरण
अखिल भारतीय समन्वित लवणीय मृदाओं का प्रबंध एवं लवणीय जलों का कृषि में उपयोग परियोजना के अंतर्गत नीमच जिले में 405 भूगर्भ जलों तथा मंदसौर जिले में लवणीय मृदाओं के नमूने एकत्रित किये गये व उन नमूनों के आधार पर रिमोट सेंसिंग एवं भोगोलिक पहचान प्रणाली की सहायता से भूगर्भ जल गुणवत्ता एवं मृदाओं का मानचित्र तैयार किया गया।

vi. अरहर में फॉइटोफ्थोरा झुलसा के जंगली प्रतिरोध स्त्रोत
अरहर में फॉइटोफ्थोरा झुलसा रोग के प्रतिरोधक स्त्रोत हेतु 4 जंगली प्रजातियों
Cajanus albicans, Cajanus platycarpus, Cajanus scaravaeoides and Rhyncosia bracteata का मूल्यांकन किया गया जिसमें Cajanus platycarpus इस बीमारी के प्रति असंक्रमित पाई गयी।

vii. असिंचित क्षेत्रों हेतु चना आधारित फसल प्रणाली
लगातार तीन वर्ष तक एकीकृत पादप पोषक तत्व प्रबन्धन के साथ असिंचित चना आधारित फसल प्रणाली के पहचान हेतु किये गये परीक्षण परिणामों से स्पष्ट है कि सोयाबीन-गेंहूॅ (प्रथम वर्ष)-सोयाबीन-चना (द्वितीय वर्ष) फसल प्रणाली में 20:17:20:20 के अनुपात में नत्रजन, फास्फोरस, पोटास एवं सल्फर प्रति हे. के प्रयोग से सर्वाधिक उपज प्राप्त होती है जो कि वर्मीकम्पोस्ट (2 टन प्रति हे.) + जैव उर्वरक के उपयोग से सार्थक रूप से अधिक पाई गई।

viii. चना में नये रोगकारक की पहचान
सोयाबीन-चना फसल प्रणाली में नया रोगकारक देखा गया जो चने की फसल को प्रभावित करता है। इस रोगकारक की पहचान
Colletotricum dematium के रुप में की गई। यह रोगकारक चने की उकठा अवरोधक प्रजाति जे.जी. 315 की उपज में 40 से 50 प्रतिशत तक की हानि पहुँचाता है।

ix. चना के उकठा निरोधक नवीन जीन रूपों की पहचान
चना की आई.पी.सी. 2005-79, जे.जी. 923974, आई.सी. 552241, जी.जे.जी. 0920, आई.पी.सी. 09-160, आई.पी.सी.के. 09-85, फूले 0302-7, जे.जी. 14 और आई.पी.सी. 2006-84 जीनोटाइप्स उकठा रोग के प्रति अवरोधी पाई गईं।

x. बाजरा की संकर प्रजातियों की उपज का ऑकलन
एकल संकर वाली बाजरा की 48 संकर किस्मों के उपज परीक्षण में चार संकर किस्में (93222, × डी.पी.आर.-42, 96222
× 11719, 863 × डी.पी.आर -10 और 96222 × जी.बी.आई-75) अधिक उपज वाली पाई गईं।

xi. अरहर में जीवद्रव्य नरबन्धयता एवं रेस्टोरर जीन रूपों की पहचान
अरहर में जीवदृव्य नरबन्धयता आधारित संकर किस्मों के विकास हेतु 20 नये जीवद्रव्य नरबन्धयता तथा उनके रेस्टोरर जीन रूपों की पहचान की गई। इन जीन रूपों से अत्यधिक संकर ओज प्राप्त हुआ। उक्त जीन रूपों से जीवद्रव्य नरबन्धय जी.टी. 33, जी.टी. 288ए. जी.टी. 289ए, आई.सी.पी.ए. 2039, आई.सी.पी.ए. 2042, आई.सी.पी.ए. 2043, आई.सी.पी.ए. 2046, आई.सी.पी.ए. 2047, आई.सी.पी.ए. 2048, आई.सी.पी.ए. 2050, आई.सी.पी.ए. 2052, आई.सी.पी.ए. 2078, आई.सी.पी.ए. 2079, आई.सी.पी.ए. 2086, आई.सी.पी.ए. 2089, आई.सी.पी.ए. 2092, आई.सी.पी.ए. 2098, जे.पी.ए. 1, जे.पी.ए. 2, जे.पी.ए. 3 एवं रेस्टोरर जीन रूप आई.सी.पी.आर. 3462, आई.सी.पी.आर. 3464, आई.सी.पी.आर. 2740, आई.सी.पी.आर. 3477, आई.सी.पी.आर. 3491, आई.सी.पी.आर. 3461, आई.सी.पी.आर. 3462, आई.सी.पी.आर. 3471, आई.सी.पी.आर. 3473, आई.सी.पी.आर. 3341, आई.सी.पी.आर. 3472, आई.सी.पी.आर. 3340, आई.सी.पी.आर. 3359, आई.सी.पी.आर. 3394, आई.सी.पी.आर. 3497, आई.सी.पी.आर. 3933, आई.सी.पी.आर. 3381, आई.सी.पी.आर. 2438, आई.सी.पी.आर. 3337, आई.सी.पी.आर. 2751 संरक्षित किये जा रहे हैं।

xii.
अरहर की नवीन संकर प्रजातियों की पहचान
अरहर की नवीन जीव द्रव्य नरबध्यता वाली संकर किस्मों के परीक्षण प्रयोग में 35.2 प्रतिशत का सर्वाधिक संकर ओज एक संकर आई.सी.पी.एच. 3461 से प्राप्त हुआ। आई.सी.पी.एच. 3494 एवं आई.सी.पी.एच. 3491 उपज में क्रमश: दूसरे एवं तीसरे स्थान पर थे।


xiii. सोयाबीन में कीट नियंत्रण हेतु नये कीटनाशी की पहचान
सोयाबीन में इल्ली तथा सेमीलूपर जैसे कीटों से अत्यधिक उपज हानि होती है इनके नियंत्रण हेतु नये कीटनाशी मेटाफ्लूमीजोन 22 प्रतिशत एस.सी. तथा फ्लूबेन्डामाइड 48 एस.सी. 600 मि.ली./हे. प्रभावी पाये गये।

xiv. सोयाबीन की उच्च ग्रंथि उत्पादक जीनोटाइप्स
सोयाबीन की 60 जीनोटाइप्स का परीक्षण ग्रंथि उत्पादन योग्यता जानने के लिए किया गया। जिनमें से जीनोटाइप 2006-54 तथा जे.एस. 97-52 में सर्वाधिक ग्रन्थियँा (49 प्रति पौधा) एवं उच्च ग्रंथि शुष्क भार (310 मि.ग्रा./पौधा) क्रमश: पाई गई।

xv.
ग्रीष्मकालीन धनियॉ पत्ती उत्पादन लाभकारी
सामान्यत: गर्मी में फसलों का उत्पादन कम किया जाता है और खाली पड़े रहते हैं इसलिए धार जिले में ग्रीष्मकालीन धनियॉ पत्ती का उत्पादन तीन कृषक प्रक्षेत्रों पर कराया गया। जहां औसतन 96 क्वि./हे. उपज प्राप्त हुई और रूपये 200,000/- की शुध्द आय भी कम समय में प्रति हे. प्राप्त हुई। अत: ग्रीष्मकालीन धनियॉ उत्पादन अत्यधिक लाभकारी है।

बीज उत्पादन कार्यक्रम

विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र निदेशालय द्वारा खरीफ 2011 में सोयाबीन का 3607.07 क्विं., मूंग का 27.4 क्विं., उर्द का 35.0 क्विं., धान का 900 क्विं., बाजरा का 0.75 क्विं., मूंगफली का 8.0 क्विं., मक्का का 19.10 क्विं. एवं ज्वार का 3.0 क्विं. (कुल 4600.95 क्विं.) प्रजनक बीज उत्पादित किया गया।
रबी 2011-12 में चना का 4500 क्विं., गेंहू का 6340 क्विं., मसूर 16 क्विं., मटर 22.50 क्विं., सरसों 140.40 क्विं., तौरिया 2.00 क्विं., बरसीम 40 क्विं. एवं जई 140 क्विं. (कुल 11216.0 क्विं.) बीज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बीज उत्पादन किस्में

Nucleus

 seed
Gram

JG 11, JG16, JG 130, JAKI 9218, JG 6, and JKG 3

Wheat

MP 12 03, MP 4010, Lok 1, GW 366, GW 322 and Sujata

Pea

Arkel and AP 3

Lentil

JL 3

Mustard

JM 3, JM 4 and Rohini

Breeder Seed

Gram

JG 11, JG16, JG 130, JAKI 9218, JG 12, JG 6, and JKG 3

Wheat

MP 12 03, MP 4010, Lok 1, GW 366, GW 322, GW 273, JW 3020, HW 2004, Sujata and GW 2932

Pea

Arkel and AP 3

Lentil

JL 3

Mustard

JM 3, JM 4 and Rohini

Toria

JT 1

Safflower

JSI 97 and JSF 1

उपमहानिदेशक (उद्यान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली का भ्रमण

डॉ. एच.पी. सिंह, उपमहानिदेशक (उद्यान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा अगस्त 20-22, 2011 को विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में आने वाले कृषि एवं उद्यानिकी महाविद्यालय, इन्दौर एवं मंदसौर का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान डॉ. सिंह द्वारा क्षेत्र में उद्यानिकी का जायजा लिया गया व भविष्य में उद्यानिकी फसल की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया गया।

संगोष्ठी, प्रशिक्षण एवं बैठक

  • बीज उत्पादन कार्यक्रम 2010-11 की समीक्षा एवं खरीफ 2011 की कार्ययोजना में विभिन्न फसलों के नाभकीय तथा प्रजनक बीज उत्पादन कार्यक्रम के निर्धारण हेतु दिनांक 02 मई 2011

  •  दिनांक 16-17 अगस्त 2011 को पंचवर्षीय समीक्षा समिति (दलहन) की बैठक

  • जापान इन्टरनेशनल कॉरपोरेशन एजेन्सी के सहयोग से संचालित म.प्र. में सोयाबीन उत्पादन को बढ़ाने की परियोजना की प्रथम बैठक मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल में सितम्बर 01-02, 2011 को

  • मध्यप्रदेश जल क्षेत्र पुनर्निर्माण परियोजना के अंतर्गत सम्पन्न कार्यक्रम की समीक्षा एवं रबी 2011-12 कार्यक्रम में निर्धारण हेतु बैठक दिनांक नवम्बर 21, 2011

  • मध्यप्रदेश जल क्षेत्र पुनर्निर्माण परियोजना के अंतर्गत पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 12 से 16 दिसम्बर 2011

  • विश्वविद्यालय के सभागार में दिनांक जनवरी 31 फरवरी 2012 को संकर बीज उत्पादन तकनीक विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • मध्यप्रदेश जल क्षेत्र पुनर्निर्माण परियोजना के अंतर्गत दिनांक 02.01.2012 को कृषक संगोष्ठी का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र, उज्जैन में ।

पुरुस्कार

  • विश्वविद्यालय के ऍंाचलिक अनुसंधान केन्द्र, खरगौन को जिले के श्रेष्ठ जैव विविधता उद्यान हेतु जैवविविधता एवं जैवप्रोद्यौगिकी विभाग, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल द्वारा दिनांक 10.05.2011 को पुरस्कृत किया गया।

  •  डॉ. बी. मीनाकुमारी, उपमहानिदेशक (मत्स्य), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा विश्वविद्यालय में क्रियान्वित राष्ट्रीय कृषि नवाचार परियोजना के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, झाबुआ द्वारा स्थापित कड़कनाथ मुर्गी पालन समूह, झायड़ा को कड़कनाथ पालन पर उत्कृष्ट कार्य करने हेतु दिनांक जून 19, 2011 को पुरुस्कृत किया गया।

  • स्वतंत्रता दिवस 2011 समारोह के अवसर पर झाबुआ जिला प्रषासन द्वारा विश्वविद्यालय में क्रियान्वित राष्ट्रीय कृषि नवाचार परियोजना के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, झाबुआ द्वारा स्थापित संतोषी कृषक महिला समूह को जैविक खेती अपनाने व उसको प्रोत्साहित करने हेतु पुरुस्कृत किया गया।

  • गणतंत्रत दिवस 2012 समारोह के अवसर पर श्री रमेश पुत्र श्री मान सिंह ग्राम बागलावार जिला झाबुआ को राष्ट्रीय नवाचार परियोजना के अंर्तगत उत्कृष्ट कृषि कार्य हेतु रुपये 10,000/- का नगद पुरुस्कार जिला प्रशासन, झाबुआ द्वारा प्रदान किया गया।

चना की नई विकसित किस्मों को राष्ट्रीय पहचान

बैंगलौर में अगस्त 20-22, 2011 को आयोजित चना की अखिल भारतीय वार्षिक कार्यशाला में चना अनुसंधान परियोजना, कृषि महाविद्यालय, सीहोर द्वारा विकसित चने की दो नवीन किस्मों आर.व्ही.सी. 202 तथा आर.व्ही.सी. 203 को देश के मध्यक्षेत्र में देर से बुवाई हेतु पहचान किया गया। जिसका पंजीयन राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, पूसा कैम्पस, नई दिल्ली द्वारा कराया गया और राष्ट्रीय पहचान संख्या क्रमश: IC590133 एवं IC590134 पत्र क्रमांक जी.सी.डी. दिनांक 01.11.2011 के द्वारा प्राप्त हुआ।

3. प्रसार शिक्षा/कृषि विज्ञान केन्द्र

मध्य प्रदेश शासन द्वारा ग्वालियर में द्वितीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय अध्यादेश 2008 के प्रस्थापना द्वारा की गई । राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विष्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत चार कृषि महाविद्यालय (ग्वालियर, सीहोर, खण्डवा एवं इंदौर), एक उद्यानिकी महाविद्यालय (मंदसौर), पाँच आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र (मुरैना, खरगोन, झाबुआ, सीहोर एवं इंदौर), चार क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र (उज्जैन, ग्वालियर, मंदसौर एवं खण्डवा), एक कृषि अनुसंधान केन्द्र, बागवई (ग्वालियर), एक फल अनुसंधान केन्द्र ईंटखेड़ी (भोपाल), एक उद्यानिकी अनुसंधान केन्द्र, जॉवरा (रतलाम), एक लवणीय प्रभावित मृदा कृषि अनुसंधान केन्द्र, बड़वाह (खरगौन) एवं 19 कृषि विज्ञान केन्द्र हैं जो प्रदेश के 25 जिलों के छ: कृषि जलवायु अंचलों (गिर्द, मालवा पठार, निमाड़ घाटी, विंध्या पठार, झाबुआ पहाड़ी तथा बुंदेलखण्ड) में फैले हुए हैं।

अ- कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा संचालित गतिविधियाँ

1- प्रक्षेत्र परीक्षण (
On Farm Testing) :- कृषकों के प्रक्षेत्र पर वर्ष 2011-12 में अब तक 155 नवीन तकनीक का परीक्षण किया गया है। जिसका विस्तृत वर्णन नीचे तालिका क्र. 1 में दिया गया है।

तालिका क्र. 1 :
 

क्र.

विषय क्षेत्र

कृषक प्रक्षेत्र परीक्षण 2011-12

1.

 किस्मों का मूल्यांकन

23

2.

 एकीकृत कीट-व्याधि प्रबंधन

19

3.

 एकीकृत बीमारी प्रबंधन

12

4.

 एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन

31

5.

एकीकृत फसल प्रबंधन

11

6.

 नर्सरी प्रबंधन

01

7.

 कार्यभार प्रंबधन

05

8.

 आय अर्जन

09

9.

 प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन

10

10.

 खरपतवार प्रबंधन

12

11.

 उन्नत कृषि यंत्र

10

12.

पशुपालन

06

13.

 स्वंय सहायता समूह

04

14.

 मछली पालन

02

 

कुल योग

155

2- अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (Front Line Demonstration) :- कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा दलहन, तिलहन के अलावा अन्य फसलों पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के माध्यम से अनुसंसित तकनीक का प्रदर्शन किया गया है। जिसका वर्णन नीचे की तालिका क्र. 2 में दिया गया है।

तालिका क्र. 2 :

क्र.

अंग्रिम पक्ति प्रदर्शन

2011-12

क्षेत्रफल (हे.)

लाभार्थियों की संख्या

1

तिलहन

101.60

250

2

दलहन

132.60

333

3

दलहन एवं तिलहन के अलावा (खाद्यान्न)

324.88

1046

4

उद्यम

23

125

 

कुल योग

582.08

1754

3- प्रशिक्षण (Training) :- कृषि विज्ञान केन्द्र का प्रमुख महत्वपूर्ण कार्य किसानों को प्रशिक्षण देना है। लम्बी अवधि के व्यावसायिक दक्षतायुक्त प्रशिक्षण किसानों, कृषक महिलाओं, ग्रामीण युवाओं एवं स्कूली बच्चों के लिए आयोजित किये जाते है जिससे वह कृषि की उन्नत तकनीक अपनाने तथा अपनी खेती से आय बढाने की ओर अग्रसर हो। यह प्रशिक्षण विभिन्न विषयों के अन्तर्गत जगह विशेष की जरूरत के हिसाब से आयोजित किये जाते है।

अन्य विस्तार गतिविधियाँ :- प्रक्षेत्र परीक्षण, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन तथा प्रशिक्षण के अलावा कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा अन्य कृषकों के नवीनतम तकनीक को सीधे किसानो तथा कृषि विस्तार में संलग्न अधिकारियों तक पहुँचाने के लिये कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा किसान मेला, कृषक संगोष्टी, प्रक्षेत्र दिवस आदि गतिविधियाँ भी संचालित की जाती है।

4- कृषि विज्ञान केन्द्र न्यूज लेटर :- विश्वविद्यालय के अधीन कार्यरत् 19 कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा अपने-अपनें केन्द्रों से त्रेमासिक न्यूज लेटर (1000-1500 प्रतियाँ) प्रकाशित कर जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायत तक नि:शुल्क भेजी जा रही है जिनें पिछले महीनों में दिये गये अनुसंधानों का परिणाम तथा अगामी तीन महीनों का कृषि कार्यक्रम प्रकाशित कर उपलब्ध किया जा रहा है।

5- किसान मोबाइल संदेश (के.एम.एस.) :- समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा प्रत्येक जिले मे 1000 जागरुक कृषकों के साथ-साथ कृषि विस्तार अधिकारी एवं बीज विक्रेताओं को प्रत्येक सप्ताह में दो बार आगामी सप्ताह में कृषि में की जाने वाली गतिविधयाँ एवं कीट व्याधि रोकने के उपाय हेतु उन्नत तकनीक की जानकारी उपलब्ध मोबाइल पर एस.एम.एस. के माध्यम से सतत भेजी जा रही है जिसके परिणाम काफी संतोषजनक पाये गये है।

ब- विस्तार निदेशालय द्वारा प्रकाशन :-  कृषि विज्ञान केन्द्रो के अलावा विस्तार निदेशालय स्तर से किसानो और कृषि विस्तार में संलग्न अधिकारियों एवं विश्व विद्यालय में अध्ययनरत् विद्यार्थियों तक विश्वविद्यालय द्वारा ईजात की गई नवीन तकनीक सीधे पहुँचाने के उद्देश्य से त्रेमासिक कृषि विजय पत्रिका, वार्षिक केलेण्डर, विश्वविद्यालय न्यूज लेटर आदि का सतत प्रकाशन कर उपलब्ध कराया जा रहा है।

4. लेखा

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर को आंतरिक स्रोतों से प्राप्त राशि को जोड़कर वर्ष 2011-12 का प्रारंभिक शेष 127.99 लाख से प्रारंभ हुआ था। राज्य शासन द्वारा चालू वित्त वर्ष में समय पर अनुदान उपलब्ध कराने के कारण विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति सामान्यत: संतोषप्रद है। शासन द्वारा वर्ष 2011-12 के माह दिसम्बर 2011 तक निम्नानुसार अनुदान उपलब्ध कराया गया है -
 
(राशि लाखों में)

सं.क्र.

मद

प्रस्तावित राशि

वर्ष 2011-12 दिसम्बर 2011 तक प्राप्त राशि

1.

कृषि आयोजना

890.00

667.50

2.

कृषि आयोजनेत्तर

1900.00

1425.00

3.

आदिवासी उप-योजना (अधोसंरचना)

87.00

65.25

4.

आदिवासी उप-योजना (संधारण अनुदान)

313.00

234.75

5.

विशेष घटक योजना (अधोसंरचना)

130.00

97.50

6.

विशेष घटक योजना (संधारण अनुदान)

230.00

172.50

 

कुल योग

3550.00

2662.50

इस विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आने वाले समस्त महाविद्यालयों/इकाईयों को समस्त राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर को अधीन महाविद्यालयों/ इकाईयों के कर्मचारियों, अधिकारियों को स्ववित्तीय पेंशन, सी.पी.एफ. अवकाश नगदीकरण आदि भुगतान की जा रही है।

विश्वविद्यालय के विभिन्न स्त्रोतों से मिलने वाली राशि के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि प्रक्षेत्रों की अधोसंरचना विकसित कर तथा परामर्श एवं मूल्यांकन प्रक्रिया आदि के द्वारा आंतरिक स्त्रोतों से आय में वृध्दि के प्रयास किये जा रहे हैं।

म.प्र. राज्य शासन के आदेश क्रमांक/बी-4/11/2009/14-2 दिनांक 12.09.2008 के द्वारा राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर की सथ्पाना हेतु अधोसंरचना विकास के लिये राशि 54.69 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।


प्रमाणीकरण संस्था

सामान्य :-


मध्यप्रदेष राज्य में जैविक प्रमाणीकरण संस्था के कार्य संचालन हेतु ज्ञापन पत्र एवं नियमों (मेमोरेण्डम ऑफ एसोषियेषन एण्ड रूल्स ऑफ एसोषियेषन ) के आधार पर समितियों के रजिस्ट्रार म.प्र. भोपाल द्वारा प्रमाण पत्र क्रमांक 01/01/01/166648/06 दिनांक 11/07/2006 से उक्त संस्था का पंजीयन किया गया है।

मध्यप्रदेष शासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के ज्ञापन क्रमांक 15-21/06/14-2 दिनांक 10 अगस्त 2006 द्वारा म.प्र.राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना की गई। संस्था का कार्यालय बी-2, वसुन्धरा, ऑफिस काम्प्लेक्स, गौतम नगर, भोपाल में स्थित है।
संस्था के संचालक मंडल का विवरण :-परिषिष्ट क्रमांक-1 में संलग्न
संस्था हेतु स्वीकृत स्टॉफ विवरण :- परिषिष्ट क्रमांक- 2 में संलग्न है।

उद्देष्य :-

संस्था की स्थापना के प्रमुख उद्देष्य निम्नलिखित हैं :-

  1. राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रत्यायन नीति एवं कार्यक्रम के तहत् जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण संस्था के रूप में कार्य करना।

  2. राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय जैविक उत्पाद कार्यक्रम के तहत् जैविक उत्पाद प्रणाली एवं उत्पाद को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के मानकों कें अनुरूप प्रमाणीकरण करना।

संस्था की वित्तीय व्यवस्था :-

संस्था कों स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेष शासन द्वारा सहायक अनुदान प्रदाय किया जा रहा है। जिसकी वर्षवार प्राप्ति एवं व्यय की जानकारी निम्नानुसार है -

वर्ष

स्वीकृत सहायक अनुदान राषि (रू. लाख में)

प्राप्त सहायक अनुदान राषि (रू. लाख में)

व्यय राषि

1

2

3

4

2006-07

33.00

33.00

0.45

2007-08

33.00

33.00

16.69

2008-09

38.00

38.00

28.23

2009-10

25.00

25.00

33.47

2010-11

66.50

25.00

48.13

2011-12

106.46

25.00

45.78
दिसम्बर 2011 तक

 योग

301.96

174.00

172.75

 

संस्था की प्रगति

  1. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार) नई दिल्ली द्वारा म.प्र. राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था भोपाल को दिनांक 01.10.2011 से तीन वर्ष के लिए जैविक प्रमाणीकरण फसल उत्पादन हेतु अधिमान्यता प्रदान की गई है।

  2. संस्था में एपीडा के निर्देषानुसार तीन शासकीय कृषि प्रक्षेत्र देलाखारी-छिंदवाडा, भोमाकटिया-सिवनी एवं चिरईडोंगरी-मण्डला का चयन किया जाकर निरीक्षण एवं प्रमाणीकरण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन हैं। शासकीय कृषि प्रक्षेत्र चन्द्रकेषर-देवास, समदा-सीधी, फंदा-भोपाल एवं महुआखेडा-ग्वालियर के प्रक्षेत्र अधीक्षकों के द्वारा आवेदन पश्चात कार्यवाही की जावेगी ।

  3. 'एपीडा' द्वारा नई दिल्ली में आयोजित पॉच दिवसीय (दिनांक 18.07.2011 से 22.07.2011 तक) प्रषिक्षण में संस्था के पांच अधिकारियों ने प्रषिक्षण प्राप्त किया।

  4. कार्यालय में अधिकारियों द्वारा NPOP अंतर्गत विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतिकरण एवं सामूहिक चर्चा ।

  5. राज्य कृषि विस्तार एवं प्रषिक्षण संस्थान में क्षेत्रीय जैविक खेती केन्द्र जबलपुर द्वारा आयोजित प्रषिक्षण में पूर्ण रूपेण तकनीकी सहयोग एवं प्रषिक्षण ।

  6. प्रषासन अकादमी में एपीडा द्वारा (म.प्र. की प्रमाणीकरण संस्थाओं एवं ऑपरेटरों हेतु) ट्रेसनेट ऑन ऑरगेिनक प्रोडक्सन विषय पर आयोजित प्रषिक्षण में सहयोग।

  7. प्रदेष के समस्त जिला प्रमुखों (उप संचालक कृषि) को संस्था की जानकारी एवं प्रमाणीकरण प्रक्रिया से संबंधित ब्रोसर का प्रेषण।

  8. संस्था में प्रदेष के शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों के अधीक्षकों का जैविक प्रमाणीकरण कार्यक्रम विषयक प्रषिक्षण।

  9. नई भरती हुए सहायक संचालकों का जैविक प्रमाणीकरण प्रक्रिया एवं जैविक कृषि के राष्ट्रीय मानकों पर राज्य कृषि विस्तार एवं प्रषिक्षण संस्थान में प्रषिक्षण।

  10.  राज्य कृषि विस्तार एवं प्रषिक्षण संस्थान में संस्था के अधिकारियों द्वारा जैविक प्रमाणीकरण विषयक प्रषिक्षण।

  11. समय-समय पर सम्पन्न कृषि मेलों/प्रदर्षनियों/वर्कशाप के माध्यम से जैविक प्रमाणीकरण विषयक प्रचार प्रसार।

  12. संचालक मंडल के निर्देषानुसार, संस्था में कार्यरत अधिकारियों द्वारा जैविक खेती क्षेत्रों एवं भविष्य में जैविक खेती हेतु संभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन किया जा रहा है।

प्रस्तावित कार्यवाही
 

  1. संस्था द्वारा शासकीय एवं निजी कृषकों के द्वारा जैविक फसल उत्पादन कार्यक्रम के प्रमाणीकरण का कार्य किया जायेगा।

  2. जैविक प्रमाणीकरण के लिए कृषकों को जानकारी हेतु संपर्क एवं समूह चर्चा आदि के लिए क्षेत्र भ्रमण कर प्रयास किये जावेगें।


परिशिष्ट क्रमांक-1

म.प्र. राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था के संचालक मण्डल के सदस्यों की सूची

1.

कृषि उत्पादन आयुक्त 
मध्यप्रदेश शासन

अध्यक्ष

2.

प्रमुख सचिव कृषि,
मध्य प्रदेश शासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग

सदस्य

3.

प्रमुख सचिव,
मध्य प्रदेश शासन, वित्त विभाग

--''--

4.

प्रमुख सचिव,
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग

 --''--

5.

प्रबंध संचालक,
दि.म.प्र. स्टेट एग्रो इण्डस्ट्रीज डेव्हेलपमेंट कारपोरेशन लिमि.

--''--

6.

प्रबंध संचालक
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड

--''--

7.

प्रबंध संचालक
मध्यप्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम

--''--

8.

प्रबंध संचालक
एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव्ह डेयरी फेडरेशन लिमि.

--''--

9.

संचालक
उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, म.प्र.

--''--

10.

संचालक,
अनुसंधान सेवाऐं,जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर

--''--

11.

संचालक,
किसान कल्याण तथा कृषि विकास,

--''--

12.

प्रबंध संचालक,
म.प्र. राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था, भोपाल

--''--

13.

प्रमाणित उत्पादक प्रतिनिधि
मध्यप्रदेश शासन द्वारा नामांकित

--''--

14.

जैविक प्रसंस्करण इकाई प्रतिनिधि
मध्यप्रदेश शासन द्वारा नामांकित

--''--

15.

जैविक विपणन इकाई प्रतिनिधि
मध्यप्रदेश शासन द्वारा नामांकित

--''--

16.

एपीडा प्रतिनिधि

--''--

17.

प्रबंध संचालक,
मध्यप्रदेश राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था

सदस्य-सचिव

परिशिष्ट क्रमांक-2

मध्यप्रदेष राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था, भोपाल
संस्था हेतु स्वीकृत स्टॉफ विवरण

म.प्र.षासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा स्वीकृत पदों का विवरण

क्र.

पद का नाम

स्वीकृत पद संख्या

भरे हुए पद

रिक्त पद

पदों को भरने की व्यवस्था

रिमार्क

1

2

3

4

5

6

7

1

प्रबंध संचालक

1

1

0

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ

2

संयुक्त संचालक कृषि (जैविक)

1

0

1

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर


रिक्त

3

उप संचालक कृषि (जैविक प्रमाणीकरण)

1

1

0

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ

4

उप संचालक कृषि
(जैविक निरीक्षण)

1

1

0

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर

-

5

गुणवत्ता प्रबंधक

1

1

0

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर

-

6

मूल्यांकन अधिकारी

1

-

1

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर

रिक्त

7

जैविक निरीक्षक

4

4

0

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर

तीन पद सहायक संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विभाग से एवं एक पद बीज प्रमाणीकरण संस्था से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ

8

लेखापाल

1

1

0

अतिषेष/ संिवदा कर्मचारियों से

आउट सोसिंग से संविदा पर

9

शीघ्रलेखक

1

-

1

अतिषेष कर्मचारियों से

रिक्त

10

सहायक ग्रेड-1

1

1

-

अतिषेष कर्मचारियों से

तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर

11
 

कम्प्यूटर ऑपरेटर

1

1

0

अतिषेष/ संिवदा कर्मचारियों से

आउट सोसिंग से संविदा पर

12

सहायक ग्रेड - 2

1

-

1

अतिषेष कर्मचारियों से

रिक्त

13

सहायक ग्रेड-3

2

-

2

अतिषेष कर्मचारियों से

रिक्त

14

भृत्य

2

-

2

संिवदा से भरने की स्वीकृती प्राप्त

02 कर्मचारी दैनिक वेतन पर

15

चौकीदार

1

-

1

संिवदा से भरने की स्वीकृती प्राप्त

रिक्त

16

वाहन चालक

2

-

2

-

01 कर्मचारी दैनिक वेतन पर

 

योग

 

22

11

11

-

राज्य कृषि विस्तार एवं प्रषिक्षण संस्थान (स्वषासी)

राज्य कृषि विस्तार एवं प्रषिक्षण संस्थान, बरखेडीकलां, भोपाल की स्थापना 11 मई 2006 को की गई थी जिसे म. प्र. शासन के आदेष क्रमांक बी-6/2/06/14-2 दिनांक 22 दिसम्बर 07 को स्वषासी संस्थान के रुप में पंजीकृत किया गया।

1) उद्देष्य & स्वषासी संस्था के रुप में संस्थान की स्थापना के प्रमुख उद्देष्य निम्नानुसार है-

  1. कृषि एवं सहयोगी विभागों के कार्यपालिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विभाग की आवष्यकता के अनुरुप प्रषिक्षण देना।

  2. राज्य स्तरीय कार्यषाला, संगोष्ठियां एवं सम्मेलनों को आयोजित करवाना।

  3. कृषि क्षेत्र से संबंधित नवीनतम साहित्य का प्रकाषन, लघु फिल्म, सीडी आदि तैयार करवाना।

  4. विभिन्न परियोजनाओं का प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन करना।

  5. राष्ट्रीय स्तर की कार्यषालाओं/संगोष्ठियों में विभाग का प्रतिनिधित्व करना/करवाना।

  6. कृषि संबंधी सूचना केन्द्र के रुप में कार्य करना।

  7. विस्तार सुधार कार्यक्रम में शीर्षस्थ प्रषिक्षण संस्था के रुप में मानव संसाधन विकास एवं अन्य राज्य स्तरीय गतिविधियां संचालित करना।

  8. भारत सरकार से सहायता प्राप्त समस्त ''आफ बजट'' योजनाओं की राषि प्राप्त करने हेतु अधिकृत संस्था के रुप में कार्य करना।

  9. देष की समस्त शीर्षस्थ प्रषिक्षण संस्थाओं यथा मैनेज हैदराबाद, ई.ई.आई. आनंद से समन्वय।

  10. पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एग्रीकल्चरल एक्सटेंषन मैनेजमेंट (PGDAEM) एंव डिप्लोमा इन एग्री. एक्सटेंषन सर्विसेस फार इनपुट डीलर्स (DAESI) का संचालन।

  11. संस्थान में प्रमुखत: प्रत्यास्मरण प्रषिक्षण, कौषल्य विकास प्रषिक्षण, आधारभूत प्रषिक्षण एवं विषेष तकनीकी प्रषिक्षण आयोजित किये जाते है।

2) संस्थान का संगठनात्मक स्वरुप - म. प्र. शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मंत्रालय द्वारा आदेष क्रमांक बी-6/2/06/14-2 दिनांक 20.12.07 द्वारा संस्थान के संचालन हेतु साधारण सभा नामांकित की गई:-
 

1

कृषि उत्पादन आयुक्त म0प्र0शासन

अध्यक्ष

2

प्रमुख सचिव,म0प्र0शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग

उपाध्यक्ष

3

प्रमुख सचिव,म0प्र0शासन मछली पालन विभाग

सदस्य

4

प्रमुख सचिव,म0प्र0शासन पशु चिकित्सा सेवाए

सदस्य

5

प्रमुख सचिव,म0प्र0शासन उद्यानिकी एवं खाद प्रसंस्करण

सदस्य

6

प्रमुख सचिव म0प्र0शासन वित्त विभाग /उप सचिव स्तर या उससे ऊपरका प्रतिनिधि

सदस्य

7

संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास

सदस्य

8

आयुक्त रेशम पालन म0प्र0

सदस्य

9

संचालक कृषि अभियांत्रिकी

सदस्य

10

संचालक समिति राज्य कृषि विस्तार एवं प्रषिक्षण संस्थान, बरखेड़ीकला भोपाल

सदस्य/सचिव

म0प्र0 शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ,मंत्रालय भोपाल के पत्र क्रमांक बी-6-4/2010/ 14-2,दिनांक 16.4.2010 अनुसार कार्यकारी परिषद का गठन किया गया :-

1

प्रमुख सचिव,म0प्र0शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग

अध्यक्ष

2

संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास

उपाध्यक्ष

3

उप सचिव म0प्र0शासन वित्त विभाग

सदस्य

4

संचालक कृषि अभियांत्रिकी

सदस्य

5

संचालक पशु चिकित्सा सेवाऐं

सदस्य

6

संचालक मछलीपालन

सदस्य

7

संचालक उद्यानिकी एवं खाध्य प्रसंस्करण, म. प्र.

सदस्य

8

आयुक्त रेशम पालन म0प्र0

सदस्य

9

जवाहरलाल नेहरू कृ.वि.वि.जबलपुर का प्रतिनिध (प्रध्यापक स्तर से कम न हो )

सदस्य

10

रा.वि.सिं.कृ.वि.वि. ग्वालियर का प्रतिनिध (प्रध्यापक स्तर से कम न हो ।)

सदस्य

11

संचालक समिति राज्य कृषि विस्तार एवं प्रषिक्षण संस्थान, बरखेड़ीकला भोपाल

सदस्य/ सचिव

3) संस्थान में स्वीकृत अमला -

संस्थान हेतु म. प्र. शासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के पत्र क्र. बी-6/2/06/14-2 दिनांक 11 मई 2006 द्वारा स्वीेकृत पद एवं वर्तमान में भरे पद निम्नानुसार है-

क्र.

पद

स्वीकृत संख्या

भरे पद

1

राजपत्रित वर्ग 2 से लेकर संचालक तक

15

12

2

तृतीय श्रेणी कार्यपालिक एवं लिपिक वर्गीय

23

09

3

चतुर्थ श्रेणी

07

07

 

योग

55

28

4) संस्थान में उपलब्ध संसाधन -

  • वर्ष 2007-08 एवं 2008-09 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत सुदृढ़िकरण कार्य किया गया जिसमें निम्न इन्फ्रास्ट्रक्चरल सुविधाएं विकसित की गई।
     

    • परिसर :- संस्थान के लगभग 7 एकड के परिसर में सुव्यवस्थित लॉन, कान्क्रीट रोड, वृक्षारोपण आदि कार्य किये गये।

    • प्रषासनिक भवन :- संस्थान के प्रषासनिक भवन में पुराने भवन को रिनोवेट कर 4 वातानुकूलित व्याख्यान कक्ष, 1 वातानुकूलित कम्प्यूटर लैब, 1 पुस्तकालय, 1 वातानुकूलित 60 सीटर ऑडीटोरियम, 1 वातानुकूलित बैठक कक्ष, अधिकारियो/कर्मचारियों के बैठने हेतु 20 वातानुकूलित केबिन/कक्ष आदि सुविधाएं विकसित की गई। इसके अतिरिक्त 250 सीटर आडिटोरियम निर्माणाधीन है। प्रषासनिक भवन में सोलर सिस्टम की सुविधा भी है। जिससे प्रषासनिक भवन में प्रत्येक कक्ष/केबिन में दस सीएफएल एवं एक-एक पंखे को जोडा गया है। पावरकट के समय यह सिस्टम अत्यंत उपयोगी सिद्व हो रहा है। वर्ष 2010-11 में भारत सरकार द्वारा ''आत्मा'' अंतर्गत संस्थान के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास हेतु राषि रु. 100.00 लाख (एक करोड) का प्रावधान संषोधित कैफेटेरिया में किया गया है। उक्त राषि में से संस्थान के प्रषासनिक भवन का विस्तार करवाया जा रहा है जिसमें रु. 50.00 लाख (पचास लाख) की लागत से एक कान्फ्रेस हॉल, 4 अधिकारी कक्ष, 1 भंडार कक्ष तथा 1 संग्रहालय/किसान काल सेंटर हेतु कक्ष निर्माणाधीन हैं।

    • छात्रावास सुविधा :- संस्थान में नर्मदा एवं ताप्ती छात्रावास में निम्नानुसार सुविधाएं उपलब्ध है -
       

      • नर्मदा छात्रावास 100 बैड की सुविधा उपलब्ध है ।

      • ताप्ती छात्रावास 74 बैड की सुविधा उपलब्ध है ।

      • दोनों छात्रावासों में कुल आवासीय क्षमता 174 ( कुछ कमरो मे 2 बैड एवं 4 बैड की सुविधा उपलब्ध है )की है।

      • आवास सुविधा :- संस्थान परिसर में ई-टाइप एक प्रबंधक आवास, ई-टाइप 4 आवास, एफ-टाइप 4 आवास, जी-टाइप 8 आवास उपलब्ध हैं।

      • जल प्रदाय व्यवस्था :- संस्थान की जल प्रदाय व्यवस्था के अंतर्गत 5 टयूब वैल तथा दो लाख लीटर क्षमता का सम्पवैल एवं एक लाख लीटर क्षमता का ओवरहैड टैंक शामिल है। किन्तु 3 नलकूप मात्र 15-20 मिनट चलने से विषेषकर ग्रीष्म ऋतु में जल प्रदाय की समस्या गंभीर हो जाती है एवं प्राइवेट टैंकरों से वाटर सप्लाई करवाना पड़ती है।

      • खेलकूद सुविधा :- संस्थान के नर्मदा छात्रावास में शंतरज, कैरम, टेबल टेनिस आदि खेलने की व्यवस्था है तथा परिसर में व्हालीबाल एवं बेडमिटन खेलने की व्यवस्था विकसित की गई है।


M.P. Krishi
 
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